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फर्जी ई-चालान से अलर्ट! RTO के बाद अब कोर्ट के नाम पर ई-चालान ठगी का जाल, तीन महीनों में बढ़े मामले…

Fake e-Challan Alert: अगर आपके मोबाइल पर हाईकोर्ट के नाम से ई-चालान का मैसेज आए तो उस पर क्लिक करने के पहले ऑफिशियल वेबसाइट से इसकी जांच कर लें।
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रायपुर

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Shradha Jaiswal

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Updated: 17 Feb 2026, 2:08 PM IST

फर्जी ई-चालान से अलर्ट! RTO के बाद अब कोर्ट के नाम पर ई-चालान ठगी का जाल, तीन महीनों में बढ़े मामले...(photo-patrika)

फर्जी ई-चालान से अलर्ट! RTO के बाद अब कोर्ट के नाम पर ई-चालान ठगी का जाल, तीन महीनों में बढ़े मामले...(photo-patrika)

Fake e-Challan Alert: अगर आपके मोबाइल पर हाईकोर्ट के नाम से ई-चालान का मैसेज आए तो उस पर क्लिक करने के पहले ऑफिशियल वेबसाइट से इसकी जांच कर लें। हो सके तो आरटीओ के अधिकारी से इसकी जानकारी ले लें। हो सकता है यह साइबर ठगों की ओर से भेजा गया मैसेज हो। दरअसल, आरटीओ के बाद अब साइबर ठग कोर्ट का नाम लेकर फर्जी ई-चालान भेज रहे हैं।

Fake e-Challan Alert: फर्जी चालान से रहें सावधान

राजधानी में बीते तीन महीनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां लोगों को मैसेज और ङ्क्षलक भेजकर पैसे ऐंठे जा रहे हैं। झांसे में आकर कई लोग लाखों रुपए गंवा चुके हैं। ठग गाड़ी नंबर, आधार से जुड़ी जानकारी, वाहन मालिक का नाम और यहां तक कि चेचिस नंबर का इस्तेमाल कर लोगों को भरोसे में लेते हैं।

ठगी के बढ़ते मामलों को देखते हुए परिवहन और यातायात विभाग ने अलर्ट जारी कर लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। प्रदेशभर में तीन-चार महीनों के भीतर इस तरह की ठगी के 300 से ज्यादा मामले आ चुके हैं।

परिवहन से ई-चालान आता है, लेकिन पहले पुष्टि करें

परिवहन व यातायात विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यातायात विभाग के नियमों के उल्लंघन पर विभाग की ओर से ई-चालान जारी होते हैं, लेकिन वाहन चालकों को ङ्क्षलक के डोमेन की जांच करने के साथ नजदीकी यातायात थाने में इसकी पुष्टि जरूर करनी चाहिए। सत्यापन के बाद ही जुर्माने की राशि जमा करें। किसी भी अनजान फाइल या ङ्क्षलक को खोलने से पहले सावधानी बरतें।

यह सावधानी बरतें

  1. ई-चालान ङ्क्षलक पर क्लिक करने से पहले डोमेन जरूर पढ़ें।
  2. क्यूआर कोड या एपीके फाइल को लेकर अधिकृत जानकारी लें।
  3. संदिग्ध एपीके फाइल को तुरंत डिलीट कर दें।

केस-1 : राजस्थान से अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश

राजधानी पुलिस ने चार दिन पहले अंतरराज्यीय साइबर गिरोह के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी आरटीओ चालान के नाम से फर्जी एसएमएस भेजकर पहले लोगों के मोबाइल हैक करते थे, फिर खातों से रकम ट्रांसफर कर लेते थे। राजस्थान निवासी पृथ्वी कुमार बिश्नोई और नरङ्क्षसह को पुलिस ने गिरफ्तार किया। इससे पहले उन्होंने विधानसभा क्षेत्र निवासी धर्मेंद्र ङ्क्षसह के खाते से 4.52 लाख रुपए पार किए थे।

केस-2 : गाड़ी कहीं और चालान कहीं और से

साइबर ठगों का तरीका ऐसा है कि गाड़ी की लोकेशन अलग होती है और चालान किसी अन्य स्थान के नाम से भेजा जाता है। पंडरी निवासी डॉली वर्मा ने आरटीओ में शिकायत दर्ज कराई कि उनकी गाड़ी भाटापारा में थी, लेकिन तरपोंगी बैरियर के नाम से मोबाइल पर ई-चालान प्राप्त हुआ। इससे फर्जीवाड़े का अंदेशा हुआ।

सीधी बात

  • ई-परिवहन चालान के नाम पर फर्जीवाड़े के मामले बढ़ रहे हैं, लोग क्या करें?

सबसे पहले यातायात नियमों का पालन करें। यदि ई-चालान आता है तो नजदीकी ट्रैफिक थाने में जाकर उसकी तस्दीक जरूर करें।

  • फर्जी चालान को किस प्रकार रोका जा सकता है?

थाने में जाकर पुष्टि करना ही सबसे कारगर तरीका है। परिवहन विभाग से जारी आधिकारिक ई-चालान में समन शुल्क जमा करने के लिए पर्याप्त समय मिलता है। किसी भी भुगतान से पहले चालान को ध्यान से पढ़ें और सत्यापित करें।

  • क्या सीसीटीवी कैमरों से ई-चालान जारी हो रहा है?

हाई रेज्यूलेशन कैमरों से वाहनों की पहचान की जा रही है। ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने पर ई-चालान जारी होता है और बार-बार नियम तोडऩे पर कार्रवाई तय है।

  • साइबर ठगों के इस नए हथियार से लोगों को कैसे जागरूक किया जा रहा है?

किसी भी साइबर फ्रॉड की स्थिति में तुरंत साइबर थाने में संपर्क करें। साइबर ठगों के नेटवर्क को तोडऩे के लिए पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है और हाल ही में कई आरोपियों को पकड़ा भी गया है।

डी. रविशंकर, अपर परिवहन आयुक्त, परिवहन विभाग