रायपुर

CG Election 2018: चुनावों का समय नजदीक आते ही शुरू हुआ भीड़ जुटाने का धंधा

चुनावों का समय नजदीक आते ही भीड़ जुटाने का धंधा भी जोर पकड़ते आ रहा है। नेता अपने आकाओं को खुश करने के लिए किसी भी हद तक जाकर भीड़ जुटाने में जुट गए हैं।
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Oct 04, 2018
cg election 2018
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रायपुर. चुनावों का समय नजदीक आते ही भीड़ जुटाने का धंधा भी जोर पकड़ते आ रहा है। नेता अपने आकाओं को खुश करने के लिए किसी भी हद तक जाकर भीड़ जुटाने में जुट गए हैं। फिर चाहे भीड़ में जो चेहरे हैं, उनका राजनीति से लेना-देना हो या न हो। ऐसे ही नाराज हमारे मुखिया के एक कार्यक्रम में देखने को मिला।

यहां कायदे से भीड़ जुटाने के लिए युवाओं को लाना था, लेकिन आयोजक बेचारों को बड़े हॉल ने मार डाला। आनन-फानन में भीड़ की पिछले हिस्से में स्कूली बच्चों को बैठाया गया। यहां तक तो बात ठीक थी, कि बच्चे भी कल का भविष्य होते हैं, लेकिन हमारे मुखिया की बातें उनके सिर के ऊपर से गुजर रही थी। हद तो तब हो गई, जब दो स्कूली छात्राएं वहीं खर्राटे मारकर सोने लगी। इसे देखकर लगा कि ऐसे कार्यक्रमों से स्कूली बच्चों को दूर रखना चाहिए।

शब्द बदले, होने लगी तारीफ
नेताजी और मीठे बोल दोनों राजनीति की सफल गाड़ी के दो पहिए के समान है। इनके बिना नेतागिरी नहीं चल सकती, लेकिन राजनीति के अनुभव कड़वे और मीठे दोनों फल देती है। यही स्थिति राजधानी के एक कद्दावर नेता की दिखाई दे रही है। राजनीति का लंबा सफर तय करने वाले नेताजी चार साल तक लगातार उपेक्षा का दंश सहते रहे। कई बार उनकी पीड़ा सार्वजनिक भी होती दिखाई दी, लेकिन चुनाव आते-आते पार्टी और मुखिया के भी सुर बदल गए हैं।

सार्वजनिक मंचों पर नेताजी की तरीफों के पुल बांधे जा रहे हैं। यह बात बहुतों को पच नहीं रही है। इसे लेकर भी चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। अब राजनीति के जानकार इस बात का अंदेशा जता रहे हैं कि कहीं नेताजी को पूरी तरह निपटाने की तैयारी तो नहीं है। दरअसल, इस पार्टी में अक्सर ऐसा होता है कि तरीफ करने वाला निपट जाता है।

Updated on:
04 Oct 2018 08:17 pm
Published on:
04 Oct 2018 07:46 pm