
Prepaid Smart Meter: छत्तीसगढ़ में सरकारी कार्यालयों में बिजली खपत और भुगतान व्यवस्था को लेकर बड़ी लापरवाही सामने आई है। केंद्र सरकार के निर्देश के बाद विकासखंड स्तर तक के सरकारी कार्यालयों में स्मार्ट मीटर को प्री-पेड व्यवस्था में बदला गया है, लेकिन कई विभाग अब भी बिजली बिल का अग्रिम भुगतान करने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। स्थिति यह है कि प्रदेश में करीब 85 प्रतिशत सरकारी विभागों में प्री-पेड स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, इसके बावजूद बिजली कंपनी को अपेक्षित प्री-पेमेंट नहीं मिल पा रहा है।
बिजली विभाग से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, सरकारी विभागों की इस उदासीनता का असर अब केंद्र से मिलने वाली राशि पर भी पड़ा है। केंद्र सरकार ने राज्य को मिलने वाले केंद्रीय अनुदान की एक-तिहाई राशि पर रोक लगा दी है। इसका प्रमुख कारण सरकारी कनेक्शनों में प्री-पेड व्यवस्था लागू होने के बावजूद भुगतान और पुराने बकाए का निपटारा नहीं होना बताया जा रहा है।
केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुसार एक अगस्त से विकासखंड स्तर तक के सभी सरकारी विभागों के स्मार्ट मीटरों में प्री-पेड सिस्टम लागू किया गया। इसके तहत प्रदेश में कुल 32,741 सरकारी बिजली कनेक्शन चिह्नित किए गए हैं। प्री-पेड व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि सरकारी कार्यालय बिजली की खपत के अनुसार पहले ही राशि जमा करें और उसी उपलब्ध बैलेंस के आधार पर बिजली का उपयोग करें। इससे बिजली कंपनी पर सरकारी विभागों के बढ़ते बकाए का दबाव कम करने और भुगतान व्यवस्था को व्यवस्थित करने की उम्मीद है।
व्यवस्था को लागू करने के लिए बिजली कंपनी प्रबंधन ने सरकारी कनेक्शनों का अलग-अलग ग्रुप तैयार किया है। प्रत्येक ग्रुप के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति भी की गई है, ताकि संबंधित विभागों से प्री-पेमेंट कराया जा सके और भुगतान प्रक्रिया की निगरानी की जा सके। हालांकि, अधिकारियों के अनुसार व्यवस्था लागू होने के बावजूद पूरे प्रदेश में अब तक प्री-पेमेंट के रूप में करीब डेढ़ से दो करोड़ रुपये ही बिजली कंपनी को प्राप्त हुए हैं। सरकारी कनेक्शनों की संख्या और बिजली खपत को देखते हुए यह राशि काफी कम बताई जा रही है।
बिजली कंपनी के अधिकारियों के मुताबिक, अभी तक केवल कुछ विभागों और जिलों से ही प्री-पेमेंट को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। इनमें आरटीओ, क्रेडा, बलौदाबाजार का पशु चिकित्सा विभाग, जिला पंचायत बलौदाबाजार, कबीरधाम, दुर्ग और मानव अधिकार आयोग के कार्यालय शामिल हैं। इसके विपरीत नगरीय प्रशासन और पंचायत जैसे बड़े विभागों में बिजली की खपत भी अधिक है और इनके सरकारी कनेक्शनों की संख्या भी काफी है। अधिकारियों के अनुसार इन विभागों की ओर से प्री-पेमेंट करने में लगातार देरी की जा रही है।
सरकारी विभागों पर सिर्फ नए प्री-पेड भुगतान का ही दबाव नहीं है, बल्कि पुराने बिजली बिल का बकाया भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। जानकारी के मुताबिक छत्तीसगढ़ के करीब 45 सरकारी विभागों पर लगभग 3,000 करोड़ रुपये का बिजली बिल बकाया है। प्री-पेड व्यवस्था लागू होने के बाद भी यदि पुराने बकाए का भुगतान नहीं होता है तो बिजली कंपनी की वित्तीय स्थिति पर इसका असर पड़ना स्वाभाविक है। इसी वजह से केंद्र की योजना के तहत बकाया राशि के निपटारे पर भी जोर दिया जा रहा है।
सरकारी बिजली कनेक्शनों में प्री-पेड व्यवस्था और बकाया भुगतान का मामला केंद्र सरकार की रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम यानी आरडीएसएस से भी जुड़ा हुआ है। यह योजना बिजली वितरण कंपनियों की परिचालन क्षमता और वित्तीय स्थिति में सुधार के उद्देश्य से लागू की गई है। योजना के तहत अगली किस्त का भुगतान सरकारी स्मार्ट मीटरों में प्री-पेड व्यवस्था के पूर्ण क्रियान्वयन और बकाया राशि के निपटारे जैसी शर्तों से जुड़ा है। ऐसे में सरकारी विभागों की ओर से भुगतान में देरी का सीधा असर राज्य को मिलने वाली केंद्रीय राशि पर पड़ रहा है।
सरकारी विभागों के पुराने बिजली बकाए के निपटारे के लिए चार किश्तों में भुगतान का प्रावधान किया गया था। इसके तहत जुलाई-सितंबर, अक्टूबर-दिसंबर, जनवरी-मार्च 2027 और अप्रैल-जून 2027 की अवधि तय की गई थी। इस व्यवस्था का उद्देश्य सरकारी विभागों पर एक साथ बड़ी राशि के भुगतान का दबाव डालने के बजाय चरणबद्ध तरीके से बकाया खत्म करना था। लेकिन अधिकारियों के अनुसार कई विभागों की ओर से न तो पुराने बकाए के भुगतान को लेकर अपेक्षित रुचि दिखाई जा रही है और न ही प्री-पेड सिस्टम में पर्याप्त राशि जमा की जा रही है।
प्रदेश में 32,741 सरकारी कनेक्शनों को प्री-पेड व्यवस्था के लिए चिह्नित किया गया है और करीब 85 प्रतिशत सरकारी कार्यालयों में स्मार्ट मीटर भी लगाए जा चुके हैं। इसके बावजूद अब तक प्री-पेमेंट के रूप में केवल डेढ़ से दो करोड़ रुपये मिलना व्यवस्था की धीमी रफ्तार को दिखाता है। अब चुनौती यह है कि सरकारी विभाग पुराने बकाए का भुगतान कितनी तेजी से करते हैं और प्री-पेड मीटर में नियमित रूप से अग्रिम राशि जमा करते हैं। क्योंकि जब तक सरकारी कनेक्शनों का बकाया कम नहीं होता और प्री-पेड व्यवस्था प्रभावी तरीके से लागू नहीं होती, तब तक आरडीएसएस से जुड़ी केंद्रीय राशि पर असर बना रहने की आशंका है।