22 अक्टूबर 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

50 साल के लिए निजी हाथों में जाएगा रायपुर एयरपोर्ट? औरंगाबाद के साथ हुआ बंडल, जानें क्या बदलेगा

PPP Model: रायपुर के स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट को पीपीपी मॉडल के तहत 50 साल की लीज पर निजी कंपनियों को सौंपने की तैयारी है। केंद्र सरकार की योजना में रायपुर को औरंगाबाद एयरपोर्ट के साथ बंडल किया गया है। जानिए, इस फैसले से एयरपोर्ट के प्रबंधन, यात्री सुविधाओं और विकास पर क्या असर पड़ सकता है।
3 min read
Google source verification
Swami Vivekananda Airport

निजी हाथों में जाएगा रायपुर एयरपोर्ट? (फोटो सोर्स- AI)

Raipur Airport Privatization: देश के विमानन मानचित्र पर रायपुर एक महत्वपूर्ण और रणनीतिक केंद्र के रूप में उभर रहा है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत रायपुर के स्वामी विवेकानंद हवाई अड्डे को निजी-सार्वजनिक भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के अंतर्गत लाने की सुगबुगाहट तेज हो गई है।

नागरिक उड्डयन मंत्रालय और पीपीपी मूल्यांकन समिति की सैद्धांतिक हरी झंडी के बाद, देश के 11 चुनिंदा एयरपोर्ट्स को 50 साल की लंबी लीज पर निजी कंपनियों को सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस पूरी नीतिगत कवायद में रायपुर को महाराष्ट्र के औरंगाबाद के साथ एक विशेष 'बंडल' में जोड़ा गया है। यह छत्तीसगढ़ के औद्योगिक, व्यापारिक और आतिथ्य क्षेत्र के लिए एक दूरगामी प्रभाव वाला कदम है।

दिल्ली व पटना के लिए 25 से नई फ्लाइट

स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट रायपुर से दिल्ली और अंबिकापुर-वाराणसी पटना के लिए 25 अक्टूबर से नई फ्लाइट उडाऩ भरेगी। दोनों ही फ्लाइट विंटर सीजन में 25 अक्टूबर से उड़ान भरेगी। वहीं डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ सिविल एविएशन (डीजीसीए) द्वारा फ्लाइटों का शेड्यूल भी बदला गया है। नए शेड्यूल के अनुसार अब रायपुर से दिल्ली के लिए सबसे पहली उड़ान सुबह 8 बजे उड़ान भरेगी। वर्तमान में रायपुर से दिल्ली के बीच 7 फ्लाइट का संचालन किया जाता है। इसमें इंडिगो की 4 और एयरइंडिया की 3 फ्लाइट शामिल है। नई फ्लाइट के शुरू होने पर 8 फ्लाइट का संचालन होगा।

रायपुर-अंबिकापुर से रांची या फिर पटना तक फ्लाइट के लिए एलायंस एयर ने डीजीसीए को प्रस्ताव भेजा है। इसमें नई फ्लाइट के विंटर सीजन में संचालन की अनुमति मांगी थी। इसमें रायपुर-अंबिकापुर से रांची या फिर पटना तक फ्लाइट का संचालन किया जाना प्रस्तावित है। उक्त एयरक्राफ्ट को यात्रियों की संख्या को देखते हुए शुरूआत में सप्ताह में दो दिन और उसके बाद विस्तार करने की योजना बनाई गई है।

ट्रैवल्स संचालकों ने बताया कि विंटर सीजन अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से शुरू होगा। इस दौरान फ्लाइट्स के शेड्यूल और नई फ्लाइट के लिए विमानन कंपनियों की ओर से प्रस्ताव भेजा गया है। ट्रैवल्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (टॉफी) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रमन जादवानी ने बताया कि पटना, रांची, मुंबई, भुवनेश्वर व पुणे लिए नई फ्लाइट के संचालन को लेकर कवायद चल रही है। विंटर सीजन शुरू होने के पहले अधिकारिक रूप से घोषणा होगी।

क्या है 'बंडलिंग' की यह अनूठी रणनीति…

केंद्र सरकार और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) ने निजीकरण के इस चरण में एक संतुलित मॉडल अपनाया है, जिसे 'बंडलिंग' (समूह निर्माण) का नाम दिया गया है। इसके तहत केवल बड़े महानगरों के एयरपोर्ट्स को ही नहीं, बल्कि उनके साथ छोटे या मध्यम यातायात वाले हवाई अड्डों को भी एक ही पैकेज में शामिल किया गया है, ताकि सभी का समेकित विकास हो सके। इसी रणनीति के तहत चौथे बंडल में रायपुर और औरंगाबाद को एक साथ रखा गया है।

इसका सीधा अर्थ यह है कि जिस भी निजी ऑपरेटर या कंपनी को इस समूह की बोली मिलेगी, उसे रायपुर और औरंगाबाद दोनों एयरपोर्ट्स के प्रबंधन, आधुनिकीकरण और विकास की संयुक्त जिम्मेदारी उठानी होगी। सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य एकल और मजबूत निवेशकों को आकर्षित करना है, जो घाटे या कम यात्री घनत्व वाले क्षेत्रों में भी बुनियादी ढांचे को पटरी पर ला सकें।

छत्तीसगढ़ के लिए इसके क्या होंगे मायने?

विश्वस्तरीय सुविधाएं और आधुनिकीकरण: निजी निवेशकों के आने से रायपुर एयरपोर्ट पर पैसेंजर टर्मिनल का विस्तार, आधुनिक लाउंज, कार्गो हब और विश्वस्तरीय यात्री सुविधाएं मिलने की उम्मीदें बढ़ गई हैं।

व्यापार और पर्यटन को पंख: प्रदेश में खनिज, इस्पात और कृषि आधारित उद्योगों का बड़ा क्लस्टर है। इसके अलावा औरंगाबाद भी महाराष्ट्र का एक प्रमुख पर्यटन और औद्योगिक केंद्र है। इन दोनों शहरों के एक ही हवाई नेटवर्क के तहत आने से व्यापारिक आदान-प्रदान और सांस्कृतिक पर्यटन को एक नया कॉरिडोर मिलेगा।

कर्मचारियों और सुरक्षा को लेकर प्रावधान: नीति के मुताबिक, एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) और कोर नेविगेशन सेवाएं पहले की तरह विमानपत्तन प्राधिकरण के पास ही रहेंगी। साथ ही, कर्मचारियों के हितों को सुरक्षित रखने के लिए निजी संचालक को शुरुआती तीन साल तक एएआई के 60 प्रतिशत कर्मचारियों को सेवा में बनाए रखना होगा, जिससे संक्रमण काल में व्यवस्थाएं बाधित न हों।

आने वाले दिनों की राह

दिसंबर तक इस प्रक्रिया के तहत बोलियां आमंत्रित किए जाने की संभावना है, और वैश्विक निवेशकों को रिझाने के लिए मुंबई से लेकर विदेशों तक रोडशो की रूपरेखा तैयार की जा रही है। छत्तीसगढ़ के लिहाज से यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि कौन सी निजी कंपनी रायपुर और औरंगाबाद के इस संयुक्त मोर्चे को संभालती है और स्थानीय आर्थिकी को कितनी ऊंचाई देती है।

बड़ी खबरें

View All

रायपुर

छत्तीसगढ़

ट्रेंडिंग