रायपुर

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव: मदद बिना बदहाल बुनकर, पानी बिना बेबस किसान

नेताओं ने हमें शहरी और गंवई में बांट दिया। हमें विकास के नाम पर सड़क तो दूर बरसात में ढंग की पगडंडी भी नहीं मिली। कोरबा ऐसा विधानसभा क्षेत्र है जो आधा शहरी है तो आधे में ग्रामीण परिवेश नजर आता है।

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Oct 29, 2018
छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव: मदद बिना बदहाल बुनकर, पानी बिना बेबस किसान

रायपुर. हमारे नेता ने भी हमें शहरी और गंवई में बांट दिया। हमें विकास के नाम पर सड़क तो दूर बरसात में ढंग की पगडंडी भी नहीं मिली। कोरबा ऐसा विधानसभा क्षेत्र है जो आधा शहरी है तो आधे में ग्रामीण परिवेश नजर आता है। शहर और गाँव के विकास में तालमेल नहीं बिठा पाने की वजह से पिछले चुनाव में बोधराम कंवर को हार का सामना करना पड़ा था। जिन मुददें को लेकर पिछलीे बार जनता के बीच नाराजगी थी। वह आज भी उसी स्थिति में है। केबिनेट मंत्री का दर्जा मिलने के बाद भी बदहाली दूर करने में लखन कुछ खास नहीं कर सके। पढ़िए कोरबा से आकाश श्रीवास्तव की ग्राउंड रिपोर्ट।

कोसा का गढ़ छुरी, हैंडलूम पार्क खटाई में, दो पुल बने ही नहीं
छुरी नगर कोसा का गढ़ माना जाता है। लेकिन यहां के बुनकरों की हालत बेहद दयनीय है। 21 करोड़ की लागत से हैंडलूम पार्क प्रस्तावित किया गया था। 32 एकड़ जमीन भी तय कर ली गई थी। लेकिन डीएमएफ की सूची से इसे बाहर कर दिया गया। इसके बनने से गरीब बुनकरों को एक छत के नीचे आवास के साथ हाइटेक प्रशिक्षण व कोसे से बनी साडिय़ां व अन्य समानों की उत्पादकता बढ़ती। देशभर में छुरी का नाम होता।

10 साल से पेयजल योजना पूरी नहीं
कटघोरा को जिला बनाने की मांग लंबे समय से की जाती रही है। लखन कहते हैं हमनें जिला बनाने की बात कभी नहीं की। जनता कह रही है जिला तो दूर की बात है यहां की हालत तो गांव से भी बद्तर है। 10 साल से पेयजल योजना पर काम चल रहा है। कब पूरा होगा ये तो माननीय भी नहीं बता पाते हैं।

चार साल में 9 बार कटघोरा के सीएमओ बदल गए। गौरव पथ स्वीकृत है, कब शुरू होगा इसकी कोई गारंटी नहीं है। कटघोरा नगर के बाहर जैसे ही निकलेंगे। दो दर्जन गांव के खेतों के लिए सिंचाई के लिए पानी की व्यवस्था ही नहीं है। 2014 से शुरू हुए इस प्रोजेक्ट से दो हजार हेक्टयेर खेतों में सिंचाई होनी है। लेकिन योजना पूरी होने की तिथि हर साल बढ़ रही है। पूरी कब होगी, अफसर नहीं बता पा रहे।

कागजों में विकास
बांकीमोंगरा के गजेंद्र राजपूत बताते हैं कि पेयजल की जो योजना पर काम हुआ। उससे किसी को लाभ नहीं मिला। कागजों में विकास किया जा रहा है। जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं की गई। मुश्ताक खान का कहना है कि बांकीमोंगरा से लेकर दीपका तक एक भी बड़ा स्वास्थ्य केन्द्र नहीं खुल सका। इलाज के लिए शहर जाने की मजबूरी पांच साल बाद भी खत्म नहीं हो सकी।

चुनाव से ठीक पहले सड़क का भूमिपूजन
चाकाबुड़ा से जवाली तक 14 किमी की सड़क एसईसीएल से 32 करोड़ का फंड मिलने के बाद डेढ़ साल तक शुरू नहीं की गई। अब ठीक चुनाव से एक माह पूर्व लखनलाल देवांगन ने इसका भूमिपूजन किया है। लेकिन अब तक काम शुरू नहीं हुआ है। सड़क की हालत ऐसी है इसे सड़क नहीं कहा जा सकता। बारिश में पोखरी और आम दिनों में बड़े-बड़े गड्ढे ही दिखाई देते हैं। यही हाल मुढ़ाली से कटसीरा मार्ग का है। इस क्षेत्र में भूविस्थापितों की समस्या एक बड़ा मुद्दा है।

इस बार प्रभावितों के दिल में दर्द ज्यादा है। भूविस्थापित कहते हैं जितने बार भी बैठक हुई, सिर्फ दिखावा रहा। हम जब विरोध करने सड़क पर उतरे तो हमारा नेता हमारे साथ नहीं था। हद तो तब हो गई जब डीएमएफ फंड के लिए बड़े हकदारों की याद चार साल बाद आ गई। अब लॉलीपॉप थमाने 13 गांव को मॉडल बनाने की घोषणा हुई है।

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Published on:
29 Oct 2018 07:01 pm
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