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Drug Smuggling Case: रायपुर में नशा तस्कर पर बड़ा प्रहार, SAFEMA के तहत 15 लाख की संपत्ति फ्रीज

SAFEMA Property Freeze: रायपुर पुलिस ने नशा तस्कर रूपिन्दर सिंह उर्फ पिन्दर उर्फ पाबलो की करीब 15 लाख रुपये की संपत्ति SAFEMA के तहत फ्रीज कर दी।

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Drug Smuggling Case

तस्कर की 15 लाख की चल संपत्ति सीज (photo source- Patrika)

Drug Smuggling: रायपुर पुलिस ने नशा तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए एक मादक पदार्थ तस्कर की करीब 15 लाख रुपये मूल्य की संपत्ति फ्रीज (सीज) कर दी है। यह कार्रवाई SAFEMA (Smugglers and Foreign Exchange Manipulators Forfeiture of Property Act) के तहत की गई है। पुलिस का दावा है कि आरोपी द्वारा अर्जित की गई यह संपत्ति नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार से कमाए गए धन से खरीदी गई थी।

कमिश्नरेट रायपुर पुलिस की इस कार्रवाई को नशा कारोबारियों के खिलाफ आर्थिक मोर्चे पर बड़ी सफलता माना जा रहा है। पुलिस का कहना है कि अब केवल तस्करों की गिरफ्तारी ही नहीं, बल्कि उनकी अवैध कमाई से अर्जित संपत्तियों पर भी कार्रवाई की जा रही है।

Rupinder Singh Pablo: पंजाब से रायपुर तक फैला था आरोपी का नेटवर्क

पुलिस के अनुसार आरोपी रूपिन्दर सिंह उर्फ पिन्दर उर्फ पाबलो मूल रूप से पंजाब के तरणतारण जिले का निवासी है। वह वर्तमान में रायपुर के हीरापुर क्षेत्र में रह रहा था और उसके खिलाफ मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े मामलों में कार्रवाई की जा चुकी है। रूपिन्दर सिंह के खिलाफ थाना कबीर नगर में अपराध क्रमांक 190/2025 दर्ज किया गया था। उस पर NDPS एक्ट की धारा 21(बी), 29, भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 111 तथा आर्म्स एक्ट की धारा 25 और 27 के तहत मामला कायम किया गया था।

कोर्ट ने सुनाई थी सजा

मामले की सुनवाई के बाद विशेष एनडीपीएस न्यायालय रायपुर ने आरोपी को दोषी करार दिया था। न्यायालय ने उसे एक वर्ष के सश्रम कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई थी। दोषसिद्धि के बाद रायपुर पुलिस ने आरोपी की आर्थिक गतिविधियों और उसकी संपत्तियों की गहन जांच शुरू की। इस दौरान उसकी आय, बैंकिंग लेन-देन, संपत्ति और अन्य वित्तीय दस्तावेजों का परीक्षण किया गया।

जांच में सामने आई करोड़ों नहीं, लेकिन संदिग्ध संपत्ति

वित्तीय जांच के दौरान पुलिस को आरोपी के नाम पर दो महंगी चारपहिया वाहन मिले। इनमें एक शेवरले क्रूज़ कार और एक महिंद्रा थार शामिल है। पुलिस के अनुसार, शेवरले क्रूज़ कार की अनुमानित कीमत लगभग 5 लाख रुपये और महिंद्रा थार की अनुमानित कीमत लगभग 10 लाख रुपये है। दोनों वाहनों का कुल मूल्य करीब 15 लाख रुपये आंका गया है। जांच में यह पाया गया कि आरोपी की घोषित आय और उसके पास मौजूद संपत्ति के बीच बड़ा अंतर है। इसी आधार पर पुलिस को संदेह हुआ कि ये वाहन नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री से अर्जित धन से खरीदे गए हैं।

Raipur Crime News: SAFEMA प्राधिकरण मुंबई को भेजा गया मामला

संदिग्ध वित्तीय लेन-देन और संपत्तियों के संबंध में पर्याप्त दस्तावेजी साक्ष्य जुटाने के बाद रायपुर पुलिस ने पूरा मामला भारत सरकार के वित्त मंत्रालय (राजस्व विभाग) के अधीन कार्यरत SAFEMA/NDPS Act के सक्षम प्राधिकारी एवं प्रशासक, मुंबई को भेजा। मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी और उसके परिजनों को यह अवसर दिया गया कि वे संपत्ति के वैध स्रोतों के संबंध में दस्तावेज और प्रमाण प्रस्तुत करें। हालांकि, सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष कोई संतोषजनक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका, जिसके बाद प्राधिकरण ने कार्रवाई को उचित माना।

5 जून को जारी हुआ संपत्ति फ्रीज करने का आदेश

विस्तृत जांच और सुनवाई के बाद 5 जून 2026 को सक्षम प्राधिकारी एवं प्रशासक, SAFEMA मुंबई ने आरोपी की संपत्तियों को फ्रीज करने के आदेश की पुष्टि कर दी। आदेश के अनुसार अब आरोपी के नाम दर्ज दोनों वाहनों को बिना सक्षम अनुमति के न तो बेचा जा सकेगा और न ही किसी अन्य व्यक्ति को हस्तांतरित किया जा सकेगा। इस आदेश के बाद दोनों वाहन कानूनी रूप से नियंत्रणाधीन संपत्ति की श्रेणी में आ गए हैं।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार यदि भविष्य में आरोपी इन संपत्तियों के वैध स्रोत को साबित करने में विफल रहता है तो आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत इन वाहनों को स्थायी रूप से जब्त किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में संपत्तियों को सरकार के पक्ष में समाहित करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।

NDPS Convict Property: नशा कारोबारियों को कड़ा संदेश

रायपुर पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई केवल एक आरोपी तक सीमित नहीं है, बल्कि नशा तस्करी के पूरे आर्थिक नेटवर्क को कमजोर करने की रणनीति का हिस्सा है। पुलिस आयुक्त डॉ. संजीव शुक्ला के मार्गदर्शन में कमिश्नरेट रायपुर द्वारा NDPS मामलों में बहुआयामी कार्रवाई की जा रही है। इसके तहत नशा तस्करों की गिरफ्तारी, वित्तीय जांच, अवैध संपत्तियों की पहचान, संपत्ति फ्रीज और जब्ती की कार्रवाई, PIT-NDPS के तहत निरोधात्मक कार्रवाई, तस्करी नेटवर्क की निगरानी और ध्वस्तीकरण जैसे कदम लगातार उठाए जा रहे हैं।

आर्थिक मोर्चे पर भी बढ़ा दबाव

विशेषज्ञों का मानना है कि नशा तस्करी के मामलों में केवल गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं होती। जब तक अपराध से अर्जित संपत्तियों और आर्थिक संसाधनों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक ऐसे नेटवर्क दोबारा खड़े हो जाते हैं। रायपुर पुलिस की यह कार्रवाई इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे न केवल आरोपी पर कानूनी दबाव बढ़ेगा, बल्कि अन्य नशा कारोबारियों को भी स्पष्ट संदेश जाएगा कि अवैध कमाई से अर्जित संपत्तियां भी अब कानून की जद में हैं।

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