रायपुर

AIIMS Raipur: एम्स में बड़ी लापरवाही, लिवर फेल्योर के मरीज का इलाज करने के बजाय कर दिया रेफर, आंबेडकर में हो गई मौत

AIIMS Raipur: एम्स ले जाने के पहले किसी निजी अस्पताल में मरीज का इलाज चल रहा था। हालत गंभीर होने पर एम्स ले जाया, लेकिन वहां बेड नहीें होने की बात कही गई।

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May 08, 2026
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (Photo Patrika)

AIIMS Raipur: एम्स प्रबंधन ने बीती रात लिवर फेल्योर के एक मरीज का इलाज करने के बजाय आंबेडकर अस्पताल रेफर कर दिया। मरीज की हालत गंभीर थी। परिजनों के अनुसार डॉक्टरों ने मरीज को यह कहते हुए भर्ती करने से इनकार कर दिया कि बेड फुल है। रात साढ़े 10 बजे के आसपास आंबेडकर अस्पताल में मरीज को भर्ती किया। गुरुवार की सुबह साढ़े 9 बजे के आसपास मरीज ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। परिजनों का आरोप है कि एम्स में समय पर इलाज शुरू होता तो मरीज की जान बचाई जा सकती थी। मरीज का लिवर फेल से होने से मल्टी ऑर्गन फेल हो गए थे। इसमें किडनी और ब्रेन भी शामिल थे।

बोरियाखुर्द में रहने वाले भरत गोस्वामी की लिवर में गंभीर समस्या थी। परिजन मरीज को लेकर रात 8 बजे के आसपास एम्स पहुंचे थे। परिजनों के अनुसार एम्स ले जाने के पहले किसी निजी अस्पताल में मरीज का इलाज चल रहा था। हालत गंभीर होने पर एम्स ले जाया, लेकिन वहां बेड नहीें होने की बात कही गई। रात 9 बजे के आसपास मरीज को एम्स की एंबुलेंस से आंबेडकर अस्पताल रेफर किया गया। मरीज की बहन ममता गोस्वामी के अनुसार आंबेडकर अस्पताल के बाहर मरीज को डेढ़ से दो घंटे एंबुलेंस में ही रखा गया। एंबुलेंस में आया एक स्टाफ कहीं चला गया था। काफी मशक्कत के बाद मरीज को ट्रामा सेंटर में भर्ती किया गया। गुरुवार की सुबह मरीज की मौत तक ट्रामा सेंटर में ही रहा।

लोकसभा में उठ चुका है मामला फिर भी इलाज में गंभीरता नहीं एम्स से मरीजों को रेफर करने का मामला पिछले साल लोकसभा में उठ चुका है। रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने यह मामला उठाया था। तब केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री ने सांसद को बताया था कि रोजाना 17 से ज्यादा मरीजों को रेफर किया जा रहा है। अब इसकी संख्या बढ़ गई है। कुछ मरीजों को तो निजी अस्पताल भी रेफर किया जा रहा है, जो नियम विरुद्ध है। इसका खुलासा पत्रिका ने किया था। कायदे से आंबेडकर अस्पताल से मरीजों को एम्स रेफर किया जाना चाहिए, लेकिन यहां एम्स प्रशासन अलग कर रहा है। इसी साल ज्ञानपीठ विजेता साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल के इलाज में इस कदर लापरवाही बरती गई कि परिजन खफा हो गए। अंतत: साहित्यकार ने एम्स में ही दम तोड़ दिया।

एम्स का परसेप्शन कमजोर, 20.62 अंक मिले

द नेशनल इंस्टीटूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) की रिपोर्ट में परसेप्शन के मामले में एम्स फिसड्डी साबित हुई है। इसमें 100 में केवल 20.62 अंक मिले हैं। ये रिपोर्ट पिछले साल आई थी। जानकारों का कहना है कि परसेप्शन खराब होने का कारण संभवत: मरीजों को रेफर करना हो सकता है। रिसर्च व पब्लिकेशन भी एम्स फिसड्डी है।

इस मामले में 40 में 10.62 व 12 अंक ही मिले हैं। एम्स पिछली बार 38वीं से छलांग लगाकर 31वीं रैंङ्क्षकग पर आया है। संस्थान की आम धारणा अपेक्षाकृत बहुत कम•ाोर है, जो ब्रांड वेल्यू और पहचान को प्रभावित करती है। एम्स जैसे राष्ट्रीय संस्थान में रिसर्च व पब्लिकेशन बहुत कमजोर है। जबकि यहां के डॉक्टर तो प्राइवेट प्रैक्टिस भी नहीं करते।

मरीज की स्थिति काफी गंभीर थी और उसे आईसीयू में बेड की जरूरत थी, लेकिन एम्स के सभी बेड फुल थे। इसलिए मरीज को एंबुलेंस से आंबेडकर अस्पताल रेफर किया गया। एंबुलेंस में डॉक्टर व जरूरी स्टाफ भी थे। मरीज की मौत की जानकारी नहीं है।

  • डॉ. लक्ष्मीकांत चौधरी, असिस्टेंट पीआरओ एम्स
Updated on:
08 May 2026 09:11 am
Published on:
08 May 2026 09:05 am
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