
रायपुर. राजधानी में पिछले चार-पांच दिनों से फिर से लोगों को घरों में निगम के नल से गंदा पानी निकल रहा है। अब तो गर्मी में जहां पीलिया फैला था, वहां भी गंदा पानी आने की शिकायतें मिल रही है। जबकि निगम प्रशासन ने पीलिया फैलने के बाद इन इलाकों की पाइप लाइन बदल ली थी। इसके बावजूद गंदे पानी की सप्लाई होना कई तरह के सवाल खड़े कर रहे हैं।
अधिकारियों का कहना है कि निगम के फिल्टर प्लांट में खारुन के पानी में जो टर्बिडिटी की मात्रा बढ़ी हुई, उसे दूर करने के लिए पर्याप्त मात्रा में एलम डाला जा रहा है। इसके अलावा पानी के शुद्धीकरण अन्य प्रक्रिया भी हर दिन अपनाई जा रही है। हर घंटे पानी की रिपोर्ट भी ली जा रही है। फिर भी गंदा पानी आ रहा है, तो पाइप लाइन में ही लीकेज के कारण गंदा पानी आ रहा होगा। बारिश में इस तरह की समस्या ज्यादा आती है। जोनों के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं जहां-जहां गंदा पानी आने की शिकायतें आ रही है, उस क्षेत्र की पाइप लाइल जांच कर लीेकेज तत्काल ठीक कराएं।
डीडी नगर, चंगोराभाठा, पंडरी, मोवा, जगन्नाथ नगर, तेलीबांधा, चौरसिया कॉलोनी, मठपुरैना, लाखे नगर, पुरानी बस्ती, टिकरापारा, संजय नगर, संतोषी नगर, राजेंद्र नगर, बैरनबाजार सहित अन्य क्षेत्रों में पिछले एक सप्ताह से निगम के नल से गंदे पानी की सप्लाई हो रही है।
जिन घरों में निगम के नल पर गंदा पानी आ रहा है, उन लोगों ने बताया कि पानी को देखकर एेसा लगता है कि जो पानी आया है, वह नाली का या फिर निगम के नल का। पानी से नहाने-धोने तो दूर घूरेल कार्य के लिए भी उपयोग करते नहीं बन रहा है। निगम के निदान 1100 में शिकायत करने के बाद कहा जाता है कि पानी में क्लोरीन और एलम पर्याप्त मात्रा में मिला हुआ है। इसलिए उसे उबाल कर पी सकते हैं। किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं होगा।
निगम के अधिकारियों ने गंदे पानी की सप्लाई की शिकायत के बाद कर्मचारी भेजकर लोगों के घरों के पानी की क्लोरीन की जांच तो कर रहे हैं, लेकिन अन्य जांच नहीं कर रहे हैं। क्लोरीन तो ठीक मिल रही है। क्लोरीन पर्याप्त मिलने के बावजूद पानी क्योंगंदा आ रहा है इस सवाल का जवाब अधिकारी नहीं दे पा रहे हैं।
पाइप लाइन बिछी - 1200 किलोमीटर में
नगर निगम के आयुक्त रजत बंसल ने बताया जहां- जहां गंदे पानी की आपूर्ति की शिकायतें आ रही हैं, वहां कर्मचारी भेजकर जांच कराई जा रही है। इसके अलावा अंकी से सप्लाई लाइन की भी जांच कराई जा रही है, ताकि पाइप लाइन में लीकेज मिलने के बाद तत्काल दुरुस्त किया जा सके।