आयकर विभाग को बिलासपुर के फील ग्रुप समूह और जांजगीर-चांपा स्थित तिरूपति मिनरल्स के ठिकानों में तलाशी के दौरान कच्चे में करोड़ों रुपए का लेनदेन करने के दस्तावेज मिले हैं। इसके दस्तावेजों को सीज कर कम्प्यूटर और लैपटाप का बैकअप लिया जा रहा है। बताया जाता है कि बिलासपुर के कोल फील ग्रुप के चेयरमैन […]
आयकर विभाग को बिलासपुर के फील ग्रुप समूह और जांजगीर-चांपा स्थित तिरूपति मिनरल्स के ठिकानों में तलाशी के दौरान कच्चे में करोड़ों रुपए का लेनदेन करने के दस्तावेज मिले हैं। इसके दस्तावेजों को सीज कर कम्प्यूटर और लैपटाप का बैकअप लिया जा रहा है। बताया जाता है कि बिलासपुर के कोल फील ग्रुप के चेयरमैन प्रवीण झा, उनके भाई ललित और प्रवीण महंगी गाड़ियों के शौकीन माने जाते हैं। उनके काफिले में तीन से चार करोड़ की विदेशी गाड़ी समेत कई महंगी लग्जरी गाड़ियां मिली है।
तलाशी के दौरान एक एयरवेज कंपनी में शेयर की जानकारी भी मिली है। उक्त सभी को जांच के दायरे में लिया गया है। बता दें कि तलाशी के दौरान दूसरे दिन शुक्रवार को टैक्स चोरी से संबंधित दस्तावेज मिलने के बाद फर्म के कुल आय और व्यय का हिसाब किया जा रहा है। इसके पहले दिसंबर में स्टेट जीएसटी के कोल फील ग्रुप में छापेमारी के बाद 11.11 करोड़ रुपए टैक्स सरेंडर किया था। वहीं पिछली सरकार में उनके रायगढ़ के धरमजयगढ़ स्थित कोल डिपो में राज्य सरकार की खनिज और राजस्व विभाग की टीम द्वारा जांच की गई थी। इस दौरान कई खामियां पाए जाने पर तत्कालीन कलेक्टर द्वारा पेनाल्टी लगाई गई थी।
बताया जाता है कि फ्रेश कोयला लेकर वाशरी और डिपो में निम्न स्तर का कोयला मिलावट के बाद इसे प्लांटों में सप्लाई किया जाता है। इसके चलते कई गुना टैक्स चोरी करने की जानकारी मिली है। बताया जाता है कि फील ग्रुप द्वारा कोल डिपो, कोल वाशरी, रियल स्टेट के कारोबार के अलावा रायगढ़ के घरघोडा़ में कोल डीपो और स्टील प्लांट का संचालन किया जाता है।
आयकर विभाग को छापेमारी के दौरान कारोबारियों के सभी 25 ठिकानों में मौजूद स्टॉक, खरीदी-बिक्री, वाश कोल, कच्चा कोल, रिजेक्ट व रिफाइंड का बेहिसाब स्टॉक मिला है। इसी तरह कच्चा कोल, वाश कोल, रिजेक्ट व रिफाइंस कोल के इनपुट टैक्स में भारी अंतर मिला। कोल कारोबारी द्वारा खनिज विभाग के साइट पर दी गई स्टॉक व मौके पर डंप माल में गड़बडी़ मिली है। फिलहाल कारोबारियों के सभी ठिकानों पर जांच चल रही है। प्रापर्टी, निवेश, ज्वेलरी और कैश को जांच के दायरे में लिया गया है। इसके पूरा होने पर बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी की बात सामने आने के आसार है।