
ईडी ने भारतमाला परियोजना और छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज़ कॉर्पोरेशन लिमिटेड घोटाले में शामिल आरोपियों की 103.71 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्तियों को अटैच किया है। इनमें 43 करोड़ रुपए के भारतमाला घोटाले में शामिल जमीन दलाल हरमीत सिंह खनूजा, खेमराज कोशले, पुनूराम देशलहरे और कुंदन बघेल की 23.35 करोड़ के साथ ही 660 करोड़ रुपए के सीजीएमएससी में मोक्षित कॉर्पोरेशन के शशांक चोपड़ा सहित अन्य की 80.36 करोड़ की संपत्तियां शामिल हैं।
ईडी के अनुसार हरमीत ने अपने सहयोगियों खेमराज, पुनूराम और कुंदन के साथ मिलकर भूमि मालिकों को शपथ पत्र, आवेदन और राजस्व कागजात जैसे विभिन्न दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए प्रेरित किया। साथ ही सरकारी अधिकारियों की सहायता से दस्तावेजों में जमीनों को कई टुकड़ों में बांटकर कई गुना अधिक मुआवजे की राशि वितरित की। इसी तरह मोक्षित कॉर्पोरेशन के शशांक चोपड़ा ने डीएसएस और सीजीएमएससीएल के अधिकारियों के साथ मिलीभगत करके टेंडर में हेराफेरी कर मनगढ़ंत तरीके से बढ़ाया। वहीं मेडिकल उपकरण तथा री-एजेंट अत्यधिक बढ़ी हुई कीमतों पर सप्लाई की।
रायपुर-विशाखापत्तनम तक बनाए जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना से संबंधित भूमि अधिग्रहण मुआवजे में गिरफ्तार किए गए हरमीत ने अपने सहयोगियों के साथ साजिश रची। अधिग्रहित भूमि के संबंध में धोखाधड़ी करके अपात्र लोगों को मुआवजा देने दलालों, निजी व्यक्तियों और कुछ सरकारी कर्मचारियों को शामिल किया। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा 30 जनवरी 2020 को अधिसूचना जारी होने के बाद, राजस्व अभिलेखों में हेराफेरी कर बैकडेट में जमीन को कई टुकड़ों में विभाजित किया। इससे अधिग्रहित भूमि की मुआवजा राशि में कई गुना इजाफा हुआ।
जमीन दलालों के द्वारा जमीन मालिकों के नाम पर कई बैंक खाते खोले गए और मुआवजे की राशि इन खातों में जमा की गई। इसके बाद जमीन मालिकों से लिए गए कोरे चेक पर हस्ताक्षर और बैंकिंग दस्तावेजों का उपयोग किया। इसका एक बड़ा हिस्सा हरमीत सिंह खनूजा ने अपने रिश्तेदारों, सहयोगियों और संस्थाओं के बैंक खातों में स्थानांतरित कर दिया गया। ईडी को जांच में पता चला कि हरमीत और उसके साथियों द्वारा 27.05 करोड़ रुपए गबन किया गया था। बता दें कि इस घोटाले में जल संसाधन विभाग के 2 कर्मचारियों ने पूर्व में अधिग्रहित की गई जमीन की गलत रिपोर्ट प्रस्तुत की। वहीं 4 अन्य फरार आरोपियों ने राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर बटांकन एवं अन्य राजस्व प्रक्रियाओं में फर्जीवाड़ा किया।