
इस बजट में शिक्षा का विशेष ध्यान रखा है। वित्त मंत्री की हैसियत से मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने शिक्षा के लिए 12 हजार 472 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। यह राशि बजट में किसी विभाग को आवंटित सबसे बड़ी राशि है। इसमें पढऩे वाले बच्चों के लिए सौगातों के कई पिटारे खोले गए हैं, लेकिन पढ़ाने वाले शिक्षाकर्मियों को कुछ नहीं मिला है। संविलियन की घोषणा तो दूर, उन्हें सातवें वेतनमान का लाभ भी नहीं मिल सका है। हालांकि सरकार ने बच्चों का ध्यान रखते हुए अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों की पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति की वार्षिक दर 1 हजार 100 से बढ़ाकर 2 हजार 500 रुपए कर दी है। बच्चों के बौद्धिक विकास के लिए 11 वीं और 12 वीं के विद्यार्थियों को हमर छत्तीसगढ़ योजना में जोड़ा गया है।06 करोड़ रुपए अशासकीय स्कूलों में शिक्षण शुल्क की प्रतिपूर्ति के लिए दिए है।
3.68 करोड़ रु. विद्यार्थी दुर्घटना बीमा के लिए
06 करोड़ रुपए अशासकीय स्कूलों में शिक्षण शुल्क की प्रतिपूर्ति के लिए
6065 करोड़ गणवेश वितरण योजना के लिए
मुझ पर असर
सडक़ों के विस्तार से शहर और गांव के बीच दूरियां कम होगी। इससे विकास के रास्ते खुलेंगे।
ग्रामीण क्षेत्र में सिंचाई सुविधा बढऩे से किसानों को फायदा होगा।
छात्रवृत्ति बढऩे से पढ़ाई की राह आसान।
ये होता तो अच्छा होता
स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों के आधार पर समर्थन मूल्य दोगुना करने राशि का प्रावधान किया जाता, तो किसानों को ज्यादा खुशी होती। तीन साल के बकाया बोनस पर भी बजट में कुछ नहीं है।नए स्कूल-कॉलेजों के शुरू होने के बाद शिक्षकों और अन्य संसाधानों की पूर्ति के लिए बजट में राशि होनी चाहिए थी।बिजली की बढ़ती कीमतों से राहत देने की कोई बात बजट में नहीं है।बजट में स्कूल शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा में अधोसंरचना सहित विकास के लिए करोड़ों रुपए का प्रस्ताव है। लेकिन ज्ञान का रथ हांकने वाले सारथियों के लिए बड़ी राहत नहीं दी गई है।