रायपुर

15 साल के बालक के फेफड़े की सर्जरी, रायपुर में सबसे कम उम्र के मरीज का सफल ऑपरेशन

Raipur News: एसीआई के कार्डियो थोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी विभाग में 20 दिन में 9, दो माह में 13 लोबेक्टॉमी सर्जरी की है। वहीं 15 साल के बालक के फेफड़े की सर्जरी, अब तक का यह सबसे कम उम्र का मरीज है..
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Aug 11, 2026
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सफल ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों की टीम ( Photo - Patrika )

Chhattisgarh News: पीलूराम साहू की रिपोर्ट. पं. जवाहरलाल नेहरू मेडकल कॉलेज के एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट (एसीआई) के कार्डियाे थोरेसिक एंड वैस्कुलर (सीटीवीएस) विभाग में 15 साल के बालक के फेफड़े की सर्जरी की गई। अब तक यह सबसे कम उम्र का मरीज है। पिछले 20 दिनों में 9 तथा दो माह में 13 लोबेक्टॉमी सर्जरी की गई, जो एक रिकार्ड है। 70 साल के बुजुर्ग का भी ऑपरेशन किया गया।

Raipur News: फेफड़े के संक्रमित हिस्से को निकाला

लोबेक्टॉमी सर्जरी में फेफड़े के संक्रमित हिस्से को निकाल दिया जाता है। सीटीवीएस विभाग के एचओडी डॉ. कृष्णकांत साहू ने बताया कि दो मरीजों की इमरजेंसी सर्जरी की गई। इन्हें खांसी के साथ अत्यधिक रक्तस्राव (हेमोप्टाइसिस) हो रहा था। आधुनिक तकनीक व एडवांस्ड लंग स्टेपलर की सहायता से ऑपरेशन किया गया। प्रदेश में फेफड़ों की सर्जरी के क्षेत्र में एसीआई अग्रणी अस्पताल बन गया है।

एडवांस तकनीक से सर्जरी

यह सर्जरी सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर करते हैं। एडवांस तकनीक से सर्जरी का फायदा ये होता है कि कांप्लीकेशन जैसे कि ब्रोन्कोप्लूरल फिस्टुला बनने की संभावना बहुत ही कम हो जाती है। डॉक्टरों का दावा है कि किसी भी प्राइवेट अस्पताल की तुलना में इतने कम समय में इतना ज्यादा लोबेक्टॉमी सर्जरी कहीं नहीं हुई है। वैस्कुलर मालफॉर्मेशन एवं लंग एब्सिस में फेफड़े में बड़ा कैविटी बन जाने से खांसी में खून आने का सबसे बड़ा कारण है।

फेफड़े में बीमारी के लिए फंगस जिम्मेदार

प्रदेश में लोबेक्टॉमी (फेफड़े की) सर्जरी का प्रमुख कारण फेफड़े में एस्परजिलोमा व ब्रोन्किएक्टैसिस है। यह एस्परजिलोमा एक फंगस एस्परजिलस नाइजर से होता है। यह इंफेक्शन फेफड़े के टीबी वाले मरीजों या ऐसे मरीजों को होता है, जिनकी इम्यूनिटी बहुत ही कम हो जाती है। एस्परजिलोमा सामान्यतः दाएं फेफड़े के ऊपरी लोब (भाग) में सबसे अधिक होता है, क्योंकि यहां पर टीबी के बैक्टीरिया एवं एस्परजिलोमा के फंगस को बहुत ही अच्छा वातावरण मिलता है। ब्रोन्किएक्टैसिस भी फेफड़े के टीबी संक्रमण के बाद होने वाली सबसे सामान्य बीमारी है। इसमें फेफड़े के अंदर छोटे-छोटे कैविटी (गुहा) बन जाती हैं एवं इसमें संक्रमण होने के बाद मरीजों को खांसी के समय खून निकलता है।

समय पर ऑपरेशन से कैंसर का रिस्क कम

वैस्कुलर मालफॉर्मेशन एवं फेफड़े का कैंसर भी थूक या बलगम में खून आने का सबसे बड़ा कारण है। ऐसी स्थिति जिसमें फेफड़े का कैंसर अपनी प्रारंभिक अवस्था में हो तो लोबेक्टॉमी ऑपरेशन से कैंसर से पूर्णतः निजात पाया जा सकता है। सीटीवीएस विभाग में फेफड़े का डिकॉर्टिकेशन सर्जरी, लोबेक्टॉमी, सेगमेंटेक्टॉमी व न्यूमोनेक्टॉमी,जिसमें एक तरफ के दाएं या बाएं फेफड़े को पूर्णतः निकाल दिया जाता है। साल में 15 से 20 लोबेक्टॉमी सर्जरी होती है। यही नहीं यहां पर फेफड़े की सर्जरी कराने के लिए सिर्फ प्रदेश से ही नहीं, बल्कि अन्य पड़ोसी राज्यों जैसे बिहार, झारखंड, ओडिशा, मध्यप्रदेश व उत्तरप्रदेश के भी मरीज आते हैं।

Updated on:
11 Aug 2026 10:07 am
Published on:
11 Aug 2026 10:07 am