रायपुर

प्रचार का आखिरी दिन, सिर्फ झूठे वादे और आरोप दिग्गजों ने नहीं उठाए छत्तीसगढ़ के मूल मुद्दे

इस चुनावी गहमा गहमी में सिंहासन के दावेदारों द्वारा तमाम वादे और दावे किए जा रहे हैं
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Nov 18, 2018
CGNews
प्रचार का आखिरी दिन, सिर्फ झूठे वादे और आरोप दिग्गजों ने नहीं उठाए छत्तीसगढ़ के मूल मुद्दे

आवेश तिवारी@रायपुर. मैं युवा छत्तीसगढ़ एक बार फिर से अपनी भूमि पर लोकतंत्र का हर पांच साल बाद आने वाला महापर्व मना रहा हूं। पहले दौर का मतदान ख़त्म हो चुका है। महज कुछ घंटों में दूसरे दौर के चुनाव प्रचार का शोर थम जाएगा। दो दिन बचे हैं, दूसरे चरण के मतदान में। जल्द ही एक नई सरकार मुझ पर राज करेगी। मेहमान मेरी जमीन पर फिर से आये हैं, उनकी बातों में जादू हैंं कहने का तरीका लाजवाब है और नाम बड़े हैं।

लेकिन वो अपनी ही कहते हैं हमारी नहीं सुनते। पहले भी कहां सुना जो अब सुनते? वो नीरव मोदी , मेहुल चौकसी, चिटफंड, रफाल, मंदिर-मस्जिद की बातें करते हैं। मगर हमारी जल, जंगल, जमीन से जुड़ी जरूरतों, बेरोजगारी, विस्थापन, किसानों की आत्महत्या, पलायन, लुप्त होती सांस्कृतिक विरासत पर बात नहीं करते। शायद उन्हें नहीं मालूम कि हम क्या चाहते हैं? हमारे प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी, अमित शाह और राहुल गांधी और भी न जाने कितने नाम आये और फिर आकर लौट चुके हैं। उनकी बातें अब भी मेरे कानों में गूंज रही हैं। उन बातों में मैं खुद को ढूंढता हूं, पर अफसोस मैं कहीं नजर नहीं आता।

अपनी उम्र का अ_ारहवां साल मैंने अभी-अभी देखा है। मेरा दायां हाथ लहुलुहान बस्तर है जिससे विगत तीन दशकों से रक्त रिस रहा है। मेरा बायां हाथ सरगुजा है, जहां के लोगों और जंगलों को कोयले की खदानें और बिजलीघरों की राख खा रही हैं। मेरी राजधानी देश की सर्वाधिक प्रदूषित राजधानियों में से एक है। हां मैं वो हूं जो एक बार फिर से अपनी धरती पर सत्ता का महासंग्राम देख रहा है।

इस चुनावी गहमा गहमी में सिंहासन के दावेदारों द्वारा तमाम वादे और दावे किए जा रहे हैं। मगर अफ़सोस, कहीं से कोई ऐसी आवाज नहीं आती जो आए और कहे कि सुनो छत्तीसगढ़ , हमें तुम्हारे दर्द का पता है। कोई नहीं कहता कि हम जानते हैं तुम्हारे जिस्म पर लगे घावों को। मुझे अफ़सोस है कि जिन लोगों ने मुझ पर शासन किया या फिर जो लोग मुझ पर शासन करना चाहते हैं उनमें से किसी के पास वो मुद्दे नहीं है जिनके बारे में मैं अक्सर सोचा करता हूं, जिनकी मुझे जरूरत है, जिनकी वजह से मैं बरसों से सो नहीं पाया हूं।

कुछ और लोग भी आए उन्होंने कहा कि मेरी धरती पर ही राम का ननिहाल है। लेकिन किसी ने नहीं कहा कि मैं राम के वंशज वन पुत्रों को उनकी जंगल जमीन का मालिकाना हक दिलवाउंगा। कोई तो कहता कि बस अब बहुत हुआ माओवाद को हम खत्म करेंगे। कोई तो बोल देता छत्तीसगढ़ में वनाधिकार कानून के पट्टे नहीं खारिज किए जाएंंगे। किसी ने नहीं कहा कि मैं वादा करता हूं कि मैं तुम्हारे बच्चों को कुपोषण से मुक्ति दिलाऊंगा। किसी ने नहीं कहा कि मेरा वादा है कि सुपाबेड़ा, गोहेकला ,कोना में अब कोई किडनी की बीमारी से नहीं मरेगा।

कोई सडक़ों की बात नहीं करता और न ही ये कहता है कि हम आपको साफ़ पीने का पानी देंगे। वो सडक़ देंगे जिससे आप आसानी से अपने गांव अपने कस्बे तक पहुंच जाएं। अधिकारी कहते हैं कि सडक़ बनाना संभव नहीं है माओवादी हैं। आप सरकार बनाने जा रहे हैं,आप तो वादा करते कि जैसे भी हो सडक़े बनेंगी। आप जानते हैं मैं वह छत्तीसगढ़ हूं, जहां लोग बीमारी से ज्यादा दुर्गमता की वजह से दम तोड़ देते हैं। मैं वही छत्तीसगढ़ हूं, जहां नसबंदी से दर्जनों माएं दम तोड़ देती हैं और देश भर की महिलाएं नसबंदी से डरने लगती हैं। वह छत्तीसगढ़ हूं, जहां चार कंधे और एक चारपाई एम्बुलेंस बन जाते हैं।

मगर आप खामोश हैं। इस साल भी सैकड़ों जवान लाल आतंक की भेंट चढ़ गए। आप लड़ते हैं, एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाते हैं। जुमले कसते हैं। एक दूसरे को चोर कहते हैं। भ्रष्टाचारी कहते हैं। बस हमारी नहीं सुनते। वो आते हैं तो कहते हैं कि किसानों के कर्ज माफ होंगे। धान का समर्थन मूल्य बढ़ाया जाएगा। कर्ज माफी तो ठीक है हमें इस बात का वादा कौन देगा कि किसानों की उपजाऊ जमीन की कीमत पर नए छत्तीसगढ़ की नींव नहीं रखी जाएगी ?

दूसरे आते हैं तो कहते हैं कि हमें मौका दीजिये हम आपको नया छत्तीसगढ़ बनाकर देंगे, तो फिर यह बताओ यह कौन सा छत्तीसगढ़ है जो 18 साल में तैयार हुआ है। कौन इस बात का वादा करेगा कि बस बहुत हुआ अब छत्तीसगढ़ का आदिवासी जम्मू-कश्मीर के ईट भ_ों पर मजदूरी नहीं करेगा। मुझे वादा चाहिए था कि छत्तीसगढ़ का आदिवासी मजदूर नहीं जाएगा उत्तर प्रदेश की डोलोमाइट खदानों में अकाल मौत का वरण करने के लिए। मेरा शिक्षक कक्षाओं में दिखेगा न कि अपनी मेहनत मजदूरी मांगने के लिए सडक़ों पर। मेरे युवाओं को रोजगार चाहिए, न कि आश्वासन। वो कहते थे कि जिन्दा कौमें पांच साल इन्तजार नहीं करती। मैं 18 सालों से सिर्फ और सिर्फ इन्तजार कर रहा हूं।

Updated on:
18 Nov 2018 08:33 am
Published on:
18 Nov 2018 08:33 am