कोरबा जिले में मारपीट करने वालों पर पुलिस द्वारा कार्रवाई नहीं किए जाने से परेशान शख्स द्वारा आत्महत्या किए जाने का मामला सामने आया है।
रायपुर. छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में मारपीट करने वालों पर पुलिस द्वारा कार्रवाई नहीं किए जाने से परेशान शख्स द्वारा आत्महत्या किए जाने का मामला सामने आया है। उरगा थानांतर्गत ग्राम देवरमाल निवासी गणपत भारद्वाज ने खुदकुशी कर ली।
बताया जाता है कि गनपत की नाबालिग बेटी को पड़ोस में रहने वाले पुरुषोत्तम बघेल का रिश्तेदार सोमदत्त पूर्व में घर से भगा ले गया था। कुछ दिन जेल में रहने के बाद बाहर निकला सोमदत्त फिर से नाबालिग से मिलने का प्रयास कर रहा था। गनपत ने पुरुषोत्तम से सोमदत्त को मना करने के लिए कहा था।
24 जुलाई की शाम करीब 7 बजे पुरुषोत्तम बघेल, आंनद बघेल, किशन बघेल पुरुषोत्तम बघेल की पत्नी, रूपेश बघेल व परिवार के अन्य सदस्य हाथ में डंडा, ईट-पत्थर लेकर गणपत के घर सामने जाकर गाली-गलौच करने लगे। मना करने पर सभी ने गणपत, उसके भाई राजू, मां मगंली बाई को पीट दिया।
गणपत की शिकायत पर पुरुषोत्तम बघेल, आंदन बघेल, किशन बघेल, रूपेश बघेल पर पुलिस ने जुर्म दर्ज किया था। वहीं इसी मामले में दूसरे पक्ष ने भी गनपत भारद्वाज व उसके परिजनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पुलिस ने दोनों पक्षों का मुलाहिजा कराया था।
सुसाइड नोट में बीवी और बेटी के लिए लिखी ये बातें
परिजनों ने आरोप लगाया है कि पुलिस द्वारा कार्रवाई नहीं होने से गणपत ने आत्महत्या की है। पुलिस ने मौके से एक सुसाइड नोट बरामद किया है, जिसमें लिखा है कि मैं अपनी मर्जी से आत्महत्या कर रहा हूं। इसके लिए कोई भी अन्य व्यक्ति जिम्मेदार नहीं है। पत्नी और बेटी से माफी भी मांगने का जिक्र है।
गनपत का भाई राजू भारद्वाज ने कहा कि मारपीट के बाद से भाई गनपत बेहद हताश था। पुरुषोत्तम और उनके परिजनों में हम सभी को घर में घुसकर मारा था। लेकिन पुलिस ने हफ्ताभर बीत जाने के बाद कोई कार्रवाई नहीं की। पुरुषोत्तम और उसके परिवार के कारण ही भाई की जान गई है। इसलिए दोषियों के विरूद्ध ठोस कार्रवाई होनी चाहिए।
उरगा थाना प्रभारी राजेश चंद्रवंशी ने कहा कि सप्ताह भर पहले दोनो पक्षों के बीच मारपीट हुई थी। जिसके बाद दोनों पर बलवा का अपराध कायम किया गया था। मारपीट के संबंध में धाराएं जोडऩे के लिए डॉक्टर की एक्स-रे रिपोर्ट हमें प्राप्त नहीं हुई थी, इसलिए गिरफ्तारी नहीं हो सकी थी। एकपक्षीय कार्रवाई और कार्रवाई में भेदभाव के आरोप निराधार हैं।