Chhattisgarh News : रायपुर. राष्ट्रीय पशु बाघ के संरक्षण व सुरक्षा के लिए केन्द्र से लेकर राज्य सरकार करोड़ों रुपए खर्च करती है।
Chhattisgarh News : रायपुर. राष्ट्रीय पशु बाघ के संरक्षण व सुरक्षा के लिए केन्द्र से लेकर राज्य सरकार करोड़ों रुपए खर्च करती है। इसके बावजूद बाघ के अंगों की तस्करी की खबरें आती रहती हैं। वर्तमान में प्रदेश की बात करें तो बाघ की संख्या एक बार फिर बढऩे के संकेत मिले हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार 2014 में राज्य में 46 बाघ हुआ करते थे। वहीं 2018 की रिपोर्ट ने अनुसार इनकी संख्या 19 रह गई। वहीं, केंद्र सरकार की ओर से जारी होने वाली रिपोर्ट में प्रदेश में बाघों की संख्या में वृद्धि का अनुमान लगाया जा रहा है।
रेडियों कॉलर से निगरानी
सूरजपुर से रेस्क्यू की गई बाघिन को जंगल सफारी में इलाज के बाद 30 जूून को अचानकमार टाइगर रिजर्व (एटीआर) में छोड़ दिया गया है। एपीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ कौशलेन्द्र कुमार व जंगल सफारी प्रबंधक एम मर्सीबेला की निगरानी में बाघिन का उपचार किया गया था। कौशलेन्द्र कुमार ने बताया कि अब वह बाघिन एटीआर के छपरवा रेंज के जंगल में है। रेडियो कॉलर के जरिए उस पर नजर रख रहे हैं।
अचानकमार व बारनवापारा के लिए प्रस्ताव
बाघों की संख्या की बढऩे के लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकार अचानकमार व बारनवापारा के गांवों को खाली करने का प्लान बनाया। इसके तहत गावों को शिफ्ट किया जाना है। फिलहाल गांवों को बसाने के लिए प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है।
इंद्रावती टाइगर रिजर्व
2014 - 12
2018 - 3
उदंती-सीतानदी रिजर्व
2014 - 4
2018 - 1
अचानकमार रिजर्व
2014 - 12
2018 - 5