इधर किसानों में बीमा कंपनी के खिलाफ आक्रोश पैदा हो गया है।
रायपुर. छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले के किसानों के साथ बीमा कंपनी ने गंदा मजाक किया है। किसान फसलों के नुकसान पर बीमा राशि से उसकी भरपाई हो सके इसके लिए ही समय पर बीमा कराया जाता है। बीमा के बाद किसानों को राशि भी मिल गई, लेकिन किसानों की फसलों का ऐसा आंकलन किया कि किसी को 30 तो किसी को 40 रुपए बांटे गए। इस तरह से देखा जाए तो किसानों के साथ बेहद ही बुरा मजाक बीमा कंपनी ने किया है। इधर किसानों में बीमा कंपनी के खिलाफ आक्रोश पैदा हो गया है।
हर तरह से सबसे अधिक किसान ही ठगा जाता है। चाहे वह फसल बीमा में ही क्यों न हो। बीते खरीफ वर्ष में 65 हजार 188 किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा कराया। ओला वृष्टि, आंधी तूफान और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से हजारों किसानों की फसल बर्बाद हो गए। इसमें से 20 हजार 264 किसानों के क्लेम किया। इसमें किसानों को 34 करोड़ 53 लाख रुपए बीमा राशि मिला। लेकिन इसमें 227 किसान ऐसे हैं जिन्हें फसल नुकसान के एवज में 50 रुपए से भी कम राशि दी गई। यह राशि किसी भी सूरत में बीमा क्लेम नहीं है। इससे किसान खुद का ठगा महसूस कर रहे हैं।
लोहारा क्षेत्र के किसान सबसे अधिक मायूस
फसल बीमा के तहत 50 रुपए से भी कम राशि किसानों को दी गई, उसमें लोहारा तहसील के सबसे अधिक है। कुल 227 में 216 किसान केवल लोहारा तहसील से है। वहीं कवर्धा तहसील में 8 और पंडरिया तहसील से 3 किसान को 50 रुपए से भी कम राशि मिली है। जबकि बोड़ला तहसील किसी किसान को 50 रुपए से कम राशि नहीं मिली।
7234.94 लाख जमा
प्रति हेक्टेयर ऋणी किसान के लिए 740 और अऋणी किसानों का 640 रुपए प्रीमियम पर जिले में पिछले वर्ष कुल 65 हजार 188 किसनों ने फसलों को बीमा कराया। इसमें जिले से कुल 72343.94 लाख रुपए प्रीमियम कृषक अंश जमा किए गए।
मुआवजे का पैमाना
बीमा कंपनी प्रत्येक खेत का निरीक्षण करते हैं। फसल कटाई के समय नुकसान का परीक्षण करते हैं। पिछले पांच साल और वर्तमान के फसल उत्पादन का औसत निकाला जाता है। इस तरह बीमा क्लेम नुकसान के प्रतिशत के आधार पर ही दिया जाता है। यदि पिछले चार साल तक बेहतर फसल उत्पादन हुआ है तो मुआवजा न के समान ही मिलेगा।
इसलिए भी किसानों को कम मुआवजा
बीमा राशि कम मिलने का मुख्य कारण किसानों की कम भूमि को माना जाता है। जिले में करीब पांच हजार किसान हैं जिनकी भूमि एक एड़क भी नहंी है। कम भूमि पर कम फसल, कम उत्पादन, जिसे आधार पर मानकार ही बीमा क्लेम राशि कम मिलता है।
बीमा कंपनी निर्धारित नियम के तहत बीमा राशि का आंकलन करती है। पांच वर्ष के सर्वे के आधार पर बीमा तैयार होता है। जिन किसानों को कम राशि मिला है उनका जमीन भी कम था।
एनएल पांडे, वरिष्ठ कृषि अधिकारी, कृषि विभाग, कबीरधाम