
बंगाली भाषी 23 लोगों की हिरासत के बाद 19 रिहा (https://x.com/SamirulAITC/status/2100861581236306197)
Chhattisgarh Custody Case: छत्तीसगढ़ में बांग्लादेशी नागरिक होने के संदेह में हिरासत में लिए गए पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के 23 प्रवासी कामगारों में से 19 लोगों को रिहा किए जाने की बात सामने आई है। ये लोग मुर्शिदाबाद के सुती, रघुनाथगंज और समसेरगंज इलाके से बताए जा रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्हें 4 सितंबर को बिलासपुर क्षेत्र में हिरासत में लिया गया था और बाद में रायपुर स्थित होल्डिंग सेंटर भेजे जाने की बात सामने आई थी।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, हिरासत में लिए गए 23 लोगों में से 19 को अब रिहा कर दिया गया है। बाकी चार लोगों की स्थिति को लेकर अभी उनके दस्तावेजों और SIR से जुड़े मामलों की प्रक्रिया का उल्लेख किया जा रहा है। इस मामले में उनके परिवारों की ओर से भी जल्द रिहाई की मांग की गई है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, ये प्रवासी कामगार करीब दो महीने पहले काम के सिलसिले में छत्तीसगढ़ पहुंचे थे। इनमें कुछ लोग घर-घर जाकर घरेलू सामान बेचने का काम करते थे। 4 सितंबर को बिलासपुर के सिरगिट्टी थाना क्षेत्र में पुलिस ने इन्हें बांग्लादेशी नागरिक होने के संदेह में हिरासत में लिया था। इसके बाद उन्हें रायपुर के होल्डिंग सेंटर भेजे जाने की जानकारी सामने आई।
हिरासत की खबर सामने आने के बाद पश्चिम बंगाल में इन लोगों के परिवारों की चिंता बढ़ गई थी। रिपोर्टों के अनुसार, परिजनों ने संबंधित लोगों के आधार कार्ड और दूसरे दस्तावेजों का हवाला देते हुए उनकी नागरिकता की जांच कर उन्हें वापस भेजने की मांग की थी।
इस मामले के बाद दूसरे राज्यों में काम करने वाले बंगाली भाषी प्रवासी मजदूरों की पहचान और दस्तावेजों की जांच को लेकर भी सवाल उठे हैं। तृणमूल कांग्रेस से जुड़े नेता समीरुल इस्लाम ने सोशल मीडिया पोस्ट में आरोप लगाया कि बंगाली बोलने वाले लोगों को बांग्लादेशी नागरिक होने के संदेह में परेशान किया जा रहा है। उन्होंने सभी 23 लोगों को भारतीय नागरिक और मुर्शिदाबाद निवासी बताया था। यह उनका राजनीतिक दावा है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि सभी मामलों में उपलब्ध स्रोतों से नहीं होती।
मामले में मूल सवाल दस्तावेजों के सत्यापन और संबंधित लोगों की नागरिकता की कानूनी पुष्टि से जुड़ा है। ऐसे मामलों में पहचान और नागरिकता की जांच निर्धारित प्रक्रिया के तहत होना जरूरी है। उपलब्ध रिपोर्टों में 19 लोगों की रिहाई की जानकारी सामने आई है, जबकि बाकी चार लोगों के मामले में प्रक्रिया पूरी होने की प्रतीक्षा बताई जा रही है।
इस घटनाक्रम के बाद बंगाली भाषा और प्रवासी मजदूरों की पहचान को लेकर राजनीतिक बहस तेज हुई है। समर्थकों का कहना है कि केवल भाषा या क्षेत्रीय पहचान के आधार पर किसी व्यक्ति की नागरिकता तय नहीं की जा सकती। वहीं, प्रशासन की ओर से किसी व्यक्ति की नागरिकता को लेकर संदेह होने पर दस्तावेजों के आधार पर सत्यापन की प्रक्रिया अपनाई जाती है। ऐसे में इस मामले में अंतिम स्थिति संबंधित प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
Updated on:
18 Sept 2026 03:26 pm
Published on:
18 Sept 2026 02:47 pm
