
विनोद जैन/Land Transfer Fraud: ग्राम कुर्रा की विवादित जमीन के मामले में अब नया मोड़ सामने आया है। करोड़ों रुपये कीमत की बताई जा रही जमीन के हस्तांतरण, कथित कूटरचना और धोखाधड़ी के मामले में पुलिस ने तहसील कार्यालय को आवेदन वापस भेजकर स्पष्ट जांच प्रतिवेदन मांगा है। पुलिस ने तहसील कार्यालय से साफ तौर पर पूछा है कि प्रथम सूचना रिपोर्ट यानी FIR आखिर किस व्यक्ति के खिलाफ दर्ज की जानी है। मामले में पहले यह चर्चा थी कि पुलिस ने तहसील कार्यालय से आया आवेदन वापस कर दिया है। हालांकि अब सामने आए पुलिस पत्र से स्थिति स्पष्ट हो गई है। गोबरा नवापारा थाना प्रभारी जितेंद्र दुबे ने 4 अक्टूबर 2026 को नायब तहसीलदार लवण मंडन को पत्र भेजकर जरूरी दस्तावेज और स्पष्ट जांच प्रतिवेदन उपलब्ध कराने को कहा है।
थाना प्रभारी की ओर से भेजे गए पत्र में बताया गया है कि अनुविभागीय अधिकारी राजस्व अभनपुर के पत्र के माध्यम से ग्राम कुर्रा की जमीन से संबंधित शिकायत और दस्तावेज पुलिस को प्राप्त हुए थे। अभिलेखों के अवलोकन के बाद मामले में गंभीर कमियां और विसंगतियां पाए जाने की बात भी सामने आई। राजस्व विभाग की ओर से संबंधित दोषी व्यक्तियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का उल्लेख किया गया था। लेकिन पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि FIR किस व्यक्ति या किन व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज की जाए। इसी वजह से पुलिस ने तहसील कार्यालय से स्पष्ट जांच प्रतिवेदन मांगा है। साथ ही संबंधित दस्तावेज भी उपलब्ध कराने को कहा गया है, ताकि मामले में कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे कार्रवाई की जा सके।
पुलिस के पत्र के अनुसार संबंधित जमीन को लेकर कथित हस्तांतरण, कूटरचना, धोखाधड़ी और सक्षम अनुमति के अभाव में कार्रवाई किए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में पुलिस अब यह स्पष्ट करना चाहती है कि पूरे मामले में राजस्व जांच के अनुसार वास्तविक दोषी कौन है। यही वजह है कि आवेदन सीधे तौर पर खारिज करने के बजाय पुलिस ने उसे तहसील कार्यालय को वापस भेजकर जरूरी जानकारी और दस्तावेज मांगे हैं।
इस मामले में नायब तहसीलदार लवण मंडन ने पहले बताया था कि 18 सितंबर को गोबरा नवापारा थाना पुलिस को आवेदन भेजा गया था। 22 सितंबर को थाने से आवेदन प्राप्त होने की रिसीविंग भी तहसील कार्यालय को मिल गई थी। इसके बाद आवेदन को लेकर तरह-तरह की चर्चा शुरू हो गई थी। अब 4 अक्टूबर को थाना प्रभारी की ओर से भेजे गए पत्र के सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि पुलिस ने आवेदन को वापस लेने के बजाय मामले में कार्रवाई के लिए अतिरिक्त जानकारी मांगी है।
ग्राम कुर्रा की विवादित जमीन की मौजूदा कीमत करोड़ों रुपये बताई जा रही है। जमीन के पुराने रिकॉर्ड, उसके हस्तांतरण और कथित दस्तावेजी गड़बड़ी को लेकर मामला पहले से ही गंभीर बना हुआ है। ऐसे में पुलिस की ओर से तहसील कार्यालय से मांगा गया स्पष्ट जांच प्रतिवेदन महत्वपूर्ण माना जा रहा है। क्योंकि राजस्व विभाग की जांच में किसे दोषी माना गया है, यह स्पष्ट होने के बाद ही पुलिस FIR में संबंधित व्यक्तियों को आरोपी बना सकेगी।
फिलहाल पूरे मामले में पुलिस की अगली कार्रवाई तहसील कार्यालय से मिलने वाले जवाब और दस्तावेजों पर निर्भर है। पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि विधि सम्मत कार्रवाई के लिए यह जानकारी जरूरी है कि FIR किस व्यक्ति के खिलाफ दर्ज की जानी है। अब देखना होगा कि तहसील कार्यालय की ओर से पुलिस को क्या जांच प्रतिवेदन दिया जाता है और उसमें जमीन के कथित हस्तांतरण, कूटरचना और धोखाधड़ी के लिए किन लोगों को जिम्मेदार बताया जाता है। इसके बाद ही करोड़ों की इस विवादित जमीन के मामले में FIR और आगे की कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ होगा।