Fake Advertisement: सोशल मीडिया पर शिक्षक भर्ती को लेकर फर्जी विज्ञापन वायरल होने के बाद मामला दर्ज किया गया है। DPI ने स्पष्ट किया है कि 15 फरवरी से भर्ती नहीं, फिलहाल केवल प्रक्रिया चल रही है।
Fake Advertisement: लोक शिक्षण संचालनालय की ओर से शिक्षक भर्ती 2026 को लेकर तैयारी जारी है। विभाग में अभी भर्ती को लेकर ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है। वहीं भर्ती को लेकर लगातार मीटिंग का दौर भी जारी है। जबकि सोशल मीडिया में शिक्षक भर्ती विज्ञापन वायरल हो गया है और इसके लिए एफआईआर भी दर्ज हो गई है।
डीपीआई के अधिकारियों ने बताया कि जल्द ही भर्ती प्रक्रिया की नोटिफिकेशन जारी कर दी जाएगी। लगभग 5000 पदों को विषय और पद के अनुसार भी डिवाइड कर दिया गया है। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने बताया कि 15 फरवरी से भर्ती प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। जो कि चार माह में ही पूरी कर ली जाएगी। स्कूल शुरू होने से पहले 15 जून तक सारी प्रक्रिया पूरी करने की प्लानिंग है।
स्कूल शिक्षा विभाग में यह पहली बार नहीं है जब कोई डॉक्यूमेंट जारी होने से पहले वायरल हुआ है। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के प्रभार लेने के बाद उनका पहला आदेश भी जारी करने से पहले ही वायरल हो गया था। इसमें विभाग के कई अधिकारियों के ट्रांसफर की जानकारी थी। वायरल होने के बाद जब फाइनल लिस्ट सामने आई तो उसमें कुछ अधिकारियों के नाम ही हटे थे बाकि सभी वही थे।
शिक्षाविदों के अनुसार, शिक्षक भर्ती प्रक्रिया का लेकर अभी कई नियम बदले जाने है। क्योंकि इससे पहले आयोजित शिक्षक भर्ती 2023 में कोर्ट के आदेश के बाद काफी बदलाव हुए है। इन्हें राजपत्र में प्रकाशन किया जाएगा। उसके बाद ही प्रवेश प्रक्रिया शुरू होगी। डीपीआई के अधिकारियों के अनुसार, पूरी भर्ती प्रक्रिया व्यापम की ओर से आयोजित की जाएगी। अभी पूरी दस्तावेज तैयार कर व्यापम को ही दिया जाएगा।
Fake Advertisement: फर्जी निर्देश पत्र लोक शिक्षण संचालनालय से जुड़ी सहायक शिक्षक एवं व्याख्याता भर्ती परीक्षा 2026 को लेकर जारी किया गया था। इसकी जानकारी जब डीपीआई और व्यापम के अधिकारियों को मिली तब वह सतर्क हुए और युवाओं को फर्जीवाड़ा से बचाने के लिए तत्काल भाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराया।
शिकायत में स्पष्ट किया कि व्यापम या लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा शिक्षक भर्ती को लेकर इस तरह का कोई निर्देश पत्र जारी नहीं किया गया है। यह भी जानकारी दी है कि सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर वायरल दस्तावेज पूरी तरह फर्जी और भ्रामक है।