रायपुर

10 साल से चल रहा था फर्जी रॉयल्टी पर्ची का खेल, जांच में हो सकते हैं चौकाने वाले खुलासे

फर्जी रॉयल्टी से ठेकेदारों को क्लीयरेंस दिलाने के लिए बाबू ने कुछ दलालों से साठगांठ कर रखी थी

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Nov 24, 2018
ret mafia
10 साल से चल रहा था फर्जी रॉयल्टी पर्ची का खेल, जांच में हो सकते हैं चौकाने वाले खुलासे

रायपुर. फर्जी रॉयल्टी पर्ची छाप कर क्लीयरेंस लेने का खेल 2008 से चल रहा था। विभाग के बाबू की गिरफ्तारी के बाद बीते वर्षों में किया गया क्लीयरेंस जांच के दायरे में है। हालांकि अभी सिर्फ 2013 के एक मामले में ही आरोप सिद्ध हो सका है। जबकि पांच से अधिक कंपनियों के क्लीयरेंस जांच के दायरे में हैं।

सूत्रों के मुताबिक आरोपी वरिष्ठ अधिकारियों के नाक के नीच नकली रॉयल्टी पर्ची छाप कर शासन को चपत लगा रहा था। अहम बात यह है मामला खुलने के बाद भी विभाग ने अन्य कंपनियों के द्वारा जमा की गई रॉयल्टी पर्चियों जांच अब तक नहीं की है। जबकि शिकायत में 12 बड़ी कंपनियों के क्लीयरेंस की जांच करने की मांग की गई थी।

दलाल गिरफ्त से बाहर
बतादें कि फर्जी रॉयल्टी से ठेकेदारों को क्लीयरेंस दिलाने के लिए बाबू ने कुछ दलालों से साठगांठ कर रखी थी। जो ठेकेदार को सुविधा शुल्क देकर क्लीयरेंस दिलाने का खेल समझाते थे। वे दलाल अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। बताया जाता है। कि ये दलाल विभागीय कर्मचारी की तरह ही टिके रहते थे। रायपुर जिले में विगत 2008 से यह कारोबार धड़ल्ले से चल रहा था। जिले कई बड़ी ड्रीम प्रोजेक्ट जिसमे नया रायपुर परियोजना रायपुर से उड़ीसा फोरलेन बिलासपुर सिक्सलैन कमल विहार सहित शासकीय निर्माण की कई खरबों की निर्माण कार्य हुए है।

ऑडिट में आ सकता है बड़ा घोटाला सामने
बतादें कि मामले की शिकायत पूर्व जिला पंचायत सदस्य परमानंद जांगडे ने घोटाले से जुड़े दस्तावेज तत्कालीन कलक्टर ओपी चौधरी से की थी। 10 पैसे में एक पन्ना फर्जी रॉयल्टी पर्ची छापकर शासन को 3000 एक पन्ने में शासकीय कोष को चूना लगाया गया है। इस तरह 1000 करोड़ का पूरा घोटाला सामने आ सकता है। शासन स्तर पर किए गए क्लीयरेंस की जांच ऑडिट से बहुत बड़ा घोटाला सामने आने की बात कही जा रही है।

इन कंपनियों पर नजर
एलएनटी प्रोजेक्ट लिमिटेड
जेजे एसोसिएट्स
डएस कंस्ट्रक्सन लिमिटेड
कांप्टन ग्रीव्हज लिमि.
बीएसबीके प्रा. लिमिटेड
दिलिप बिल्डकॉन
जीएस एक्सपे्रश
डीबी प्रोजेक्ट
पिकेश शर्मा रायपुर
बीएससीपीए लिमिटेड
बार्बिक इंफ्रास्ट्रक्चर

राजद्रोह का मामला
बतादें कि शासन की मुद्रा की तरह ही रायल्टी बुक होती है। जिसकी प्रिंटग करना राजद्रोह की श्रेणी में आता है। राजद्रोह के मामले में लापरवाही बतादें कि रायल्टी बुक की नकली प्रिंटिग करना राजद्रोह की श्रेणी में आता है। ऐसे गंभीर अपराध के लिए विभाग की लापरवाही करना संलिप्तता की ओर इशारा कर रहा है।

रायुपर के कलक्टर डॉ.बसव एस राजु ने बताया कि मामले की जांच एक डिप्टी कलक्टर से करवाई जाएगी। अब तक जितने भी क्लीयरेंस किए गए हैं, उन सबकी पर्चियों का निरीक्षण करवाया जाएगा।

Published on:
24 Nov 2018 08:42 am