रायपुर

यहां 56 किमी लम्बी सड़क बनाने के लिए अब तक 70 से अधिक जवान दे चुके हैं अपनी शहादत

लाल आतंक के खौफ के साए में दोरनापाल से जगरगुंडा तक लगभग 1.22 करोड़ की लागत से 56 किमी सड़क का निर्माण पिछले तीन साल से कराया जा रहा है।
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Oct 31, 2018
CG Election 2018
तीन सालों से पूरा होने की बाट जोह रही 70 जवानों के रक्त से लाल 56 किमी लम्बी सड़क

रायपुर. लाल आतंक के खौफ के साए में दोरनापाल से जगरगुंडा तक लगभग 1.22 करोड़ की लागत से 56 किमी सड़क का निर्माण पिछले तीन साल से कराया जा रहा है। अति संवेदनशील क्षेत्र में इस सड़क निर्माण के दौरान अब तक लगभग 70 से अधिक जवान अपनी शहादत दे चुके हैं। जवानों के खून से रक्तरंजित यह सडक़ कब तक पूरी होगी और कब 1.50 लाख आदिवासी मुख्यधारा से जुड़ेगे कोई नहीं जानता। पढ़िए आकाश शुक्ला की कोंटा विधानसभा के जगरगुंडा से ग्राउंड रिपोर्ट।

सुकमा जिला मुख्यालय से 35 किमी दोरनापाल है, जहां से 56 किमी का सड़क निर्माण चल रहा है। माओवादियों का यह गढ़ भयावह वारदातों के कारण हमेशा सुर्खियों रहा है। जंगल की अद्भुत खूबसूरती और प्राकृतिक आकर्षण के बीच यहाँ की खामोशियाँ चीखती चिल्लाती आदिवासियों की दुर्दशा को बयां करती है। सरकार विकास के लाख दावे करे, लेकिन आज भी यहाँ के आदिवासी सडक़, पानी बिजली, रोजी, रोटी जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।

आदिवासी लीलाराम, रमैय्या, कोटी मडक़ाम आदि ग्रामीणों ने पत्रिका को बताया कि शासन की योजनाएं तो दूर स्वास्थ्य, बिजली, पानी शिक्षा से ही वर्षों से महरूम हैं। शासन प्रशासन यहां नजर ही नहीं आता, जिसे हम अपनी समस्याओं को बता सके। स्थिति का जायजा लेने दोरानपाल, गोरगुंडरा, पोलमपल्ली, कंकेरलंका, चिंतागुफा, चिंतलनार होते हुए जगरगुंडा तक के सफर के दौरान ग्रामीणों ने बताया कि सराकर की किसी भी योजनाओं का लाभ उन्हें नहीं मिल रहा। बच्चे पढऩा चाहते हैं, लेकिन अभाव में बचपन से ही रोजी-रोटी के लिए जद्दोजहद में लग जाते हैं।

विकास भला किस रास्ते से आएगा
आपको जानकर हैरानी होगी कि सुकमा की लाइफ लाइन मानी जाने वाली इस सडक का टेंडर एक दो नहीं पूरे पांच बार निरस्त हुआ था। खौफजद इलाका होने के कारण निर्माण एजेंसियां अपना हाथ खींचती रही। बाद में प्रशासन के सुरक्षा देने की बात के बाद निर्माण एजेंसियों ने काम शुरू किया।

कई टुकड़ों में जवानों के सुरक्षा के बीच निर्माण होने के बाद भी अभी तक यह पूरा नहीं हुआ है। जो आने वाले विधानसभा चुनाव में एक बड़ा मुद्दा होगा। क्योंकि इसके बनने के बाद उम्मीद हैं कि विकास अंदरूनी इलाकों तक पहुंचे। ग्रामीणों ने कहा कि सड़क पिछले तीन साल से बन रही है। जल्द ही इसे पूरा कराना चाहिए। जिससे हमारे क्षेत्र का विकास हो सके। क्योंकि इसके बनने से हम इस मार्ग से जिला मुख्यालय तक जुड़ सकेंगे।

विधायक कोंटा कवासी लखमा ने कहा - निर्माण तो बहुत पहले किया जाना था लेकिन सरकार ने ध्यान नहीं दिया। जिला मुख्यालय से कटे होने के कारण विकास से दूर यहाँ के लोग पलायन कर रहे है। ये गंभीर मसला है। 3 बार से प्रदेश में भाजपा की सरकार है।सरकार कहती है, कि आदिवासियों के लिये बहुत काम की है। लेकिन हकीकत इससे विपरीत ही है। लोगों को शासन की योजनाओं का लाभ ही नहीं मिला है।

सुकमा कलक्टर जय प्रकाश मौर्य ने कहा - हां, ये इलाका काफी संवेदनशील रहा है। आने वाले समय में काम जल्द पूरा हो जाएगा। इससे लगभग डेढ़ लाख आदिवासियों विकास की मुख्यधारा से जुड़ सकेंगे। सुरक्षा को लेकर हम पूरी तरह तैयार है।

Updated on:
31 Oct 2018 04:11 pm
Published on:
31 Oct 2018 04:02 pm