रायपुर

CGMSC ने चार गुना दाम पर खरीदी वेसलीन पेट्रोलियम जेली, 1.5 करोड़ से ज्यादा की चपत

सीजीएमएससी का बड़ा गोलमाल सामने आया है।अफसरों ने बड़ी गडबड़ी करते हुए वेसलीन की चार गुना अधिक दाम में खरीदी की।
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Updated: 30 Mar 2018, 9:48 AM IST
Vaseline Petroleum Jelly

जितेन्द्र दहिया@रायपुर. छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन (सीजीएमएससी) का बड़ा गोलमाल सामने आया है। पत्रिका को मिले दस्तावेज बताते हैं कि संचालनालय स्वास्थ्य सेवा से 16 अक्टूबर 2017 में 1 लाख 32 हजार 13 बॉटल वेसलीन पेट्रालियम जेली (बैच नंबर सीएन 59 ) खरीदी के लिए मांग पत्र भेजा गया था। इसमें एक बॉटल का भार 500 ग्राम तय किया था। लेकिन सीजीएमएससी के अफसरों ने बड़ी गडबड़ी करते हुए वेसलीन की चार गुना अधिक दाम में खरीदी की। वेसलीन पेट्रोलियम जेली की खरीदी 2 करोड़ 53 लाख 45 हजार 280 रुपए में की गई है। जबकि, इसकी वास्तविक कीमत 66 लाख 83 हजार 898 रुपए है।

राष्ट्रीय दवा मूल्य प्राधिकरण के निर्धारित दर को नकारा

राष्ट्रीय दवा मूल्य प्राधिकरण ने पेट्रोलियम जेली का जो मूल्य निर्धारण किया है वह 1 ग्राम के लिए 0 .0843 रुपए है। इस प्रकार 500 ग्राम के एक बोतल की कीमत 42 रुपए 15 पैसा होना चाहिए था। लेकिन सीजीएमएससी ने मुम्बई की एसडी फाइन कैम लिमिटेड से 160 रुपए प्रति बॉटल की दर से खरीदी की। इस तरह से 118 .85 प्रति बॉटल और 1 करोड़ 83 लाख 68 हजार 382 रुपए 80 पैसे की चपत शासन को लगाई गई।

यह है घोटाले की हकीकत

कुल अधिक : 1 करोड़ 55 लाख 47 हजार 732. 05 रुपए की चपत

दो दिन में बचे 40 % माल की होगी सप्लाई

कंपनी ने पेट्रोलियम जेली की 60 फीसदी माल की सप्लाई कर दी है। अभी इस वित्तीय सत्र के महज दो दिन शेष हैं। इसमें 40 फीसदी की भी सप्लाई होने जा रही है। अभी सीजीएमएससी के पास पेट्रालियम जेली की 27 हजार 941 बॉटलें कॉर्पोरेशन के गोदाम में स्टॉक में पड़ी हुई है। कंपनी ने 30 मार्च 2017 को 79हजार 200 रुपए, 20 फरवरी 2017 को 60 हजार फिर 26 फरवरी 2018 को 19 हजार 208 बॉटलों की सप्लाई की।

यह खरीदी जब की गई, उस समय वीरेन्द्र जैन खरीदी का कार्यभार देख रहे थे। डीएचएस से मांग पत्र मिलने के बाद टेंडर जारी किया गया। 20 सितंबर 2016 को वेसलीन की सप्लाई के लिए दो कंपनियों ने अलग-अलग बिड भरी थी। जिसमें मुंबई की एसडी फाइन कैम लिमिटेड ने 163.20 की दर निविदा में डाली थी। 21 मार्च 2017 को कॉर्पोरेशन ने इसके लिए 160 रुपए तय करके कार्यादेश जारी कर दिया था।

सीजीएमएससी के प्रबंध संचालक वी. रामाराव ने बताया कि अधिक कीमत पर खरीदी हुई है, इसकी जानकारी नहीं है। यदि 60 प्रतिशत खरीदी हो चुकी है तो 40 प्रतिशत की खरीदी पर रोक लगाई जाएगी। यदि गड़बड़ी सामने आई तो संबंधित कंपनी पर भी कार्रवाई की जाएगी।

सीजीएमएससी के महाप्रबंधक वीरेन्द्र जैन को शासन ने रिश्वतखोरी के मामले में बर्खास्त कर दिया। स्वास्थ्य संचालक ने बर्खास्तगी के आदेश जारी कर दिए हैं। उन्हें एससीबी ने चार दिन पहले एक दवा सप्लायर से घूस लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा था। वीरेन्द्र जैन की नियुक्ति 2013 से उपप्रबंधक गुणवत्ता नियंत्रण के पद पर संविदा में की गई थी। रिश्वतखोरी का पर्दाफाश होने के बाद उनके द्वारा पद रहते हुए किए गए कारनामे उजागर हुए हैं। जैन पर घूस लेने के लिए दवा सप्लायरों का बिल रोकने का भी आरोप है।

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