BSc Nursing Seats Controversy: रायपुर प्रदेश के उन निजी कॉलेजों में पढ़े छात्राओं को दूसरे राज्यों में नौकरी नहीं मिल रही है, जिन्हें इंडियन नर्सिंग काउंसिल (आईएनसी) से मान्यता नहीं है।
BSc Nursing Seats Controversy: छत्तीसगढ़ के रायपुर प्रदेश के उन निजी कॉलेजों में पढ़े छात्राओं को दूसरे राज्यों में नौकरी नहीं मिल रही है, जिन्हें इंडियन नर्सिंग काउंसिल (आईएनसी) से मान्यता नहीं है। इससे छात्राओं की समस्या बढ़ गई है। प्रदेश में बीएससी नर्सिंग की 7751 से ज्यादा सीटें हैं, जिनमें महज 4460 सीटों को आईएनसी से मान्यता है।
अधिकारियों के अनुसार 40 से ज्यादा ऐसे निजी कॉलेज हैं, जिन्हें आईएनसी से मान्यता नहीं है, लेकिन संचालन लंबे समय से चल रहा है। इस कारण लगातार विवाद भी हो रहा है। जिन कॉलेजों को केवल छत्तीसगढ़ नर्सिंग काउंसिल से मान्यता है, उस पर विवाद की स्थिति बनी हुई है।
आईएनसी ने देशभर में एक आदेश में कहा था कि जिन सरकारी व निजी कॉलेजों को मान्यता नहीं है, वे दिल्ली से मान्यता ले लें। पिछले साल पं. दीनदयाल उपाध्याय हैल्थ साइंस एंड आयुष विवि ने भी सभी कॉलेजों को पत्र लिखकर आईएनसी से उपयुक्तता प्रमाणपत्र लेने को कहा था। नहीं लेने पर इन कॉलेजों को एफिलिएशन देने से भी इनकार कर दिया था। हालांकि सभी कॉलेजों को एफिलिएशन दे दिया था।
जनवरी 2024 में आईएनसी ने चिकित्सा शिक्षा विभाग से पूछा था कि सरकारी व निजी नर्सिंग कॉलेजों में कितनी सीटों को आईएनसी व स्टेट नर्सिंग काउंसिल (एसएनसी) से मान्यता मिली है। आईएनसी ने सेक्शन 13 व 14 के अनुसार नर्सिंग कॉलेजों में कितनी सीट उपलब्ध है और कितनी खाली है, की जानकारी भी मंगाई थी। आईएनसी नई दिल्ली की वेबसाइट के अनुसार छत्तीसगढ़ में बीएससी की सीटें कुल सीटों की तुलना में कम है। इस कारण इस पर सवाल उठ रहे हैं।
जानकारों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के एक निर्णय के बाद नर्सिंग कॉलेजों को मान्यता व सीटों की बढ़ोत्तरी स्टेट नर्सिंग काउंसिल करती है। हालांकि अब यह स्पष्ट हो गया है कि इसके लिए आईएनसी की मान्यता भी जरूरी है। इसलिए छत्तीसगढ़ के अलावा दूसरे राज्यों में नौकरी करने के लिए कॉलेजों को मान्यता लेना अनिवार्य है।
ऐसे जो भी छात्र जिन्होंने लाखों रुपए देकर निजी कॉलेजों में एडमिशन लिया है, बिना मान्यता वाली सीटों में पढ़ाई करने से परेशानी बढ़ती जा रही है। एक जानकारी के अनुसार प्रदेश में 25 के आसपास ऐसे निजी कॉलेज हैं, जिनके पास स्वयं का भवन नहीं है। लैब भी नहीं है और पर्याप्त फैकल्टी नहीं है। 5 साल में प्रदेश में 40 से ज्यादा निजी कॉलेज खुले हैं।
प्रदेश में 10 परसेंटाइल से एडमिशन देने के बावजूद बीएससी नर्सिंग की 2329 सीटें लैप्स हो गई हैं। इस साल 5422 सीटों पर ही प्रवेश हुआ है। जबकि कुल सीटें 7751 हैं। एडमिशन की आखिरी तारीख 31 दिसंबर थी। आईएनसी ने बीएससी नर्सिंग में जीरो परसेंटाइल से प्रवेश की अनुमति देने से इनकार कर दिया था।
राज्य शासन ने खाली सीटों को देखते हुए इंट्रेंस एग्जाम में 10 परसेंटाइल अंक लाने वालों को प्रवेश की अनुमति दी थी। इसके बाद भी 30 फीसदी सीटें लैप्स हो गईं। चार राउंड के बाद प्रदेश में 57 फीसदी सीटें खाली थीं, जिसे 10 परसेंटाइल से भरने की अनुमति दी गई। इसमें केवल 37 फीसदी सीटें ही पैक हो पाई। आईएनसी ने प्रवेश की आखिरी तारीख 30 नवंबर से बढ़ा दी थी।