
Today World Spine Day: @पीलूराम साहू। प्रदेश में रीढ़ की हड्डी (स्पाइन) की बीमारी जो एक दशक पहले तक 50 साल के बाद होती थी, अब 25 साल के युवाओं में मिल रही है। पिछले 5 साल से अब तक 40 फीसदी से ज्यादा मरीज बढ़ गए हैं। यही नहीं 25 साल के युवा भी इस बीमारी के शिकार हो रहे हैं। कुल मरीजों में 20 से 25 फीसदी मरीज 20 से 35 वर्ष वाले हैं। आज 16 अक्टूबर को वर्ल्ड स्पाइन डे है। इस साल की थीम है- स्पाइन हैल्थ फॉर लाइफ यानी जीवन भर स्वस्थ रीढ़। स्पाइन व न्यूरो सर्जन के अनुसार मरीजों में दो तरह के युवा शामिल हैं। एक आईटी व सरकारी कर्मचारी जो 8 घंटे बैठते हैं। दूसरे खदान व कृषि क्षेत्र के युवा, जो गलत तरीके से वजन उठाते हैं। प्रदेश में पहली बार स्पाइनल नेविगेशन सिस्टम से 17 साल की बच्ची की 48 डिग्री झुकी रीढ़ (स्कोलियोसिस) सीधी की गई। ये यूनिक केस है।
इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजियोथेरेपिस्ट व हालिया स्टडी के अनुसार देश में पीठ दर्द के कुल मरीजों में से 15 प्रतिशत अकेले भारत में हैं, जिनमें ज्यादातर 18 से 38 साल के हैं। 1,355 युवाओं पर हुई दिल्ली की एक स्टडी में 42.4 प्रतिशत ने साल में एक बार क्रॉनिक बैक पेन की शिकायत की। अहमदाबाद में वर्ल्ड स्पाइन डे 2025 पर जारी रिपोर्ट में कहा गया कि 12 से 40 साल के मरीजों में 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
रीढ़ 33 हड्डियों की चेन है। हर दो हड्डियों के बीच एक नरम गद्दी होती है, जिसे डिस्क कहते हैं। जब यह गद्दी अपनी जगह से खिसक कर नस को दबा देती है तो इसे स्लिप डिस्क या डिस्क प्रोलैप्स कहते हैं। सबसे ज्यादा केस एल 4-एल5 (कमर के नीचे) में होते हैं, जिससे पैर में करंट जैसा दर्द जाता है।
0 कमर से पैर तक करंट जैसा दर्द यानी साइटिका।
0 पैर का सुन्न होना या झनझनाहट
0 खांसने-छींकने पर दर्द का बढ़ना
0 पेशाब पर कंट्रोल कम होना
0 रात में लेटने पर भी आराम न मिलना
30 मिनट नियम- हर 30 मिनट में 30 सेकंड खड़े हों, कंधे पीछे घुमाएं।
90-90-90 फॉर्मूला- कूल्हा 90 डिग्री, घुटना 90 डिग्री, कोहनी 90 डिग्री।
मोबाइल की गर्दन- फोन को आंखों के लेवल पर रखें, गर्दन न झुकाएं।
खड़े होने पर कमर की एल 4-5 डिस्क पर 100 फीसदी दबाव तो सीधे बैठने पर 140 व आगे झुककर बैठने पर 190 फीसदी तक दबाव पड़ता है। यही दबाव धीरे-धीरे डिस्क को बाहर निकाल देता है, जिसे स्लिप डिस्क कहते हैं। लगातार बैठने से पेट व पीठ की गहरी मसल्स निष्क्रिय हो जाती हैं। मसल सपोर्ट हटते ही पूरा भार सीधे हड्डी व डिस्क पर आ जाती है। रीढ़ की डिस्क में खून की सप्लाई नहीं होती। वो स्पंज की तरह है। जब आप चलते-फिरते हैं तो वो पोषक तत्व सोखती व छोड़ती है। लगातार बैठे रहने पर ये पंपिंग बंद हो जाती है और डिस्क भूखी मरकर जल्दी घिस जाती है।
लगातार कुर्सी पर या एक ही स्थान पर बैठने से रीढ़ की हड्डी पर दबाव बढ़ता है। कमर से पैर तक दर्द या पैरों में झुनझुनाहट हो तो एक बार विशेषज्ञ डॉक्टर को जरूर दिखाएं। पिछले 5 सालों में युवाओं में स्पाइन संबंधी समस्या बढ़ी है। मोबाइल फाेन पर भी ज्यादा देर तक बात करना स्पाइन के लिए सही नहीं है।
डॉ. लवलेश राठौर, एसोसिएट प्रोफेसर न्यूरो सर्जरी डीकेएस अस्पताल