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बागेश्वर बाबा पर भूपेश बघेल का तंज, बोले- पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम को कम कराकर दिखाएं तो मानेंगे

Bhupesh Baghel Statement: बिलासपुर दौरे के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री पर टिप्पणी की। उनके बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और सियासी बहस एक बार फिर शुरू हो गई है।
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रायपुर

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Shradha Jaiswal

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Updated: 27 May 2026, 4:50 PM IST

Dhirendra Krishna Shastri Controversy

Dhirendra Krishna Shastri Controversy(photo-patrika)

Dhirendra Krishna Shastri Controversy: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बिलासपुर दौरे के दौरान कथावाचक पंडित धीरेन्द्र कृष्णा शास्त्री पर टिप्पणी करते हुए राजनीतिक बयान दिया। विश्रामपुर में धरना-प्रदर्शन में शामिल होने के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कई मुद्दों पर अपनी राय रखी। इस दौरान उन्होंने प्रदेश और केंद्र की राजनीति से जुड़े विषयों पर भी अपने विचार साझा किए। बघेल के इन बयानों के बाद सियासी माहौल एक बार फिर गरमा गया है और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। उनके इस दौरे को लेकर विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना जताई जा रही है।

Dhirendra Krishna Shastri Controversy: “पर्ची देखकर समस्या बताने” पर कसा तंज

भूपेश बघेल ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर तंज कसते हुए कहा कि यदि वे लोगों की समस्याएं “पर्ची देखकर” बता सकते हैं, तो पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों को भी कम कराकर दिखाएं। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है और विभिन्न वर्गों में इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

कुछ लोग इसे राजनीतिक व्यंग्य और महंगाई पर कटाक्ष के रूप में देख रहे हैं, जबकि कुछ का मानना है कि ऐसे बयानों से अनावश्यक विवाद बढ़ता है। इस टिप्पणी ने एक बार फिर प्रदेश की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है और आने वाले दिनों में इस पर और प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।

राजनीतिक बहस तेज होने के संकेत

बघेल के इस बयान के बाद एक बार फिर धर्म और राजनीति को लेकर व्यापक बहस शुरू हो गई है। समर्थकों का कहना है कि यह केवल एक राजनीतिक व्यंग्य है, जिसे सरकार की नीतियों और बढ़ती महंगाई पर कटाक्ष के रूप में देखा जाना चाहिए। उनका तर्क है कि लोकतंत्र में इस तरह की टिप्पणी सामान्य राजनीतिक अभिव्यक्ति का हिस्सा होती है।

वहीं, विरोधियों का मानना है कि ऐसे बयानों से अनावश्यक विवाद खड़े होते हैं और सामाजिक सौहार्द पर असर पड़ सकता है। फिलहाल इस टिप्पणी ने प्रदेश की सियासत को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है और आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और तेज होने की संभावना है।