रायपुर

Raipur AIIMS: एम्स में स्मार्ट नेविगेशन तकनीक से पहली बार कॉक्लियर इम्प्लांट, 4 वर्षीय बालिका की हुई सफल सर्जरी

Raipur AIIMS:सर्जरी के दौरान इलेक्ट्रोड की सटीक स्थिति सुनिश्चित करने, शल्य-क्रिया की शुद्धता बढ़ाने, ऑपरेशन का समय कम करने तथा दीर्घकालिक श्रवण परिणामों को बेहतर बनाने में सहायक सिद्ध होती है।

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Jan 16, 2026
AIIMS रायपुर में ‘इलाज का संकट’! डॉक्टर और स्टाफ की भारी कमी से जूझ रहे मरीज, डॉक्टर-बेड की कमी ने बढ़ाई चिंता(photo-patrika)
AIIMS रायपुर में ‘इलाज का संकट’! डॉक्टर और स्टाफ की भारी कमी से जूझ रहे मरीज, डॉक्टर-बेड की कमी ने बढ़ाई चिंता(photo-patrika)

Raipur AIIMS: एम्स में पहली बार स्मार्ट नेविगेशन (स्मार्ट नैव) तकनीक से कॉक्लियर इम्प्लांट किया गया। 4 वर्षीय बालिका जन्म से सुन व बोल नहीं पा रही थी। ईएनटी विभाग में हुई सर्जरी सफल रही। यह तकनीक एक अत्याधुनिक नेविगेशन-सहायता प्राप्त प्रणाली है।

यह तकनीक सर्जरी के दौरान इलेक्ट्रोड की सटीक स्थिति सुनिश्चित करने, शल्य-क्रिया की शुद्धता बढ़ाने, ऑपरेशन का समय कम करने तथा दीर्घकालिक श्रवण परिणामों को बेहतर बनाने में सहायक सिद्ध होती है। यह जटिल सर्जरी मुंबई से आई डॉ. हेतल मारफतिया, एचओडी डॉ. रेनू राजगुरु ने संयुक्त रूप से की।

यह तकनीक रियल-टाइम फीडबैक उपलब्ध कराती है, जिससे संभावित रिस्क को कम किया जा सकता है। कार्यकारी डायरेक्टर डॉ. अशोक कुमार जिंदल ने कहा कि जन्म से श्रवण हानि से पीड़ित बच्चों में शीघ्र पहचान और समय पर इलाज जरूरी है। नेविगेशन-सहायता प्राप्त कॉक्लियर इम्प्लांटेशन जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग एम्स की नवीनतम चिकित्सा पद्धतियों को अपनाने की जरूरत है।

Published on:
16 Jan 2026 01:05 am