
रायपुर@अजय रघुवंशी। Gen Z Entrepreneurs: प्रदेश के किसी नई बहुमंजिला इमारत की साइट पर खड़े हो जाइए। यहां सीमेंट की बोरियों के ढेर के बीच हाथ में टैबलेट थामे और आंखों में कुछ नया कर गुजरने की चमक लिए युवा नजर आएंगे। यह प्रदेश का वह नया चेहरा है, जहां कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री में अब जेन-जी का दबदबा दिखने लगा है। सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री हाथ में आते ही नौकरी की लंबी कतारों में लगने के बजाय ये युवा खुद की कंपनियां खड़ी कर रहे हैं।
कोई डिजाइन और थ्री-डी मॉडलिंग के जरिए ग्राहक को उनका आशियाना ईंटें जुड़ने से पहले ही जीवंत दिखा रहा है, तो कोई नींव से लेकर आर्किटेक्ट तक की जिम्मेदारी एक ही छत के नीचे उठाने को तैयार है। रायपुर में रियल एस्टेट की बढ़ती बयार के बीच ये युवा इंजीनियर अपने टेक्निकल ज्ञान को सीधे बिजनेस में बदल रहे हैं। अब उनका फोकस पुराने ढर्रे की ठेकेदारी तक सीमित नहीं, बल्कि स्मार्ट डिजाइन, डिजिटल मार्केटिंग और ग्राहकों को बेहतरीन अनुभव देने पर है।
बीते वर्ष रायपुर में 3880 करोड़ रुपए की संपत्तियों की खरीद-बिक्री दर्ज की गई, जिससे पंजीयन विभाग को 388 करोड़ का राजस्व मिला। पूरे प्रदेश में सालाना रियल एस्टेट कारोबार 10000 करोड़ से अधिक का है। इंटीरियर सेक्टर में लोग घर की लागत से ज्यादा खर्च कर रहे हैं। 50 लाख के घर में 60 लाख से ज्यादा का आर्किटेक्ट होने लगा है और राजधानी में हर साल इंटीरियर उत्पादों का कारोबार 3000 करोड़ से अधिक का है।
केस-1: राजधानी के 28 वर्षीय नम्रता नायक ने 2022 से इंटीरियर फर्म की शुरुआत की। आईआईटी भिलाई में साइड आर्किटेक्ट के रूप में काम कर चुकी नम्रता सेल के ऑफिस समेत कई निजी प्रोजेक्ट संभाल रही हैं। उनका कहना है कि रायपुर एक ग्रोइंग सिटी है और यहां काफी संभावनाएं हैं।
केस-2: चैतन्य बिजनेस पार्क स्थित कंपनी के प्रोप्राइटर आकाश पटेल ने 1 जनवरी 2026 से खुद की कंस्ट्रक्शन कंपनी शुरू की है। उनका कहना है कि अब ईंटों और स्लैब की ढलाई आधुनिक तकनीक से एक साथ होती है, जिससे 3 से 4 महीने की बचत होती है। जो घर 12 महीने में बनते थे, वे अब 7 से 8 महीने में तैयार हो रहे हैं।
केस-3: सिविल लाइन निवासी वास्तु पारख गुप्ता पिछले 9 वर्षों से इंटीरियर डिजाइनिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं। एक क्लब हाउस के लिए वह 60 हजार वर्गफीट के प्रोजेक्ट पर काम कर रही हैं। उनका कहना है कि अपना काम कॉन्फिडेंस देने के साथ ओनरशिप का अनुभव कराता है, जिससे वर्कर की कार्यशैली को भी बेहतर ढंग से समझा जा सकता है।
केस-4: प्रतीक अग्रवाल ने 2022 से अपनी कंस्ट्रक्शन कंपनी की शुरुआत कर दी है। उनकी टीम में कई सिविल इंजीनियरर्स है। उनका कहना है बाजार में कई ऐसे यूथ प्रोफेशनल्स और आर्किटेक्ट हैं, जो कि काफी अच्छा काम कर रहे हैं। वहीं कई नए लोग भी आ रहे हैं, जिन्हें अनुभव कम है,जिसकी वजह से क्लाइंट को बाद में परेशानी होती है। इसलिए अनुभव भी जरूरी है।
कार्यशैली: पुराने ठेकेदार बिना ड्राइंग और एस्टीमेट के काम करते थे, जिससे लागत 30 प्रतिशत तक बढ़ जाती थी। इसके विपरीत, जेन-जी स्टार्टअप्स ऑटो कैड, रेविट और बीआईएम सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रहे हैं और फिक्स रेट व 6 महीने की टाइमलाइन का लिखित बॉन्ड दे रहे हैं।
टेक्नोलॉजी इंटीग्रेशन: साइट्स पर ड्रोन वीडियोग्राफी आम हो गई है। मोबाइल ऐप के जरिए मकान मालिक को लेबर और सीमेंट की प्रगति का लाइव अपडेट घर बैठे मिल जाता है।