टेंडर में ऐसी शर्त कि राज्य की कोई फर्म पूरा नहीं कर सकती, अनुभव की शर्त पर राज्य में एक भी फर्म नहीं उतर रही खरा
जितेंद्र दहिया@रायपुर . प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में लैब संचालन का काम करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने 20 करोड़ रुपए का टेंडर जारी कर दिया है। योजना में अस्पतालों में अत्याधुनिक मशीनों के साथ उन्हें चलाने वाले तकनीशियन के लिए प्रक्रिया शुरू किया। यह टेंडर प्रक्रिया भी विवादों में आ गई है। शर्त एेसी है, जिन्हें राज्य की कोई भी फर्म पूरा नहीं कर पा रही है।
३ अगस्त से ३ सितंबर के बीच निविदा भरने के लिए समय दिया गया है। स्वास्थ्य संचालनालय द्वारा सभी जिलों के लिए एक साथ टेंडर निकाला गया है। इसमें शर्तें एेसी हैं कि देश भर में गिनी-चुनी कंपनियां ही है इसे पूरा कर पाएंगी। कंपनी का टर्नओवर ५ करोड़ होना चाहिए। कंपनी की सरकारी अस्पतालों में ३ साल में काम करने का अनुभव किसी के भी पास नहीं है। प्रदेश में पचपेड़ीनाका स्थित एक लैब के अलावा किसी के भी पास एनएबीएल से मान्यता प्राप्त नहीं है।
अस्पतालों में मलेरिया, टीबी और सिकलसेल जैसी बीमारियों के सही इलाज के लिए जांच की अच्छी सुविधाएं और तकनीकी कौशल मुहैया कराना प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य है। नेशनल क्वॉलिटी एश्योरेंस स्टेंडर्ड के मानकों के अनुसार जिलों के सरकारी अस्पतालों में पैथोलॉजी सुविधाएं तैयार की जा रही हैं। अधिकारियों का दावा है कि राज्य के हर स्वास्थ्य केंद्र में इस तरह के लैब स्थापित करने से लोगों को जांच रिपोर्ट सही मिलेगी और मरीज का उपचार सही दिशा में होगा।
जीवीके को पूरे प्रदेश में 108 और 102 के संचालन का टेंडर शासन द्वारा दिया गया है। इस वजह से जीवीके कर्मियों की हड़ताल के बाद पूरे प्रदेश में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई थी। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग ने एेसे नियम व शर्तें तैयार की है, जिसे बड़ी कंपनियां भी पूरा कर पाएंगी। पूरे प्रदेश के लिए टेंडर एक ही कंपनी को दिया जाएगा। अन्य कंपनियां नियमों को पूरा नहीं कर पाने के लिए खुद ब खुद बाहर हो जाएंगी। एेसे में यदि जीवीके के कर्मचारियों की तरह टेंडर पाने वाली कंपनी के कर्मचारी भी कभी हड़ताल में गए तो पूरे प्रदेश की सेवाएं एक साथ प्रभावित हो जाएगीं।
सिविल अस्पताल 19
गौरतलब है कि पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश में इसी तरह के लैब के लिए कुछ माह पहले टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। वहां पर सभी जिलों में अलग-अलग टेंडर निकाला गया। जिससे सेवाएं संचालन को किसी तरह की तकलीफ न हो। छत्तीसगढ़ का स्वास्थ्य विभाग मनमानी करते हुए एक साथ टेंडर प्रक्रिया कर रहा है। जिलास्तर पर टेंडर जारी न कर स्वास्थ्य विभाग सवालों के घेरे में आ गया है। शर्तें भी इतनी कठोर है कि दूसरी कंपनियां चाहते हुए भी इसमें फिट नहीं बैठ सकतीं।
एक साथ काम दे दिया, जिले वाइज
स्वास्थ्य सेवाएं के संचालक आर. प्रसन्ना ने बताया कि टेंडर की शर्तों के संबंध में अनेक शिकायतें मिल रही हैं, लेकिन विभाग चाहता है कि अच्छी लैब से गुणवत्तापूर्ण जांच रिपोर्ट मिले और लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध हो सके।