जीआइएस सर्वे के बाद दो हजार से 10 हजार रुपए संपत्तिकर का डिमांड नोट वार्ड पार्षद भी खुद दर्ज करा रहे आपत्ति
संतराम साहू@रायपुर . ऑनलाइन सम्पत्ति कर घर बैठे चुकाने के नाम पर नगर निगम राजस्व विभाग द्वारा 2018-19 के लिए बढ़े हुए सम्पत्तिकर का डिमांड नोट घर-घर जाकर छोड़ रहे है। इस पर्ची को देख लोग चकित हो रहे हैं।
पर्ची में चालू वित्तीय वर्ष 2018-19 का संपत्तिकर 100 प्रतिशत से भी ज्यादा बढ़ी हुई है। यही नहीं, एक मंजिला मकान के सम्पत्तिकर की गणना तीन मंजिल के हिसाब से की गई है।
किसी का सम्पत्तिकर पांच हजार रुपए तो किसी को 10 हजार रुपए तक बढ़ा हुआ है। यानी जो लोग दो हजार रुपए सम्पत्तिकर जमा करते थे, उनसे अब 7 हजार रुपए और जो लोग 9 हजार रुपए सम्पत्तिकर जमा करते थे, उनके यहां 18 हजार रुपए की पर्ची छोड़ी गई है। इस तरह की शिकायतें सभी वार्डों से आ रही है।
निजी एजेंसी से कराए गए जीआइएस सर्वे में भारी गडग़ड़ी सामने आ रही है। सर्वे के दौरान कंपनी के कर्मचारियों ने किसी का प्लॉट एरिया दो गुना बताया है, तो किसी के एक मंजिला मकान को दो मंजिला बताया है। जो मकान रहवासी है, उसे कमर्शियल बताकर सम्पत्तिकर लगाया गया है।
सुंदर नगर निवासी सुधीर गौतम ने बताया कि पहले वह सम्पत्तिकर 2 हजार रुपए के करीब हर साल जमा करता था, लेकिन इस बार निगम अमले ने 4500 रुपए की पर्ची छोड़ी है।
शांति नगर निवासी बीआर जैन ने बताया कि उनका सम्पत्तिकर 10 हजार रुपए दिखा रहा है। पता किया तो एक मंजिला मकान को तीन मंजिला बताया गया है।
शांति नगर निवासी एसआर राठौर ने बताया कि उनके मकान का क्षेत्रफल करीब 1500 वर्गफीट है। सर्वे में मकान का क्षेत्रफल 2500 वर्गफीट बताया गया है। सम्पत्तिकर २५ हजार दिखा रहा है।
चौरसिया कॉलोनी निवासी राहुल गुप्ता ने बताया कि उनके मकन का क्षेत्रफल एक हजार वर्गफीट है, जबकि सर्वे में 2000 वर्गफीट दिखा रहा है। सम्पत्तिकर 5 हजार रुपए बता रहा है, जबकि पिछले साल 2 हजार रुपए जमा किया था।
सर्वे कंपनी के कर्मचारियों ने वार्डों में मकानों के सर्वे के दौरान मकानों, दुकानों व अन्य संस्थानों की बगैर नाप-जोख किए ही अपने हिसाब से क्षेत्रफल लिख दिया। जिस मकान में लोग थे, उनसे मौखिक पूछकर ही क्षेत्रफल लिखा गया। एक मंजिला मकान को दो और तीन मंजिला लिख दिया गया। यही कारण है कि सम्पत्तिकर की गणना के समय पिछले साल की तुलना में भारी बढ़ोतरी हुई है।
सर्वे में गड़बड़ी उजागर होने के बाद निगम के अधिकारी कह रहे हैं कि जो भी गड़बड़ी हुई, उसे लोगों की शिकायत के बाद दुरुस्त किया जा रहा है। गड़बड़ी सुधारने के लिए मार्च 2019 तक समय है। पहले जीआइएस सर्वे में गड़बड़ी नजर आती है, तो मकान की रजिस्ट्री व अन्य दस्तावेज दिखाकर गड़बड़ी सुधरवा सकते हैं।
निगम प्रशासन पहले शहर में ढाई लाख मकान होने की बात करता था, लेकिन सर्वे में तीन लाख मकान सामने आए हैं। तीन लाख मकानों को ही सम्पत्तिकर के दायरे में शामिल किया गया है। निगम पहले जहां 100 से 125 करोड़ रुपए तक संपत्तिकर के रूप में वसूलता था, जहां इस वित्तीय वर्ष में निगम ने 150 करोड़ रुपए वसूलने का टारगेट रखा है।
नगर निगम आयुक्त रजत बंसल ने बताया कि जीआइएस सर्वे में जो भी गड़बड़ी हुई है, उसे दुरुस्त कराने के लिए भवन स्वामियों को मार्च 2019 तक का समय दिया गया है। लोगों को जोन कार्यालय में मकान या प्लॉट की रजिस्ट्री पेपर लेकर जाना होगा, तत्काल दुरुस्त हो जाएगा। इसके बाद ही लोग सम्पत्तिकर भरें ।