
महादेव ऐप पर शिकंजे के बाद भी जारी सट्टेबाजी (Photo Source- Patrika Create)
Mahadev Betting Scam: महादेव ऑनलाइन सट्टा मामले में बड़ी कार्रवाई के बावजूद इस अवैध कारोबार पर पूरी तरह लगाम लगती नजर नहीं आ रही है। महादेव ऐप के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को ओमान से प्रत्यर्पण कर भारत लाए जाने के बाद भी इंटरनेट पर इससे जुड़े सट्टेबाजी नेटवर्क के सक्रिय होने की जानकारी सामने आई है। इंटरनेट पर महादेव ऑनलाइन डॉट कॉम और महादेवबुक्ज डॉट कॉम नाम से दो वेबसाइट मिली हैं, जिनके जरिए यूजर्स को सट्टेबाजी नेटवर्क से जोड़ने का काम किया जा रहा है।
इन वेबसाइटों की कार्यप्रणाली में भी बदलाव देखने को मिला है। अब सीधे वेबसाइट पर यूजर रजिस्ट्रेशन और अकाउंट बनाने की सुविधा देने के बजाय WhatsApp सपोर्ट और पैनल एजेंटों के जरिए लोगों को जोड़ा जा रहा है। वेबसाइट पर दिए गए लिंक पर क्लिक करते ही यूजर WhatsApp चैट तक पहुंच जाता है। इसके बाद एजेंट यूजर आईडी, पासवर्ड और सट्टेबाजी के लिए क्रेडिट उपलब्ध कराते हैं। इससे सवाल उठ रहा है कि कार्रवाई के बावजूद महादेव सट्टा नेटवर्क किस तरह अपना संचालन जारी रखे हुए है।
इंटरनेट पर जांच के दौरान महादेव ऑनलाइन डॉट कॉम और महादेवबुक्ज डॉट कॉम नाम से दो डोमेन सामने आए हैं। इनमें से महादेव ऑनलाइन डॉट कॉम वेबसाइट भारत में सामान्य इंटरनेट कनेक्शन से नहीं खुल रही है। हालांकि, वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क यानी VPN के माध्यम से इसे एक्सेस किया जा सकता है। इस डोमेन का रजिस्ट्रेशन 3 अप्रैल 2021 को हुआ था और इसकी वैधता वर्ष 2027 तक दर्ज है। वेबसाइट से जुड़ी तकनीकी जानकारी में इसका सर्वर लोकेशन मुंबई, महाराष्ट्र दिखाई दे रहा है।
वहीं दूसरी वेबसाइट महादेवबुक्ज डॉट कॉम भारत में सामान्य इंटरनेट कनेक्शन से खुल रही है। यह डोमेन 5 अक्टूबर 2025 से सक्रिय बताया गया है और इसका रजिस्ट्रेशन 5 अक्टूबर 2027 तक के लिए है। इंटरनेट पर उपलब्ध सर्वर संबंधी जानकारी में इसका लोकेशन कैलिफोर्निया के सैन होजे में दिखाई देता है।
इन वेबसाइटों की सबसे खास बात इनके संचालन का तरीका है। सामान्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की तरह यहां यूजर को अपना अकाउंट बनाने, लॉगिन करने या सीधे रजिस्ट्रेशन करने की सुविधा नहीं मिलती। इसके बजाय वेबसाइट पर WhatsApp सपोर्ट के लिंक दिए गए हैं। जब कोई व्यक्ति इन लिंक पर क्लिक करता है तो वह सीधे WhatsApp चैट से जुड़ जाता है।
इसके बाद नेटवर्क से जुड़े ऑपरेटर या पैनल एजेंट उससे संपर्क करते हैं। यही एजेंट यूजर को आईडी और पासवर्ड उपलब्ध कराते हैं। साथ ही सट्टेबाजी या ऑनलाइन गेमिंग के लिए क्रेडिट देने का काम भी इन्हीं के माध्यम से किया जाता है। इस तरह वेबसाइट मुख्य रूप से लोगों को आकर्षित करने और उन्हें एजेंटों तक पहुंचाने के माध्यम के रूप में इस्तेमाल होती दिखाई देती है।
इस नेटवर्क में केवल यूजर आईडी और पासवर्ड उपलब्ध कराना ही शामिल नहीं है, बल्कि पैसों के लेन-देन की व्यवस्था भी एजेंटों के माध्यम से संचालित होती है। जानकारी के अनुसार, यूजर को पैसे जमा कराने यानी डिपॉजिट और जीत की रकम निकालने यानी विड्रॉल के लिए संबंधित ऑपरेटर से संपर्क करना पड़ता है। इसके लिए यूपीआई और बैंक खातों का इस्तेमाल किया जाता है। इस व्यवस्था में वेबसाइट पर सीधे भुगतान करने के बजाय एजेंटों के जरिए लेन-देन कराया जाता है। इससे पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली सामान्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से अलग दिखाई देती है।
ऑनलाइन सट्टेबाजी से जुड़े ऐसे नेटवर्क के सामने सबसे बड़ी चुनौती वेबसाइट और डोमेन पर होने वाली कार्रवाई होती है। जब किसी वेबसाइट को ब्लॉक किया जाता है तो उससे जुड़े ऑपरेटर दूसरे डोमेन या वैकल्पिक संपर्क माध्यमों का इस्तेमाल कर सकते हैं। महादेव नेटवर्क से जुड़ी वेबसाइटों में भी WhatsApp आधारित संपर्क व्यवस्था सामने आई है। इसके जरिए यूजर और एजेंटों के बीच सीधा संपर्क बना रहता है।
वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन सिस्टम नहीं होने के कारण पूरा संचालन बाहरी संपर्क माध्यमों पर निर्भर दिखाई देता है। इस तरह डोमेन और संपर्क माध्यम बदलने से नेटवर्क को दोबारा सक्रिय करने की कोशिश की जा सकती है। हालांकि, किसी वेबसाइट का डोमेन, सर्वर लोकेशन या तकनीकी जानकारी अपने आप में उसके वास्तविक संचालक की पहचान का प्रमाण नहीं है। इसकी पुष्टि जांच एजेंसियों की जांच से ही हो सकती है।
VPN यानी वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क एक ऐसी तकनीक है, जो इंटरनेट इस्तेमाल करते समय यूजर के डिवाइस और VPN सर्वर के बीच एन्क्रिप्टेड कनेक्शन बनाती है। इसके जरिए इंटरनेट पर यूजर की वास्तविक IP लोकेशन छिप सकती है और ऑनलाइन गतिविधियों की गोपनीयता बनाए रखने में मदद मिलती है। कई बार VPN के जरिए ऐसे इंटरनेट कंटेंट तक भी पहुंच बनाई जा सकती है, जो किसी विशेष क्षेत्र में सामान्य इंटरनेट कनेक्शन से उपलब्ध नहीं होता।
यही वजह है कि कुछ प्रतिबंधित या ब्लॉक वेबसाइटों को खोलने के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जाता है।
हालांकि, VPN का इस्तेमाल अपने आप में गैरकानूनी नहीं है। इसका उपयोग निजी जानकारी की सुरक्षा, सार्वजनिक वाई-फाई पर सुरक्षित इंटरनेट इस्तेमाल और अन्य वैध कार्यों के लिए भी किया जाता है।
महादेव ऑनलाइन सट्टा मामले में सौरभ चंद्राकर का नाम प्रमुखता से सामने आया था। अब उन्हें ओमान से प्रत्यर्पण के बाद भारत लाया गया है। इसके बावजूद इंटरनेट पर महादेव नाम से संचालित वेबसाइटों और WhatsApp आधारित संपर्क व्यवस्था की मौजूदगी ने इस नेटवर्क की सक्रियता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब प्रमुख प्रमोटर के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है, तब भी इस नाम से जुड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और एजेंट आधारित नेटवर्क कैसे काम कर रहे हैं।
फिलहाल सामने आई वेबसाइटों और उनकी कार्यप्रणाली से संकेत मिलता है कि ऑनलाइन सट्टेबाजी से जुड़े नेटवर्क केवल एक वेबसाइट या एक प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं रहते। ऐसे मामलों में डोमेन, संपर्क माध्यम और भुगतान की व्यवस्था की जांच करना भी जरूरी है। अब देखना होगा कि जांच एजेंसियां इन वेबसाइटों, उनके संचालकों, एजेंटों और वित्तीय लेन-देन की कड़ियों की पड़ताल कर इस नेटवर्क पर कितनी प्रभावी कार्रवाई करती हैं।
Updated on:
4 Nov 2026, 11:10 AM IST
Published on:
4 Nov 2026, 11:09 AM IST
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