रायपुर

छत्तीसगढ़ के 1051 सरकारी अस्पतालों में निजीकरण की तैयारी, रेडियोग्राफरों को ‘बाबू’ बनाने का आरोप, 12 जुलाई को होगा बड़ा फैसला

Chhattisgarh Government Hospitals: छत्तीसगढ़ के 1051 सरकारी अस्पतालों में जांच सेवाओं के निजीकरण की तैयारी का कर्मचारियों ने विरोध शुरू कर दिया है। रेडियोग्राफरों और लैब टेक्नीशियनों ने उन्हें 'बाबू' बनाने की तैयारी का आरोप लगाया है।
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Jul 06, 2026
Raipur News
सरकारी अस्पतालों में निजीकरण की तैयारी (फोटो सोर्स- AI)

रायपुर@पीलूराम साहू। Chhattisgarh News: प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में जांच व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपने की कवायद से स्वास्थ्य विभाग में बड़े विवाद की स्थिति बन गई है। जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में पैथोलॉजी (खून जांच) को ठेके पर देने के बाद अब सरकार रेडियोलॉजी (एक्स-रे, सीटी स्कैन) जांच को भी निजी कंपनी को सौंपने की तैयारी में है। इस फैसले से प्रदेशभर के रेडियोग्राफर और लैब टेक्नीशियन आक्रोशित हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि इस कदम से सरकारी अस्पतालों में नियमित और संविदा भर्तियां पूरी तरह बंद हो जाएंगी, जो बेरोजगार युवाओं के भविष्य पर बड़ा कुठाराघात है।

बिना टेंडर कंपनी को काम सौंपने पर उठे सवाल

स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश के 1051 सरकारी अस्पतालों में पैथोलॉजी जांच का जिम्मा केंद्रीय उपक्रम लाइफकेयर लिमिटेड (एसएलएल) को सौंप दिया है, जिसने जमीनी स्तर पर काम भी शुरू कर दिया है। विभाग का दावा है कि इस व्यवस्था से मरीजों की जांच रिपोर्ट सीधे उनके मोबाइल पर मिलेगी। इसके तहत जिला अस्पतालों में 134, सिविल अस्पतालों में 111, सीएचसी में 97 और पीएचसी में 64 प्रकार की जांचें मुफ्त की जाएंगी। हालांकि, 'पत्रिका' की पड़ताल में सामने आया है कि इस बड़े काम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कोई टेंडर ही जारी नहीं किया।

जानकारों के मुताबिक, किसी केंद्रीय उपक्रम को सीधे काम सौंपने से पहले भी पारदर्शी प्रतिस्पर्धा (ओपन टेंडर) जरूरी है। बिना टेंडर के काम सिर्फ कोविड जैसी आपातकालीन स्थिति या प्राकृतिक आपदा के समय ही दिया जा सकता है। वर्तमान में ऐसी कोई आपात स्थिति नहीं है, जिससे किसी विशेष कंपनी को फायदा पहुंचाने के आरोप लग रहे हैं। चर्चा यह भी है कि एचएलएल ने आगे किसी अन्य निजी एजेंसी को खून जांच का सब-कॉन्ट्रैक्ट दे दिया है। दावों के विपरीत, अस्पतालों में मरीजों को जांच रिपोर्ट देरी से मिल रही है, जिससे उनकी परेशानी बढ़ गई है।

कर्मचारियों को बाबू बनाने की तैयारी

स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने करीब 20 दिन पहले स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया से मुलाकात कर विरोध दर्ज कराया था। कर्मचारियों का दावा है कि मुलाकात के दौरान सचिव ने पैथोलॉजी के बाद एक्स-रे और सीटी स्कैन जैसी रेडियोलॉजी सेवाओं को भी ठेके पर देने की पुष्टि की है।

इस नई व्यवस्था के तहत अस्पतालों में तैनात नियमित लैब टेक्नीशियन और रेडियोग्राफरों को अन्य विभागों में प्रतिनियुक्ति पर भेजकर बाबू (क्लर्क) बनाने की तैयारी की जा रही है। इस निजीकरण के खिलाफ रणनीति बनाने के लिए 12 जुलाई को छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य कर्मचारी संघ की अहम बैठक बुलाई गई है, जिसमें प्रदेशव्यापी हड़ताल पर जाने का फैसला लिया जा सकता है।

सरकारी कोर्स और युवाओं के भविष्य पर संकट

कर्मचारियों का सवाल है कि यदि जिला अस्पतालों और सीएचसी के मुख्य विभागों को ठेके पर दे दिया जाएगा, तो क्या सरकारी सेटअप के टेक्नीशियन और रेडियोग्राफर निजी अस्पतालों में नौकरी करने को मजबूर होंगे? सरकार खुद जिला अस्पतालों में ये दोनों कोर्स संचालित करती है, जब सरकारी क्षेत्र में नियमित या संविदा भर्तियां ही बंद हो जाएंगी, तो इन कोर्स को चलाने का क्या औचित्य रह जाएगा राहत की बात सिर्फ इतनी है कि मेडिकल कॉलेजों से संबद्ध अस्पतालों में यह व्यवस्था लागू नहीं होगी, क्योंकि वहां ठेका पद्धति लागू करने से पीजी डॉक्टरों की पढ़ाई और प्रैक्टिकल प्रभावित हो सकते हैं।

पैथोलॉजी लैब को ठेके पर दे दिया गया है और अब रेडियोलॉजी विभाग को भी निजी हाथों में सौंपने की तैयारी है। लैब टेक्नीशियन और रेडियोग्राफरों को प्रतिनियुक्ति पर भेजना पूरी तरह गलत है। हमने स्वास्थ्य सचिव से मिलकर विरोध दर्ज कराया है। 12 जुलाई की बैठक में इस तानाशाही के खिलाफ आंदोलन और हड़ताल की ठोस रणनीति तय की जाएगी। -संतोष देवांगन, प्रांताध्यक्ष, छत्तीसगढ़ रेडियोग्राफर संघ

Updated on:
06 Jul 2026 10:39 am
Published on:
06 Jul 2026 10:39 am