CG News: मध्यप्रदेश के शिवपुरी से 88 वर्षीय बालचंद्र स्वर्णकार अपने बेटे को छुड़ाने रायपुर पहुंचे हैं। उनका आरोप है कि पोतों ने उनके बेटे को दलदलसिवनी के नशामुक्ति केंद्र में जबरदस्ती भर्ती करा दिया है।
CG News: जिस उम्र में बेटे अपने पिता की देखभाल करते हैं, उस उम्र में एक बुजुर्ग पिता को अपने बेटे को छुड़ाने के लिए चक्कर काटना पड़ रहा है। मध्यप्रदेश से 800 किलोमीटर से अधिक का सफर करके रायपुर आना पड़ा है। 88 वर्षीय बालचंद्र स्वर्णकार अपने बेटे आरडी स्वर्णकार को लेने के लिए मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले से सोमवार को रायपुर पहुंचे।
दरअसल उनका आरोप है कि उनके बेटे को उनके पोतों ने दलदलसिवनी के एक नशामुक्ति केंद्र में जबरदस्ती भर्ती करा दिया है। वे अपने बेटे को अपने साथ ले जाना चाहते हैं, लेकिन उन्हें न पुलिस से मदद मिल रही है न ही प्रशासन से। उन्होंने समाज कल्याण विभाग में आवेदन लगाया है। इस पर फिलहाल कोई एक्शन नहीं हो पाया है। विभाग ने नशामुक्ति केंद्र को नोटिस भेजने का दावा किया।
आरडी स्वर्णकार छत्तीसगढ़ विधानसभा के रिटायर्ड अधिकारी हैं। करीब 3 माह से उन्हें दलदल सिवनी के शुद्धि नशामुक्ति केंद्र में भर्ती कराया गया है। उनके 88 वर्षीय पिता बालचंद्र स्वर्णकार मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले की न्यू कॉलोनी बैराड़ में रहते हैं। उन्हें इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने रायपुर में रहने वाले उनके पुत्रों से पूछा। उन्होंने कुछ नहीं बताया। इसके बाद बुजुर्ग ने अपने छोटे बेटे दिलीप स्वर्णकार को रायपुर भेजा। दिलीप ने अपने बड़े भाई आरडी स्वर्णकार को छुड़ाने के लिए पंडरी थाने में आवेदन दिया। इसके बाद दिलीप ने आरडी से मुलाकात की। उस समय आरडी ने उन्हें छुड़ाने के लिए कहा है।
मामले की शिकायत मिली है। नशामुक्ति केंद्र को नोटिस जारी किया गया है। उनका जवाब मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी- अरविंद गेडाम, संयुक्त संचालक, समाज कल्याण विभाग, रायपुर
CG News: इसके बाद सोमवार को बुजुर्ग बालचंद्र शिवपुरी से रायपुर पहुंचे। उन्होंने समाज कल्याण विभाग में पूरे मामले की शिकायत की और अपने बेटे को नशामुक्ति केंद्र से छुड़ाने की मांग की। इस पर विभाग ने शिकायत मिलने पर नशामुक्ति केंद्र को नोटिस जारी किया है।
अधिकारियों का कहना है कि नोटिस का जवाब मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी। बुजुर्ग ने आरोप लगाया है कि उनके बड़े बेटे को जबरदस्ती नशामुक्ति केंद्र में रखा गया है। वे वहां नहीं रहना चाहते हैं। करीब 3 माह से उन्हें नशामुक्ति केंद्र में बंधक की तरह रखा गया है। उन्होंने अपने पोतों पर भी जबरदस्ती रखने का आरोप लगाया है।