दुर्ग शहर विधानसभा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मोतीलाल वोरा का गृहनगर होने के कारण हमेशा चर्चा में रहता है। वोराजी यहां से पांच बार विधायक रहे। ग्राउंड रिपोर्ट में जानिए दुर्ग का हाल।
रायपुर. छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में हर दिन बीतने के साथ चुनावी गर्मी बढती जा रही है। एक तरफ जहां संभावित उम्मीदवार अपना दिल थामे बैठे हैं वहीं आम नागरिकों को भी इंतजार है कि उनकी पसंदीदा पार्टी किन्हें टिकट देती है। पत्रिका के पुनीत कौशिक की ग्राउंड रिपोर्ट में जानिए दुर्ग का हाल।
दुर्ग शहर विधानसभा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मोतीलाल वोरा का गृहनगर होने के कारण हमेशा चर्चा में रहता है। वोराजी यहां से पांच बार विधायक रहे। अब उनके बेटे अरुण वोरा यहां के दूसरी बार विधायक है, पर वे लगातार तीन बार चुनाव भी हारे हैं। यहां से छह बार अरुण वोरा और भाजपा के हेमचंद यादव की टक्कर हुई है, यादव के निधन के बाद अब स्थिति बदल गई है। भाजपा में अरुण वोरा के मुकाबले प्रत्याशी खोजना एक बड़ी चुनौती है। इस विधानसभा के दो हिस्से हैं एक तरफ जगमगाता शहर है दूसरी तरफ वो इलाका है जो बुनियादी सुविधाओं के लिए भी तरस रहा है ।
हृदय स्थल से मन की बात...
यह इंदिरा मार्केट है, शहर का ह्दय स्थल। कुआं चौक के पास बैठे व्यापारियों के बीच चर्चा में संभावित भाजपा प्रत्याशी को लेकर कयास तो लगाया ही जा रहा है पार्किंग की समस्या पर भी चर्चा हो रही है। व्यवसायी जयकुमार पारख,दिलीप मारोटी,प्रेम अग्रवाल समेत अन्य कारोबारियों का कहना है कि पार्किंग और बेजा कब्जा इस शहर के लिए नासूर बन गया है। वे इसके लिए नेताओं को ही दोषी ठहराते हैं। उनका कहना है वोट की राजनीति के कारण ही शहर की सूरत बिगड़ी है। कब्जे के कारण 60 फीट और 80 फीट चौड़ी सड़कें पगडंडी जैसी हो गई है। पार्किंग न होने के कारण बाजार में कारोबार घटा है। ग्राहक भिलाई जाना पसंद करते हैं। इस बार जो इस समस्या को दूर करेगा उनको ही व्यापारियों का समर्थन मिलेगा।
आखिर क्या चाहते हैं युवा...
पुराना बस स्टैंड में होटल के सामने खड़े युवकों के बीच चुनावी चर्चा में बदलाव को लेकर रोचक बहस हो रही है। यहां पर खड़े विवेक मिश्रा, साकिर पवार, आलोक पांडेय, मोहम्मद सलीम, संजीव और पासी अली आपस में जो बात कर रहे हैं उसका सार यही है कि इस बार चुनाव रोचक होगा यहां से थोड़ी दूर तहसील चौक के पास ईश्वरसिंह राजपूत, दिनेश जैन व संजय उमरे समेत कुछ लोग हैं जिनका मानना है कि अलग राज्य बनने के बावजूद शहर को कुछ नहीं मिला। रायपुर और बिलासपुर को छोडि़ए राजनांदगांव से भी पिछड़ गया है दुर्ग। ईश्वर सिंह को आडिटोरियम चाहिए।
पटरीपार इलाके में समस्या अपार
यह सिकोला बस्ती है,शहर का पटरीपार का इलाका। पटरी उस पार के मुकबाले विकास में पिछड़ा हुआ है। यहां सिकोला बस्ती बाजार के चबूतरे पर बैठे बुधराम यादव, मुकेश साहू, गणेश ठाकुर समेत अन्य लोगों का कहना है कि पटरीपार की करीब 75 हजार की आबादी सड़क,नाली, पानी की समस्या से तो जूझ रही है। इस क्षेत्र मे न बैंक है न डाक घर। एक जगह मुश्किल से एटीएम है। शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधाएं भी नहीं है। न एक सरकारी हाईस्कूल स्कूल है न अस्पताल। इनकी पीड़ा यह है कि किसी नेता ने पटरी पार क्षेत्र के विकास पर ध्यान नहीं दिया। क्षेत्र में कई पिछड़ी बस्तियां हैं जहां सड़क नाली का अभाव है। वे कहते हैं इस बार जो वोट मांगने आएगा उनको पूछेंगे कि पटरी पार इलाके के लिए उनके पास क्या प्लान है। फिर सोचेंगे किसे वोट देना है।
ग्रामीण क्षेत्रों में हालात ज्यों के त्यों
यह पोटिया, बोरसी और उरला- बघेरा क्षेत्र है। शहर का बाहरी इलाका है। पहले ये गांव थे। करीब दर्जन भर गांव 15 साल पहले नगर निगम में शामिल होकर शहर के वार्ड बने। मीनाक्षी नगर बोरसी की किरण वर्मा, पोटिया की सुधा शर्मा और उरला के ज्ञानेश्वर लाल का कहना है कि ग्रामीण वार्डों का तो भगवान ही मालिक है। वे कहते हैं कि शहर में शामिल हुए 15 साल से अधिक हो गए पर कुछ नहीं बदला। शहरीपान की झलक तक नहीं है। आज भी लोग गांव की तरह समस्याओं से जूझते हुए जीवन बीता रहे हैं। हर साल गर्मी में पानी के लिए तरसना पड़ता है तो बारिश में घरों में बरसाती पानी के भरने की समस्या से। बुनियादी समस्याओं से लोग जूझ रहे हैं। उनका कहना है हर बार चुनाव में विकास की बात कर वोट मांगने वाले नेता कहां जाते हैं पता नही चलता। इस बार ऐसा नहीं चलेगा। हमें तो क्षेत्र का विकास चाहिए और जो विकास का काम कराएगा उसी को समर्थन मिलेगा।