रायपुर

बंदूक छोड़ शांति की राह, पुनर्वास केंद्र बीजापुर से नवा रायपुर पहुंचे पूर्व नक्सली, संग्रहालय का किया भ्रमण

CG News हिंसा का रास्ता छोडक़र सामान्य जीवन में लौटना ही सच्चा सुकून देता है। वीर नारायण के जीवन से उन्हें यह प्रेरणा मिली कि अभावों में भी संघर्ष कर समाज और देश के लिए सकारात्मक योगदान दिया जा सकता है।

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Mar 07, 2026

CG News: नवा रायपुर स्थित शहीद वीर नारायण संग्रहालय का भ्रमण बीजापुर पुनर्वास केंद्र से आए पूर्व नक्सलियों के लिए एक नया अनुभव साबित हुआ। संग्रहालय में रखे मॉडल्स और प्रदर्शनों के माध्यम से उन्होंने वीर नारायण सिंह के साहस, संघर्ष और बलिदान की गाथा को करीब से जाना। पत्रिका से अनुभव साझा करते हुए कहा कि हिंसा का रास्ता छोडक़र सामान्य जीवन में लौटना ही सच्चा सुकून देता है। वीर नारायण के जीवन से उन्हें यह प्रेरणा मिली कि अभावों में भी संघर्ष कर समाज और देश के लिए सकारात्मक योगदान दिया जा सकता है।

उस दुनिया से लाख गुना बेहतर यह जीवन

प्रकाश (बदला हुआ नाम) ने बताया कि मैं करीब 10 साल तक संगठन में सक्रिय रहा। अब महसूस होता है कि बंदूक की दुनिया से लाख गुना बेहतर यह सामान्य जीवन है। संग्रहालय में मॉडल्स के जरिए वीर नारायण के जीवन के बारे में जानकर बहुत प्रेरणा मिली। उनके संघर्ष से यह सीख मिलती है कि कठिन परिस्थितियों में भी सही रास्ता चुना जा सकता है।

हिंसा का रास्ता छोड़ मिला सुकून

निलिमा (बदला हुआ नाम) ने कहा कि मैं 8 साल तक संगठन से जुड़ी रही। अब लगता है जैसे हम स्वर्ग छोडक़र नर्क में रह रहे थे। हिंसा का रास्ता बहुत बुरा होता है। सामान्य जीवन में लौटकर सुकून मिला है। संग्रहालय में वीर नारायण के बारे में विस्तृत जानकारी मिली और अपने पूर्वजों के बलिदान पर गर्व महसूस हुआ। यह जिंदगी बहुत प्यारी है।

वीर नारायण से मिली साहस की प्रेरणा

आशीष (बदला हुआ नाम) ने कहा कि इतने साल संगठन में रहकर सिर्फ नफरत ही सीखने को मिली। संगठन छोडऩे के बाद अब राहत महसूस कर रहा हूं। शहीद वीर नारायण की कहानी सिखाती है कि अभावों में रहते हुए भी बड़ा लक्ष्य हासिल किया जा सकता है और सही रास्ते पर चलकर समाज के लिए काम किया जा सकता है।

Published on:
07 Mar 2026 12:47 pm
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