वायु प्रदूषण को रोकने के लिए फैक्ट्री में लगे इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रेसिपीटेटर (इएसपी) को बिजली बचाने के फेर में चालू नहीं रखा जाता है, इसका खामियाजा शहरवासियों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है
ढालसिंह पारधी@रायपुर . शहर की पॉश कालोनी दीनदयाल उपाध्याय नगर (डीडीनगर) का सेक्टर -2 स्थित मयूर विहार गार्डन। सुबह छह बजे का समय। पॉथ-वे पर कुछ लोग तेज चाल से चल रहे हैं तो कुछ महिलाएं बातें करती हुई चहलकदमी कर रही हैं। ओपन जिम में रखे उपकरणों में कुछ युवतियां व महिलाएं एक्सरसाइज में व्यस्त हैं।
इस बीच गार्डन में कुछ लोग योगा करने के बाद बात कर रहे थे। तभी हम उनके बीच पहुंचे और चुनाव को लेकर चर्चा की। सीएसइबी में कार्यरत एसपी सोनी ने बताया कि वार्ड में काम तो हुए है, लेकिन रात में छतों पर उद्योगों की धूल की परत और सडक़ पर आवारा मवेशियों ने बेड़ा गर्क कर रखा है।
दरअसल, वायु प्रदूषण को रोकने के लिए फैक्ट्री में लगे इलेक्ट्रोस्टैटिक प्रेसिपीटेटर (इएसपी) को बिजली बचाने के फेर में चालू नहीं रखा जाता है, इसका खामियाजा शहरवासियों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। जिम्मेदार भी इन पर कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। खुली नालियां और उसमें बजबजाती गंदगी किसी से छिपी नहीं है। इनकी जगह अंडरग्राउंड नालियां बनानी चाहिए और लोगों को भी सफाई को लेकर जागरूक होना चाहिए। इस बीच सेंचुरी कालोनी निवासी एसबी मोहता ने यातायात व्यवस्था और अतिक्रमण को बड़ी समस्या बताया।
उनका कहना है कि अतिक्रमण से सडक़ें पहले से ही संकरी है, इस पर भी वाहनों का कब्जा रहता है। घर से निकलो तो किस चौक-चौराहों पर जाम के झाम में फंस जाए, कह नहीं सकते। विजयलक्ष्मी का कहा था कि उनके इलाके में स्ट्रीट लाइट आए दिन बंद रहती है। इसके अलावा सडक़ व नालियों की सफाई नहीं होती। इस बीच पास ही में बैठे एक शख्स ने तपाक से कहा, मैं तो कहता हूं सडक़ पर धमाचौकड़ी करने वाले आवारा मवेशियों के मालिकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करना चाहिए। इनसे कई लोगों की जान जा चुकी हैं। इसके लिए प्रशासन को भी गंभीर होना चाहिए।
2013 की स्थिति
रायपुर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र
कुल वोट 20958
भाजपा 64611
कांग्रेस 58451
नोटा 2347
डीडीनगर की खासियत
यहां सरकारी आवासीय परिसर सहित बहुमंजिला इमारतों में अधिकतर नौकरीपेशा और पढ़ाई करने वाले लोग रहते हैं। क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय और विदेश व्यापार निदेशालय का क्षेत्रीय कार्यालय है।
व्यवस्थित कॉलोनी, चौड़ी सडक़ें व हरियाली से भरपूर वातावरण।
सडक़ पर निर्माण सामग्री से चलना दूभर
एनटीपीसी से सेवानिवृत्त और योग शिक्षक कमलेश कुमार शर्मा का कहना है कि हमारी इलाके के अलावा शहर में लोग सडक़ पर ही निर्माण सामग्री डाल देते हैं। आवाजाही करने वाले लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस बीच गार्डन का माली बिसेसर निर्मलकर तपाक से बोला, साहब! पहले 25 रुपए रोज कमाते थे, तब भी पांच रुपए बचा लेते थे। आज पांच सौ रुपए मिलता है, फिर भी 25 रुपए नहीं बचा पाते। आज हर चीज महंगी हो गई है।
डंगनिया बाजार: सडक़ पर दुकानें और पार्किंग
हम गोल चौक से संकरी गली से होते हुए डंगनिया बाजार पहुंचे। यहां बाजार का दिन होने से सडक़ पर वाहनों की पार्किंग और दुकानें लगने से पैदल चलना भी कठिन हो रहा था। इस बीच सब्जी खरीदने आई रामकली ने बताया कि मजबूरी में यहां से सब्जी खरीदनी पड़ती है। जगह छोटी है और दुकानें अधिक। बाजार के लिए शेड बन जाए तो निजात मिले।