रायपुर

चीफ जस्टिस ने नाउम्मीद किसानों को अपने चेंबर में बुलाकर सुनी व्यथा, कहा- न्याय पर सभी का हक

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब चीफ जस्टिस ने किसानों को अपने चेंम्बर में बुलाकर उनकी समस्याओं को सुना

2 min read
Feb 21, 2018

बिलासपुर. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ जब चीफ जस्टिस टीबी राधाकृष्णन ने महासमुंद से बिलासपुर तक की पदयात्रा पर निकले किसानों को अपने चेंबर में बुलाकर उनकी समस्याओं को सुना। समस्या से अवगत होने के बाद सीजे राधाकृष्णन ने विधिक सेवा के एएन तिवारी और हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल गौतम चौराडिया को निर्देशित किया कि शासन से संपर्क कर किसानों की समस्या का पता लगाएं और 15 दिनों में इस संबंध में अवगत कराएं।

शासकीय व्यवस्था से नाउम्मीद किसान 5 सूत्री मांगों को लेकर 27 जनवरी से महासमुंद से 270 किलोमीटर की पदयात्रा कर किसान मंगलवार को हाईकोर्ट पहुंचे।

ये भी पढ़ें

गड़बड़ी की सजा, धान खरीदी प्रभारी निलंबित, संचालक मंडल को नोटिस

किसानों का आरोप है कि धान का समर्थन मूल्य देने में सरकार ने वादाखिलाफी की है। इस संबंध में सरकार ने कई बार अल्टीमेटम देने के बाद भी कोई सुध नहीं ली। अनशन पर बैठने के बाद भी कोई राहत नहीं मिली। हाईकोर्ट को भी पत्र लिखकर पूरे मामले की जानकारी दी गई। इसके बाद किसानों ने पदयात्रा शुरू की थी।

किसानों को रोकने सुरक्षा बल तैनात

महासमुंद से किसानों का दल बिलासपुर हाईकोर्ट के लिए पदयात्रा पर निकला था। कारवां बढऩे के बाद किसानों की संख्या बढ़ती गई। हाईकोर्ट पहुंचने पर संख्या बढक़र तीन सौ से अधिक हो गई। एक साथ इतनी बडी संख्या मे किसानों के पहुंचने पर पुलिस ने बैरिकेडिंग कर किसानों को हाईकोर्ट के सामने के परिसर में रोक दिया।

सीजे ने 10 लोगों को मिलने की दी अनुमति

सीजे को जब महासमुंद से पदयात्रा कर किसानों के आने की जानकारी दी गई तो उन्होंने अधिकतम 10 लोगों को चेंबर में आकर मिलने की अनुमति दी। चेंबर में किसान नेता राजेश्वर चंद्राकर, राधेश्याम शर्मा, रामगुलाम सिंह ठाकुर समेत दो महिला समाजसेवी एवं तीन अन्य किसान नेता मिलने गए। किसानों की समस्या को सुनने के बाद उन्होंने कहा न्याय पर सभी का हक है। वाजिब न्याय सभी को मिलेगा। हाईकोर्ट की स्थापना का उद्देश्य भी यही है।

किसान नेता राजेश्वर चंद्राकर ने कहा चीफ जस्टिस से मिलने के बाद न्याय की उम्मीद जगी है। शासन ने तो जैसे हमें भगवान भरोसे छोड़ दिया है। अब उम्मीद है कि हमें न्याय और हमारा हक मिलेगा।

पानी पिलाकर किसानों का अनशन तुड़वाया

किसानों की समस्या सुनने के बाद ये जानकारी दिए जाने पर कि जो लोग मिलने आए हैं, अनशन पर हैं। सीजे ने रजिस्ट्रार जनरल गौतम चौराडिया को पानी पिलाकर अनशन तुड़वाने के लिए कहा। चेंबर में ही किसानों को पानी पिलाकर अनशन तुड़वाया गया।

अधिवक्ता हाईकोर्ट सतीश चंद्र वर्मा ने कहा चीफ जस्टिस का ये कदम प्रशंसनीय है। कोई भी व्यक्ति न्याय की आस लिए अगर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाता है तो उसे न्याय मिलना ही चाहिए। यही न्याय का तकाजा है और सिद्धांत भी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का ये ऐतिहासिक कदम है। हर स्तर पर इसका स्वागत होना चाहिए।

ये भी पढ़ें

3853 करोड़ के कर्ज में डूबी नेको इंडस्ट्रीज ने सरकार को रखा अंधेरे में, अब दिवालिया होने के कगार पर
Updated on:
21 Feb 2018 12:14 pm
Published on:
21 Feb 2018 12:09 pm
Also Read
View All