पंजाब में जन्मे बलरामजी दास का ऐसा था जीवन, गए थे जेल, किसानों के लिए किया था ये काम
रायपुर. छत्तीसगढ़ के राज्यपाल बलरामजी दास टंडन का जन्म एक नवम्बर 1927 को अमृतसर (पंजाब) में हुआ था। उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय लाहौर से स्नातक उपाधि प्राप्त की थी। इसके बाद वह लगातार पंजाब में सामाजिक-सार्वजनिक गतिविधियों में सक्रिय रहे और वर्ष 1953 से 1997 के बीच छह अलग-अलग अवधि में पंजाब विधानसभा के सदस्य निर्वाचित हुए।
विधानसभा में रहे विपक्ष का नेता
टंडन वर्ष 1979 से 1980 तक पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता भी रहे। वर्ष 1991 में लोकसभा चुनाव के दौरान जब पंजाब में आतंकवाद अपनी चरम स्थिति में था, उन्होंने अमृतसर लोकसभा क्षेत्र से चुनाव में भाग लेने का बीड़ा उठाया, जिसे उस समय सर्वाधिक आतंकवाद प्रभावित क्षेत्र माना जाता था।
चुनाव अभियान के दौरान आतंकवादियों ने उन पर कई बार हमले किए गए, लेकिन सौभाग्य से टंडन सुरक्षित रहे। बलरामजी दास टंडन ने वर्ष 1947 में देश के विभाजन के समय पाकिस्तान से आने वाले लोगों के लिए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आतंकवाद का सामना करने के लिए पंजाब के जनसामान्य का मनोबल बढ़ाया
उन्होंने वर्ष 1965 में भारत-पाक युद्ध के दौरान अमृतसर जिले की सीमा पर जनसामान्य में आत्मबल बनाए रखने तथा उत्साह का संचार करने में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। वर्ष 1980 से 1995 के दौरान उन्होंने आतंकवाद का सामना करने तथा इससे लडऩे के लिए पंजाब के जनसामान्य का मनोबल बढ़ाया। उन्होंने आतंकवाद से प्रभावित परिवारों की मदद करने के उद्देश्य से एक कमेटी का गठन किया। श्री टण्डन स्वयं इस फोरम के चेयरमेन थे।
जरूरतमंदों की मदद करने में रहे आगे
बलराम दास टंडन जरूरतमंदों की सेवा करने के लिए हमेशा आगे रहते थे। उन्होंने 'कॉम्पिटेंट फाउंडेशन' के चेयरमेन के पद पर कार्य करते हुए उन्होंने रक्तदान शिविर, नि:शुल्क दवाई वितरण, नि:शुल्क ऑपरेशन जैसे जनहितकारी कार्यों के माध्यम से गरीबों एवं जरूरतमंदों की मदद की। उपमुख्यमंत्री के पद पर रहते हुए उन्होंने किसानों को मुफ्त में बिजली देने का एेलान किया था।
पुत्र संजय टंडन ने पिता के जीवन पर आधारित लिखी किताब
बलरामजी दास टंडन के पुत्र संजय टंडन ने उनके जीवन पर आधारित किताब 'एक प्रेरक चरित्र' लिखी, जिसका विमोचन वर्ष 2009 में तत्कालीन पूर्व उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी ने किया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री प्रकाश सिंह बादल ने की थी। सौम्य स्वभाव के टंडन जी की खेलों में गहरी रूचि है। वे कुश्ती, व्हालीबॉल, तैराकी एवं कबड्डी जैसे खेलों के सक्रिय खिलाड़ी भी रहे।
जेल भी गए थे स्वर्गीय बलरामजी दास टंडन
वर्ष 1975 से 1977 तक आपातकाल में उन्हें जेल में भी रहना पड़ा। वर्ष 1953 से 1967 तक वह अमृतसर नगर निगम के पार्षद रहे। उनकी लोकप्रियता का इससे बड़ा उदाहरण क्या हो सकता है कि वह छह बार पंजाब विधानसभा के सदस्य निर्वाचित हुए।