
Top Tourist Destination: छत्तीसगढ़ आने वाले दिनों में देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में अपनी जगह बना सकता है। प्राकृतिक खूबसूरती, ऊंचे जलप्रपात, घने जंगल, वन्यजीव और समृद्ध जनजातीय संस्कृति प्रदेश को पर्यटन के क्षेत्र में खास पहचान दिला सकते हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 के समापन समारोह में प्रदेश के पर्यटन को लेकर बड़ी उम्मीद जताई। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के अवरोध दूर होने के बाद अब छत्तीसगढ़ में पर्यटन विकास की नई संभावनाएं खुल रही हैं। आने वाले समय में प्रदेश देश के टॉप टूरिस्ट डेस्टिनेशन में शामिल होगा।
अमित शाह ने खास तौर पर बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चित्रकोट जलप्रपात, तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, मां दंतेश्वरी मंदिर और विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा जैसे स्थलों में देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करने की अपार क्षमता है। पर्यटन के विस्तार से न केवल छत्तीसगढ़ को नई पहचान मिलेगी, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि लंबे समय तक नक्सलवाद के कारण बस्तर सहित छत्तीसगढ़ के कई क्षेत्रों की पर्यटन संभावनाओं का अपेक्षित विकास नहीं हो पाया। प्राकृतिक संसाधनों और खूबसूरत पर्यटन स्थलों से भरपूर होने के बावजूद सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के कारण इन इलाकों तक पर्यटकों की पहुंच सीमित रही। अब प्रदेश में शांति और सुरक्षा का वातावरण मजबूत होने से पर्यटन, उद्योग और व्यापार के नए अवसर तैयार हो रहे हैं। इससे छत्तीसगढ़ के उन इलाकों को भी नई पहचान मिल सकती है, जो अब तक देश के प्रमुख पर्यटन नक्शे पर अपेक्षित जगह नहीं बना पाए थे। अमित शाह के अनुसार, बस्तर की प्राकृतिक संपदा और सांस्कृतिक विरासत को पर्यटन के माध्यम से देश-दुनिया तक पहुंचाया जा सकता है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
छत्तीसगढ़ में पर्यटन की बात हो और बस्तर के जलप्रपातों तथा जंगलों का जिक्र न हो, ऐसा संभव नहीं है। चित्रकोट जलप्रपात को प्रदेश की सबसे खास प्राकृतिक पहचान में गिना जाता है। वहीं तीरथगढ़ जलप्रपात और कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान भी पर्यटकों के लिए आकर्षण का बड़ा केंद्र हैं। अमित शाह ने इन पर्यटन स्थलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनमें देश और विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करने की काफी क्षमता है। इसके अलावा मां दंतेश्वरी मंदिर, मां बम्लेश्वरी मंदिर और बस्तर दशहरा जैसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन भी प्रदेश के पर्यटन को नई ऊंचाई दे सकते हैं। यदि इन स्थलों को बेहतर पर्यटन सुविधाओं, प्रचार-प्रसार और स्थानीय स्तर पर जरूरी व्यवस्थाओं से जोड़ा जाता है, तो छत्तीसगढ़ पर्यटन के क्षेत्र में एक अलग पहचान बना सकता है।
अमित शाह ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान केवल यहां के जंगलों और जलप्रपातों तक सीमित नहीं है। प्रदेश की लोकसंस्कृति, जनजातीय परंपराएं, पारंपरिक खानपान, वेशभूषा, लोकनृत्य और हस्तशिल्प भी इसकी बड़ी विशेषता हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर की पारंपरिक जीवनशैली और जनजातीय संस्कृति में वैश्विक पहचान हासिल करने की क्षमता है। बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजनों के माध्यम से जनजातीय समाज की संस्कृति, खेल प्रतिभाओं और परंपराओं को नई पहचान मिल रही है। इसके साथ ही पंथी, पंडवानी, राउत नाचा, करमा और सैला जैसे लोकनृत्य एवं लोककलाएं भी छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध बनाते हैं। इन परंपराओं को पर्यटन से जोड़कर प्रदेश की पहचान देश-दुनिया तक पहुंचाई जा सकती है।
पर्यटन का विस्तार केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे स्थानीय लोगों की आमदनी और रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं। अमित शाह ने कहा कि पर्यटन के विकास से स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा। इसके साथ ही हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों को नए बाजार मिलेंगे। ग्रामीण और जनजातीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। पर्यटन बढ़ने से होटल, होमस्टे, परिवहन, गाइड, स्थानीय खानपान और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में रोजगार की संभावनाएं तैयार हो सकती हैं। इससे बस्तर के युवाओं को अपने ही क्षेत्र में काम और व्यवसाय के नए अवसर मिल सकते हैं।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह नवा रायपुर में आयोजित छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 के समापन एवं राज्य अलंकरण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने की। इस अवसर पर अमित शाह ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली विभूतियों और संस्थाओं को राज्य अलंकरण सम्मान प्रदान किए। साथ ही उन्होंने महतारी वंदन योजना की 33वीं किस्त भी जारी की। समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ के विकास, नक्सलवाद से मुक्ति और प्रदेश के भविष्य की संभावनाओं पर भी बात रखी।
अमित शाह ने पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए कहा कि वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण उनकी दूरदर्शिता का परिणाम था। उन्होंने कहा कि अटल जी ने छत्तीसगढ़ राज्य बनाया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे संवारने का काम किया है। अमित शाह ने कहा कि एक समय छत्तीसगढ़ के बारे में कहा जाता था कि यहां की धरती अमीर है, लेकिन लोग गरीब हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले 10 वर्षों में छत्तीसगढ़ की धरती के साथ यहां के लोग भी समृद्ध और खुशहाल होंगे। यही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संकल्प है।
अमित शाह के बयान से साफ है कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के विकास में पर्यटन को महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में देखा जा रहा है। खासकर बस्तर के प्राकृतिक और सांस्कृतिक स्थलों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की संभावनाएं हैं। चित्रकोट और तीरथगढ़ के जलप्रपात, कांगेर घाटी के जंगल, जनजातीय संस्कृति और बस्तर दशहरा जैसे आयोजन प्रदेश को पर्यटन के क्षेत्र में अलग पहचान दिला सकते हैं। अब देखना होगा कि इन संभावनाओं को बेहतर सुविधाओं, पर्यटन योजनाओं और स्थानीय लोगों की भागीदारी के जरिए किस तरह जमीन पर उतारा जाता है।