
सरकारी दफ्तरों में छाएगा अंधेरा (फोटो सोर्स- पत्रिका)
Government Electricity Bill Dues: बिजली विभाग की नजर अब तक आम उपभोक्ताओं और व्यावसायिक कनेक्शन तक सीमित रहती थी। सरकारी दफ्तरों की ओर ध्यान नहीं रहता था। इस कारण जिले में 1142 सरकारी दफ्तरों के बिजली बिल का बकाया 100 करोड़ रुपए के पार पहुंच गया है। वहीं अब बिजली बिल का भुगतान नहीं करने वाले सरकारी विभागों पर भी शिकंजा कसने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसी सप्ताह कनेक्शन काटने की तैयारी चल रही है। बिजली विभाग की सख्ती से सरकारी विभागों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। बिजली कंपनी के निर्देश पर विभाग बकाया वसूली अभियान चलाएगा।
कोरबा जिले में विद्युत वितरण विभाग के अनुसार 52 शासकीय विभागों के अंतर्गत आने वाले अलग-अलग दफ्तरों का बकाया अगस्त माह तक 100 करोड़ रुपए के पार पहुंच गया है। इस बीच स्मार्ट मीटर लगाने की भी तैयारी चल रही है। लेकिन विभागीय अफसर पुराने बिजली बिल के बकाया भुगतान को लेकर रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इसे लेकर विद्युत विभाग के अफसरों ने सख्ती बरतने की तैयारी शुरू कर दी है।
सोमवार से बड़े बिजली बिल बकायादारों के बिजली कनेक्शन काटने की तैयारी कर ली गई है। इससे अफसर और कर्मचारियों को अंधेरे में ही काम करना पड़ सकता है। बताया जा रहा है कि सबसे बड़े बकायादारों की सूची में जिला शिक्षा विभाग कोरबा टॉप पर है। इसके बाद नगर निगम कोरबा, स्वास्थ्य विभाग सहित अन्य दफ्तर शामिल हैं। विभागीय अफसरों ने बताया कि बकाया बिजली बिल की राशि चुकता करने के लिए संबंधित अफसरों को कई बार अवगत कराया गया है, लेकिन इसे लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। विद्युत वितरण विभाग ने इस संबंध में जिला प्रशासन को भी अवगत कराने की जानकारी दी है।
दरअसल, सरकारी दफ्तरों में बिजली बिल भुगतान करने में आम उपभोक्ता ही नहीं, बल्कि शासकीय विभाग भी कोताही बरत रहे हैं। जिले के अलग-अलग शासकीय दफ्तरों और कार्यालयों में आमजन छोटी-बड़ी समस्याओं को लेकर पहुंचते हैं। इन दफ्तरों में लाइट, पंखे, कूलर, वातानुकूलित मशीन (एसी), कंप्यूटर के साथ ही कई तरह के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और मशीनें चलाई जाती हैं। इस कारण इन विभागों में बिजली की खपत भी अधिक होती है। शासकीय दफ्तर होने की वजह से कई अफसर बिजली बिल भुगतान को लेकर ज्यादा रुचि नहीं दिखाते हैं। वहीं शासकीय दफ्तर होने के कारण विद्युत विभाग के अफसर भी अब तक बकाया बिजली बिल की वसूली को लेकर कम ध्यान देते थे। इससे बकाया बढ़ता गया।
वर्तमान में कोरबा जिले में ही शासकीय दफ्तरों का बिजली बिल बकाया अगस्त 2026 तक की स्थिति में लगभग 100 करोड़ रुपए पहुंच गया है। अब इन दफ्तरों में शासन की योजना के अंतर्गत स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य जारी है। इसके अलावा बकायादार विभागों के कनेक्शन भी काटने की योजना बनाई गई है।
जिले में जहां शासकीय विभागों का बिजली बिल बकाया 100 करोड़ रुपए है, वहीं घरेलू और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का बिजली बिल बकाया भी कम नहीं हो रहा है। घरेलू और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का बकाया 300 करोड़ रुपए से अधिक पहुंच गया है। यह विभाग के लिए चुनौती बनी हुई है। इस कारण अब कनेक्शन काटने की तैयारी शुरू की जा रही है।
प्रदेश सरकार ने बकाया बिजली बिल के लिए समाधान योजना शुरू की है। इसके तहत सरचार्ज (अतिरिक्त शुल्क) में विशेष छूट दी जा रही है। इसे लेकर बकायादार उपभोक्ताओं में रुचि काफी कम है। ऑनलाइन पंजीयन के लिए उपभोक्ता सामने नहीं आ रहे हैं और बकाया वसूली नहीं हो पा रही है।
जिले में सबसे अधिक बिजली बिल का बकाया जिला शिक्षा विभाग का है। विभाग पर 12 करोड़ 63 लाख रुपए बकाया है, जो सबसे अधिक है। इसके बाद नगर निगम कोरबा का 6 करोड़ 84 लाख रुपए, नगर पालिका का 6 करोड़ 80 लाख रुपए, स्वास्थ्य विभाग का 2 करोड़ 60 लाख रुपए, महिला एवं बाल विकास विभाग का 2 करोड़ 90 लाख रुपए और नगर पंचायतों का बिजली बिल बकाया 4.76 करोड़ रुपए है।
वहीं जिले की 417 ग्राम पंचायतों में से अधिकांश पंचायतों का बिजली बिल बकाया है। इसकी राशि लगभग 54.45 करोड़ रुपए है। इसी तरह कई अन्य सरकारी दफ्तर भी बकायादारों की सूची में शामिल हैं। ये सभी आंकड़े विद्युत विभाग की ओर से उपलब्ध कराए गए हैं।
राजकुमार सोनकर, अधीक्षण अभियंता के मुताबिक, शासकीय दफ्तरों का बकाया बिजली बिल 100 करोड़ रुपए के पार चला गया है। इसी सप्ताह बकायादार दफ्तरों के बिजली कनेक्शन काटने की तैयारी चल रही है, ताकि बकाया राशि वसूल की जा सके।
Updated on:
12 Sept 2026 04:06 pm
Published on:
12 Sept 2026 04:06 pm
