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Dhamtari News: जंगल में मिले खून के छींटे, कैमरा ट्रैप ने खोला सांभर शिकार का राज, 12 आरोपी गिरफ्तार

Sambar Hunting: जंगल में मिले खून के छींटों ने वन विभाग को ऐसे सुराग दिए, जिनकी कड़ी कैमरा ट्रैप फुटेज से जुड़ती चली गई। जांच आगे बढ़ी तो सांभर के कथित अवैध शिकार का मामला सामने आया।
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Chhattisgarh News

12 आरोपी गिरफ्तार (फोटो सोर्स- पत्रिका)

Illegal Wildlife Hunting: धमतरी जिले के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन्यप्राणियों के अवैध शिकार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के दौरान वन विभाग को बड़ी सफलता मिली है। कुल्हाड़ीघाट परिक्षेत्र के शेषपार जलप्रपात के पास गश्त के दौरान मिले खून के छींटों से शुरू हुई जांच कैमरा ट्रैप फुटेज और गोपनीय सूचना के आधार पर आगे बढ़ी।

जांच के दौरान सांभर के कथित शिकार से जुड़ी कड़ियां सामने आती गईं। वन विभाग की एंटी-पोचिंग टीम ने कार्रवाई करते हुए मामले में 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। वहीं कुछ अन्य संदिग्ध आरोपियों के फरार होने की जानकारी सामने आई है, जिनकी तलाश की जा रही है।

शेषपार जलप्रपात के पास मिले खून के छींटे

वन विभाग के अनुसार, 15 दिसंबर 2025 को कुल्हाड़ीघाट परिक्षेत्र में एंटी-पोचिंग टीम जंगल में गश्त कर रही थी। इसी दौरान शेषपार जलप्रपात के पास वन्यप्राणी के खून के छींटे दिखाई दिए। सामान्य गश्त के दौरान मिले इन निशानों को टीम ने गंभीरता से लिया और मौके की जानकारी जुटाने के साथ जांच शुरू की।

खून के निशान मिलने के बाद वन विभाग ने आसपास लगे कैमरा ट्रैप के फुटेज खंगाले। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर गोपनीय सूचना जुटाई गई। कैमरा ट्रैप से मिले सुराग और मुखबिर से प्राप्त जानकारी को आपस में जोड़कर टीम ने आगे की जांच शुरू की।

गांवों तक पहुंची जांच की कड़ी

जांच आगे बढ़ने पर ग्राम सिहावा, डुंडरपानी और चिंहरापारा के कुछ लोगों की कथित संलिप्तता सामने आई। इसके बाद वन विभाग की टीम ने संदिग्धों की गतिविधियों और उनके ठिकानों के संबंध में जानकारी जुटाई। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उप निदेशक वरूण जैन के अनुसार, जांच के आधार पर 16 दिसंबर को संबंधित स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया गया। तलाशी के दौरान आरोपियों के घरों से वन्यप्राणी शिकार में इस्तेमाल होने वाली सामग्री सहित कई आपत्तिजनक सामान बरामद किए गए।

घरों से तीर-धनुष, फंदे और सांभर के अवशेष बरामद

वन विभाग की तलाशी कार्रवाई के दौरान टीम को तीर-धनुष, फंदे और कांटे मिले। इसके अलावा सांभर का मांस और सींग तथा जंगली सूअर का मांस भी बरामद किया गया। बरामद सामान को वन विभाग ने जब्त कर लिया। तलाशी के दौरान मिले इन सामानों के आधार पर टीम ने शिकार से जुड़े अन्य सुरागों को भी खंगालना शुरू किया। वन विभाग की कार्रवाई में बरामद सामग्री का पंचनामा तैयार किया गया और पूरी कार्रवाई की फोटो-वीडियोग्राफी भी कराई गई।

घटनास्थल पर मिले हड्डियां और मांस के टुकड़े

16 दिसंबर को तलाशी अभियान के बाद अगले दिन 17 दिसंबर को वन विभाग की टीम ने शेषपार जलप्रपात के पास बताए गए घटनास्थल का दोबारा निरीक्षण किया। मौके पर जांच के दौरान हड्डियां और मांस के टुकड़े मिले। इसके साथ ही वहां मांस पकाए जाने के साक्ष्य भी मिलने की जानकारी वन विभाग ने दी।

मौके से मिले अवशेषों को जांच के लिए सुरक्षित किया गया है। वन विभाग अब इन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजने की तैयारी में है, ताकि बरामद अवशेषों की वैज्ञानिक जांच कराई जा सके।

17 दिसंबर को दर्ज किया गया वन अपराध

मामले में वन विभाग ने 17 दिसंबर को पीओआर क्रमांक 10/09 के तहत वन अपराध दर्ज किया। इसके बाद वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई आगे बढ़ाई गई। जांच में सामने आए 12 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किए जाने की कार्रवाई की जा रही है। वहीं मामले में कुछ अन्य आरोपियों के फरार होने की जानकारी है। वन विभाग की टीम उनकी तलाश में जुटी हुई है।

कैमरा ट्रैप और मुखबिर तंत्र से मिली अहम मदद

इस पूरी कार्रवाई में कैमरा ट्रैप फुटेज ने अहम भूमिका निभाई। जंगल में वन्यप्राणियों की निगरानी के लिए लगाए गए कैमरों से मिले फुटेज और मौके पर मिले खून के निशानों को जांच की महत्वपूर्ण कड़ी माना गया। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर प्राप्त गोपनीय सूचना से टीम को संदिग्धों तक पहुंचने में मदद मिली।

वन विभाग ने जंगल में अवैध शिकार और वन्यप्राणियों की तस्करी पर नजर रखने के लिए एंटी-पोचिंग टीमों की गश्त और निगरानी बढ़ा रखी है। इसी अभियान के दौरान यह मामला सामने आया।

अन्य आरोपियों की तलाश जारी

वन विभाग की कार्रवाई अभी पूरी नहीं हुई है। गिरफ्तार किए गए 12 आरोपियों से पूछताछ और बरामद सामग्री की जांच के आधार पर मामले में अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है। फरार आरोपियों की तलाश के साथ यह भी पता लगाया जा रहा है कि कथित शिकार में और कौन-कौन लोग शामिल थे।वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ एंटी-पोचिंग टीम की इस कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका रही। जब्त वन्यप्राणी अवशेषों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे जाने के बाद मामले में आगे की जांच और साक्ष्यों की वैज्ञानिक पुष्टि की जाएगी।