
GATE में हाईटेक नकल रैकेट का भंडाफोड़! 10-15 लाख में बेचा जाता था फर्जी रिजल्ट, जानें पूरा मामला...(photo-AI)
GATE Exam Cheating Racket: देश की प्रतिष्ठित स्नातक अभियंत्रण योग्यता परीक्षा GATE (Graduate Aptitude Test in Engineering) में नकल के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। रायपुर पुलिस की कार्रवाई में तीन इंजीनियर और तीन साल्वर गिरफ्तार किए गए हैं। पूछताछ में सामने आया है कि हरियाणा का एक संगठित गिरोह हमनाम अभ्यर्थियों को 10 से 15 लाख रुपये में फर्जी परीक्षा परिणाम उपलब्ध कराता था।
जांच में पता चला कि गिरोह की कार्यप्रणाली बेहद शातिर और योजनाबद्ध थी। परीक्षा में बैठने वाले अभ्यर्थियों को फार्म भरते समय सरनेम न लगाने की सलाह दी जाती थी, ताकि बाद में पहचान मिलान में दिक्कत न आए। गिरोह ऐसे उम्मीदवारों को टारगेट करता था जिनका नाम आरोपित साल्वरों से मिलता-जुलता हो। कॉलेज में नामांकन प्रक्रिया के दौरान भी गिरोह के सदस्य सक्रिय रहते थे और मिलते-जुलते चेहरे व नाम वाले अभ्यर्थियों से संपर्क साधकर सौदा तय करते थे।
पुलिस पूछताछ में आरोपितों ने बताया कि परीक्षा पास कराने के लिए पहले दो लाख रुपये अग्रिम लिए जाते थे। रिजल्ट घोषित होने के बाद गिरोह का सरगना शेष राशि वसूलता था। साल्वर के रूप में परीक्षा देने वाले आरोपितों को तीन लाख रुपये तक दिए जाते थे। उनका काम परीक्षा देने के बाद खत्म हो जाता था, जबकि असली कमाई रिजल्ट बेचने में होती थी।
गिरफ्तार आरोपित लक्ष्मीनारायण उर्फ लक्की, सुमित सहवाग और अमर अब तक 10 से 12 अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल हो चुके हैं। सुमित सहवाग के मोबाइल से दिल्ली और हरियाणा पुलिस समेत अन्य विभागों के एडमिट कार्ड बरामद हुए हैं। इससे संकेत मिलते हैं कि नेटवर्क केवल GATE तक सीमित नहीं था, बल्कि अन्य सरकारी परीक्षाओं में भी सक्रिय रहा हो सकता है।
आरोपी अमर जम्मू में चिनाब वैली पावर प्रोजेक्ट में असिस्टेंट इंजीनियर के पद पर कार्यरत बताया गया है। वह किश्तवाड़ की क्वार जल विद्युत परियोजना में पदस्थ था, लेकिन कई दिनों से ड्यूटी पर अनुपस्थित था। वहीं एक अन्य आरोपी गुरुग्राम की निजी कंपनी में कार्यरत बताया गया है।
पुलिस के अनुसार, परीक्षा के दौरान इस्तेमाल किया गया ब्लूटूथ ईयरपीस महज 10 हजार रुपये में ऑनलाइन उपलब्ध है। इस हाईटेक डिवाइस के जरिए बाहर बैठे लोग प्रश्नों के उत्तर उपलब्ध कराते थे। अब पुलिस डिजिटल साक्ष्यों, बैंक खातों और कॉल डिटेल्स की गहन जांच कर रही है, ताकि गिरोह के सरगना और उससे जुड़े अन्य सदस्यों तक पहुंचा जा सके।
इस खुलासे ने देश की प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि समय रहते ऐसे रैकेट पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो मेधावी छात्रों का भविष्य दांव पर लग सकता है। पुलिस का दावा है कि जांच के दायरे में और भी नाम सामने आ सकते हैं तथा आने वाले दिनों में इस हाईटेक नकल गिरोह से जुड़े बड़े खुलासे संभव हैं।
Published on:
17 Feb 2026 10:39 am
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