Chhattisgarh Fuel Saving Rules: साय सरकार ने बड़ी पहल करते हुए मंत्रियों और निगम मंडल के अध्यक्षों और सरकारी अफसरों को सीमित संख्या में वाहन के इस्तेमाल के निर्देश जारी किए है..
Chhattisgarh Fuel Saving Rules: छत्तीसगढ़ सरकार ने पेट्रोल डीजल के खर्चे को कम करने के लिए नई गाइडलाइन जारी किया है। इसके तहत मंत्रियों, निगम मंडल के अध्यक्षों और सरकारी कर्मचारियों को अब सीमित संख्या में वाहन के इस्तेमाल के निर्देश दिए है। बता दें कि ईंधन की कमी के चलते देश में हाहाकार मचा हुआ है। पीएम मोदी की अपील के बाद दिल्ली, उत्तरप्रदेश सहित कई राज्यों ने सरकारी वाहनों के खर्चे में कटौती कर दी हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी पीएम की अपील के बाद काफिले में वाहनों की संख्या को घटाया है।
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा वित्तीय संसाधनों के कुशल प्रबंधन और सार्वजनिक व्यय में अनुशासन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से वर्तमान में निम्नानुसार मितव्ययिता के उपायों को तत्काल प्रभाव से लागू करने का निर्णय लिया गया है।
छत्तीसगढ़ अफसरों की लग्जरी गाड़ी में किराए के रूप में 75 हजार रुपए महीने तक की दर तय है। एक रिपोर्ट के अनुसार यह दर हर माल 2000 किलोमीटर के लिए दी जाती है। छत्तीसगढ़ में करीब 58 विभाग है। इनमें से लगभग सभी विभागों में तीन से चार गाड़ी किराए पर दौड़ रही है। छत्तीसगढ़ में 2000 किलोमीटर पर सबसे कम मासिक किराए 54 हजार रुपए तय है।
ईंधन की बचत के लिए पत्रिका ने सवाल उठाया कि मंत्रियों ने अपने स्तर पहल की है लेकिन अभी तक प्रशासनिक मशीनरी अभी तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं। वहीं आज इस खबर का असर है। वित्त विभाग ने आदेश जारी कर सभी को ईंधन की बचत को कम करने के लिए इन 8 नियमों को पालन करने की अपील की है।
छत्तीसगढ़ में जितने विभाग, उतनी गाड़ी की परंपरा चली आ रही है। सूत्रों का दावा है कि मंत्रियों और वरिष्ठ आईएएस के पास जितने विभाग है, वो उनके लिए गाडि़यों की व्यवस्था करते हैं। उनका भुगतान संबंधित विभाग की ओर से किया जाता है। हालांकि इसमें कुछ अधिकारी सभी विभाग से गाड़ी नहीं लेते हैं। सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि एक मंत्री और अधिकारी के पास चार से पांच गाड़ी रहती है। ये काफिला से अलग होती है। इनका उपयोग अन्य लोगों के द्वारा किया जाता है।