
रायपुर@पीलूराम साहू। Chhattisgarh Medical College: देश में चिकित्सा शिक्षा (मेडिकल एजुकेशन) की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश में बिना पर्याप्त फैकल्टी और इंफ्रास्ट्रक्चर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों को मान्यता दिए जाने पर वहां के डॉक्टरों ने राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। प्रोग्रेसिव मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन (एमपी) ने डॉक्टर्स डे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Complaint Against NMC) को पत्र लिखकर एनएमसी के भ्रष्ट अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई करने और उन्हें बर्खास्त करने की मांग की है।
डॉक्टरों ने मांग की है कि एक स्वतंत्र उच्च स्तरीय समिति बनाकर इन नए कॉलेजों (Medical College) का फिर से फिजिकल, बायोमीट्रिक और शैक्षणिक ऑडिट कराया जाए। कमोबेश यही स्थिति छत्तीसगढ़ की भी है, जहां पर्याप्त संसाधनों और डॉक्टरों के बिना ही कई कॉलेजों की सीटों का नवीनीकरण (रिनुअल) कर दिया गया है। डॉक्टरों का कहना है कि आज चुनौती सिर्फ एमबीबीएस की सीटें बढ़ाना नहीं है, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखना है ताकि भविष्य में मरीजों को योग्य डॉक्टर मिल सकें।
प्रदेश के नए ही नहीं, बल्कि सालों पुराने मेडिकल कॉलेजों में भी फैकल्टी का भारी अकाल है। प्रदेश के 10 प्रमुख सरकारी मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टरों के स्वीकृत 2,660 पदों में से 1,290 पद खाली पड़े हैं। यानी लगभग 48 प्रतिशत पदों पर कोई डॉक्टर ही नहीं है। सबसे बदतर स्थिति कोंडागांव, कोरबा और महासमुंद जैसे नए कॉलेजों की है, जहां प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के अधिकांश पद खाली हैं। रायपुर और बिलासपुर जैसे बड़े चिकित्सा संस्थानों में भी सीनियर डॉक्टरों की भारी कमी है।
राज्य में कवर्धा, मनेंद्रगढ़, जांजगीर-चांपा, दंतेवाड़ा और कुनकुरी (जशपुर) में 5 नए मेडिकल कॉलेज खोलने की तैयारी है। शुरुआत में जरूरी दस्तावेजों और मापदंडों की कमी के कारण एनएमसी ने सभी 5 आवेदनों को खारिज कर दिया था। हालांकि, राज्य सरकार की अपील के बाद दोबारा निरीक्षण किया गया है।
जानकारों का कहना है कि जशपुर के कुनकुरी और मनेंद्रगढ़ में अब तक सर्वसुविधायुक्त जिला अस्पताल भी नहीं है। कुनकुरी से जिला अस्पताल जशपुर की दूरी करीब 50-52 किलोमीटर है। ऐसे में इन दोनों जगहों पर मान्यता मिलना बेहद मुश्किल है। दंतेवाड़ा, कवर्धा और जांजगीर को मान्यता मिल सकती है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि इन्हें चलाने के लिए फैकल्टी कहां से आएगी? सरकार ने कुछ डॉक्टरों का तबादला यहां किया है, जो ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहा है।
प्रदेश में भी मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन अस्तित्व में है, लेकिन वह पड़ोसी राज्य की तरह सक्रिय और मुखर नहीं है। हाल ही में राज्य शासन ने बिना छत्तीसगढ़ काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराए बाहरी राज्यों के डॉक्टरों को यहां प्रैक्टिस की अनुमति दी थी, लेकिन एसोसिएशन इस पर मौन रहा। प्रदेश में फैकल्टी की कमी इस तरह