CG Road News: रायपुर में आरडीए और नगर निगम की खींचतान में कमल विहार के रहवासी धोखे का शिकार हो गए हैं। इससे लोगों में आक्रोश है।
CG News: छत्तीसगढ़ के रायपुर में आरडीए और नगर निगम की खींचतान में कमल विहार के रहवासी धोखे का शिकार हो गए हैं। शहर की सबसे सुविधायुक्त आवासीय कॉलोनी का खाका दिखाकर रायपुर विकास प्राधिकरण ने सेक्टर एक में सैकड़ों लोगों को प्लॉट बेचा, परंतु उनके निकलने के लिए मेन सड़क ही आज तक नहीं बनाई है। इससे लोगों में आक्रोश है। उनका कहना है कि कभी उनके घरों के सामने खड़ी गाडि़यों को नुकसान पहुंचाया जाता है तो कभी पत्थर मारकर घरों के कांच तोड़ने की घटनाएं हो रही हैं।
CG News; कमल विहार बनने के साथ ही अपने ड्राइंग-डिजाइन में मास्टर प्लान की रोड-3 बनाने का खाका दिखाया गया था कि सेक्टर-1 के रहवासी सीधे संतोषीनगर से जगदलपुर रोड को जोड़ने वाली नहर रोड में निकलेंगे। जिस पुराने नहर-नाली पर सेक्टर-1 से लगी हुई सुमित नगर बस्ती है, उसे दूसरी जगह व्यवस्थापित करने का काम निगम प्रशासन करेगा। इसी रास्ते को मास्टर प्लान के रूप में लोगों को दिखाकर प्लाॅट बेचने में आरडीए सफल हो गया, लेकिन जब रोड बनाने की बारी आई तो ढुलमुल रवैया अपना लिया है। नतीजा, मास्टर प्लान की रोड बनाने का मामला पूरी तरह से कागजी ही साबित हो रहा है।
इधर नगर निगम के अधिकारी यह तर्क तो देते हैं कि मास्टर प्लान की रोड प्रस्तावित है। इसके लिए सुमित नगर बस्ती जो अवैध रूप से पुराने नहर नाली पर बसी है, उन लोगों को पिछले तीन सालों में कई बार नोटिस जारी किया है। यह बस्ती मठपुरैना में शिफ्ट करने से कमल विहार सेक्टर-1 के लिए मास्टर प्लान की रोड का रास्ता साफ हो जाएगा। इसका प्रस्ताव भी निगम के जोन 10 में तैयार किया गया, लेकिन आज तक उस पर अमल करने के बजाय आनाकानी ही चल रही है। जबकि, सेक्टर-1 में बसाहट तेजी से बढ रही है।
वहीं दूसरी ओर आरडीए के अफसरों का कहना है कि जिस प्लान के आधार पर लोगों को कमल विहार सेक्टर-1 में प्लाट बेचा है, उस पर अमल करने के लिए निगम प्रशासन को तीन से चार बार पत्र प्रेषित किया है। ताकि सेक्टर-1 के लोगों की आवाजाही मास्टर प्लान की रोड बनने पर होने लगे। यह रोड सीधे मुख्य नगर रोड से जुड़ जाने से रहवासियों की परेशानी हमेशा के लिए दूर हो जाएगी।
आरडीए के अधिकारी इस बात के लिए भी परेशान है कि उनका आवासीय प्रोजेक्ट बस्ती की वजह से अधर में अटका हुआ है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के मकान देने के लिए लाखों रुपए की बुकिंग की जा चुकी है, परंतु उस निर्माण की केवल नींव ही डल पाई है। इसके लिए निगम प्रशासन को फिर पत्र भेजा है।