रायपुर

कांगे्रस और कुर्मी समाज का अभेद्य गढ़ है पाटन, 11 चुनावों में 10 बार बने कुर्मी विधायक

जातिगत दृष्टि से पाटन कुर्मी समाज बाहुल्य और राजनीति में कांग्रेस का गढ़ रहा है। यही वजह है कि यहां से कुर्मी समाज के लोग ही क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं।

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Oct 31, 2018
rajasthan election 2018

निर्मल साहू/भिलाई। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के पाटन एकमात्र ऐसी सीट है जहां के मतदाता कुर्मी समाज से ही अपना विधायक चुनते रहे हैं। इनमें भी कांग्रेस से ही ज्यादातर। अब तक हुए 11 विधानसभा चुनाव में 10 बार कुर्मी समाज से ही विधायक निर्वाचित हुए। मात्र एक बार अगड़ी जाति से कैलाशचंद शर्मा चुनाव जीते, ऐसा त्रिकोणीय संघर्ष के कारण हो सका। यहां हर बार कुर्मी वर्सेस कुर्मी प्रत्याशी ही टकराते रहे हैं। पहली बार भाजपा ने साहू उम्मीदवार मैदान में उतारा है।

जातिगत दृष्टि से पाटन कुर्मी समाज बाहुल्य और राजनीति में कांग्रेस का गढ़ रहा है। यही वजह है कि यहां से कुर्मी समाज के लोग ही क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं। पहले साठ-सत्तर के दशक में यह क्षेत्र भाठागांव विधानसभा के अंतर्गत आता था।

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राजनीति पर कुर्मी समाज का इतना अधिक प्रभाव था कि 1967 और 1972 के चुनाव में पाटन की जनता ने निर्दलीय केजुराम वर्मा को चुनकर अविभाजित मध्यप्रदेश के सदन में भेजा। इसके बाद 1977 में कांग्रेस ने केजुराम को अपना प्रत्याशी बनाया और उन्होंने जीत की हैट्रिक बनाई।

1980 में कांग्रेस ने केजुराम का टिकट काटकर चेलाराम चंद्राकर को उम्मीदवार बनाया और उन्होंने भी जीत दर्ज की। 198 5 में कांग्रेस ने फिर प्रत्याशी बदल दिया। इस बार कांग्रेस से अनंतराम वर्मा का मुकाबला करने भाजपा ने केजुराम को मैदान में उतारा। कड़ा मुकाबले में अंनतराम की जीत हुई।

1990 में कांग्रेस का तिलिस्म टूटा
पहली बार 1990 में कांग्रेस और कुर्मी समाज का तिलस्म टूटा। भारतीय जनता पार्टी के कैलाशचंद्र शर्मा विधायक चुने गए। यहां कांग्रेस से अंनतराम वर्मा और केजुराम निर्दलीय मैदान में उतरे और दोनों की प्रतिस्पर्धा में मुकाबला त्रिकोणीय हो गया जिसका फायदा शर्मा को मिला। इसके बाद अब तक कुर्मी के अलावा किसी और जाति से यहां विधायक निर्वाचित नहीं हुए हैं।

चाचा-भतीजा रहे आमने-सामने
2008 में कांग्रेस से भूपेश बघेल और भाजपा से विजय बघेल चाचा-भतीजा आमने-सामने थे जिसमें विजय बघेल पहली बार विधायक चुने गए। इससे पहले 2003 में भी दोनों का मुकाबला हुआ था जिसमें विजय ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से चुनाव लड़ा था।

कुर्मी सामज पर रहा कांग्रेस का प्रभाव
पाटन शुरू से ही राजनीतिक दृष्टि से जागरुक क्षेत्र माना जाता रहा है। दुर्ग जिले में कांगे्रस का नेतृत्व कुर्मी समाज के स्वतंत्रता सेनानी उदय राम के हाथों में था। तब कांग्रेस में जिला मंत्री ही सबसे बड़ा पद होता था। उदय राम को लोग मंत्रीजी ही कहकर बुलाते थे। यही वजह रही कि पूरे पाटन में कुर्मी समाज पर कांग्रेस का प्रभाव रहा और उनके ही विधायक चुनकर आते रहे।

चौथी बार प्रतिनिधित्व कर रहे हैं भूपेश
1993 में युवक कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल को अवसर दिया और उन्होंने जीत दर्ज की।२९.४६ प्रतिशत वोट हासिल कर अपना सामाजिक रुतबा कायम रखने में सफल रहे। अब की बार केजुराम बसपा से किस्मत अजमाने उतर गए। भूपेश 1998 , 2003 और अब 2013 से चौथी बार क्षेत्र का नेतृत्व कर रहे हैं।

भाजपा ने साहू उम्मीदवार उतारकर खेला बड़ा दांव
भाजपा ने इस बार साहू उम्मीदवार मोतीलाल साहू मैदान में उतारकर बड़ा दांव खेला है। 2008 में परिसीमन के बाद क्षेत्र की भौगोलिक के साथ-साथ अब राजनीतिक परिस्थितियां भी बिलकुल बदल गई है। पहले 35 फीसदी कुर्मी बहुल पाटन में अब गुंडरदेही के साहू बहुल क्षेत्र 45 गांव जुड़ गए हैं। इससे जातिगत आंकड़ा का अनुपात बदल गया है। अब यहां 35 साहू, 30 कुर्मी, २० फीसदी सतनामी एवं शेष में अन्य पिछड़ा वर्ग व अगड़ी जाति के लोग हैं।

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Published on:
31 Oct 2018 05:31 pm
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