
रायपुर@पीलूराम साहू। World Stuttering Awareness Day 2026: बच्चों की हकलाहट दूर करने के लिए प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में स्पीच थैरेपिस्ट ही नहीं है। केवल आंबेडकर अस्पताल के ईएनटी विभाग में स्पीच थैरेपी की सुविधा है। यहां भी बच्चों की लंबी वेटिंग है। इससे पालकों में निराशा है। कई पैरेंट्स बच्चों की कमियां समझकर हकलाहट को दूर करने का प्रयास नहीं करते। जबकि विशेषज्ञों के अनुसार हकलाहट कोई कमजोरी नहीं है।
विश्व हकलाहट जागरुकता दिवस 22 अक्टूबर को है। इस मौके पर पत्रिका ने छोटे बच्चों व उनके पैरेेंट्स की समस्या को जानने का प्रयास किया। अमिता का बेटा अयांश 5 साल का था। जब पहली बार उसने 'म-म-मम्मी कहा। सुनीता को लगा, बच्चा प्यार में अटका है। सब हंसे। 6 महीने बाद जब स्कूल में मैडम ने नाम पूछा और अयांश 40 सेकंड तक 'अ-अ-अ-अ…' करता रहा, पूरी क्लास हंस पड़ी। उस दिन अयांश ने स्कूल जाना बंद कर दिया। अमिता बताती है कि परेशानी अयांश की हकलाहट नहीं, दुनिया का रिएक्शन था। हकलाहट वाले बच्चों के माता-पिता की तकलीफ एक नहीं, चार होती है।
हकलाने वाले उन बच्चों के हर दूसरे मां-बाप को लगता है कि हमारी वजह से हुआ। कहीं मैंने ज्यादा डांटा तो नहीं? कहीं मोबाइल ज्यादा देखने दिया तो नहीं? आंबेडकर अस्पताल के ऑडियोलॉजिस्ट कहते हैं, रोज 10 में से 7 पैरेंट्स यही सवाल लेकर आते हैं ? जबकि हकलाहट न डर से होती है, न डांट से। इसका 60 फीसदी कारण जेनेटिक व ब्रेन का स्पीच प्रोसेसिंग का तालमेल है, पर मां का अपराधबोध सबसे भारी होता है।
क्या मेरा बच्चा कभी स्टेज पर बोल पाएगा? क्या इसे नौकरी मिलेगी? क्या इसकी शादी होगी?" राधिका अपने बेटे के बारे में यही सोचती। फिर राधिका एक निजी थैरेपी सेंटर पहुंची। वहां पहली बार किसी ने कहा इसे ठीक मत करो, इसे सुनो। थेरेपी में प्रवीण को सिखाया नहीं, बल्कि राधिका को सिखाया गया, बीच में टोकना बंद करो, आंखों में देखो, धीरे बोलो, खत्म करने में मदद मत करो। चार महीने में प्रवीण आज 70 फीसदी फ्लुएंट है। राधिका कहती हैं कि मेरा बेटा अब भी अटकता है, पर अब मैं नहीं अटकती। पहले मैं उसके लिए बोलती थी, अब मैं उसके लिए रुकती हूं।
डॉ. वर्षा मुंगुटवार, प्रोफेसर ईएनटी आंबेडकर अस्पताल के मुताबिक, बच्चों का हकलाना कोई कमजोरी नहीं है। कई बार डर में वे ठीक से नहीं बोल पाते। अगर बच्चा हकला रहा है तो स्पीच थैरेपी से इसे ठीक किया जा सकता है। बच्चों को रोकने या टोकने के बजाय आत्मविश्वास बढ़ाने से वह हकलाना कम करेगा। छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों में स्पीच थैरेपिस्ट की संख्या बढ़ाए जाने की जरूरत है।