
Delhi PG Hostel Accident: छत्तीसगढ़ के रायपुर में जर्जर और खतरनाक भवनों को लेकर नगर निगम प्रशासन ने अब सख्त रुख अपनाया है। राजधानी में करीब 150 जर्जर भवनों की सूची पहले से तैयार है, लेकिन इन पर कार्रवाई अक्सर नोटिस जारी करने तक सीमित रही है। बारिश के मौसम और त्योहारों के दौरान भवन मालिकों को नोटिस देने की प्रक्रिया की जाती रही है। अब दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में 6 सितंबर को PG हॉस्टल भवन ढहने की घटना के बाद निगम प्रशासन ने जर्जर भवनों को लेकर कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए हैं।
नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा ने गुरुवार को निर्देश जारी कर राजधानी में घोषित किए गए सभी जर्जर भवनों पर नोटिस चस्पा करने के साथ उनकी फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराने को कहा है। निगम के अनुसार, ऐसे भवनों से भविष्य में किसी तरह की दुर्घटना होने पर भवन स्वामी की जिम्मेदारी तय की जाएगी। इसके लिए संबंधित भवन मालिकों से क्षतिपूर्ति शपथ पत्र लेने के निर्देश भी सभी जोन कमिश्नरों को दिए गए हैं।
रायपुर नगर निगम में कुल 10 जोन हैं और सभी जोन में जर्जर भवनों को सूचीबद्ध किया गया है। शहर के घनी आबादी वाले जोन-4 में ही 38 से अधिक जर्जर भवनों को चिन्हित किया गया है। निगम आयुक्त के निर्देश के बाद अब सभी जोन कमिश्नरों को अपने-अपने क्षेत्र में ऐसे भवनों पर कार्रवाई सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है।
नगर निवेश विभाग के अपर आयुक्त नगर पंकज के शर्मा ने बताया कि सभी 10 जोनों के कमिश्नरों की जिम्मेदारी तय की गई है। उनके क्षेत्र में आने वाले जर्जर और खतरनाक भवनों पर नोटिस चस्पा करने के साथ फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराई जाएगी। भवन स्वामियों से क्षतिपूर्ति शपथ पत्र लेना भी अनिवार्य किया गया है। निगम आयुक्त के आदेश के अनुसार, नोटिस देने और नियमानुसार कार्रवाई करने का अधिकार जोन अधिकारियों को दिया गया है।
निगम के अनुसार, नोटिस मिलने के बाद भी जर्जर भवन की मरम्मत नहीं कराने या नए सिरे से निर्माण नहीं कराने की स्थिति में भवन स्वामी की जिम्मेदारी होगी। ऐसे भवनों को हटाने की कार्रवाई भवन मालिक को स्वयं करनी होगी और इसकी सूचना नगर निगम को देनी होगी। नियमों का पालन नहीं करने पर निगम की ओर से नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
नगर निगम ने सभी जोन कमिश्नरों और मुख्यालय के नगर निवेश विभाग के अधिकारियों को जर्जर एवं खतरनाक भवनों के मामले में नियमों का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए हैं। निगम प्रशासन का जोर अब केवल नोटिस जारी करने के बजाय भवनों की स्थिति की निगरानी और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने पर है।