
रायपुर@ नारद योगी। Mahadev Betting App Investigation: महादेवबुक सट्टा ऐप के संचालक सौरभ चंद्राकर के ओमान में पकड़े जाने की खबर से राजधानी के कई सफेदपोशों में हड़कंप मच गया है। गिरफ्तारी के बाद से उसके नेटवर्क से जुड़े कई लोग बेनकाब होंगे। रायपुर के कबाड़ी से लेकर बड़े कारोबारी, नेताओं, अफसरों और सट्टेबाजों का सौरभ से सीधा कनेक्शन रहा है।
उसकी मदद से किसी ने रायपुर में क्लब खोल लिया है, तो किसी ने आलीशान फार्महाउस बना लिया है। इन सफेदपोशों का ऑनलाइन सट्टे की कई कार्रवाई में नाम उजागर हो चुका है, लेकिन इनके खिलाफ अब तक कार्रवाई नहीं हुई है।
पुलिस से बचने के लिए किसी ने बड़ा धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन करवा लिया, तो किसी ने अपनी राजनीतिक जुगाड़ से खुद को सुरक्षित कर लिया। उल्लेखनीय है कि अलग-अलग थानों में महादेवबुक (Mahadev Betting App Case) से संबंधित करीब 40 एफआईआर दर्ज है। इसमें सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल और शुभम सोनी को भी आरोपी बताया गया है।
विधानसभा इलाके के एक सटोरिए ने सौरभ से मिले पैसों से प्राइम लोकेशन में प्लाट खरीदा। इसके बाद उसे क्लब बनाया। इसी क्लब में महादेवबुक सट्टा ऐप चलाने वालों की बैठक होती थी। इसी तरह एक कबाड़ी ने भी इसी इलाके में बड़ा फार्म हाउस खरीदा है। कबाड़ी के खिलाफ सिविल लाइन के अलावा बिलासपुर में भी मामला दर्ज है। सूत्रों के मुताबिक तिल्दा-नेवरा, रामसागरपारा, मौदहापारा, आजादचौक, आमानाका, शंकर नगर, पुरानीबस्ती सहित अन्य इलाकों में रहने वाले बड़े सटोरिए, जो सीधे सौरभ के संपर्क में थे, उनके खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है।
महादेवबुक सट्टा मामले में रायपुर में अब तक 250 से अधिक आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इसमें अधिकांश आईडी-पैनल संचालित करने वालों के लिए काम करने वाले हैं। पुलिस ने इन्हें जेल भेजा, लेकिन पैनल ऑनर बहुत कम पकड़े गए हैं। कई पैनल संचालकों का नाम उजागर नहीं हो पाया है।
सौरभ चंद्राकर (Saurabh Chandrakar Arrest) भिलाई का रहने वाला है। उसका शुरुआती जीवन साधारण रहा—उसके पिता नगर निगम में पंप ऑपरेटर थे और वह खुद एक छोटी जूस की दुकान चलाता था। अधिक कमाई की चाह में वह साल 2019 में दुबई चला गया, जहां उसने अपने साथी रवि उत्पल के साथ मिलकर महादेव एप की शुरुआत की। धीरे-धीरे यह प्लेटफॉर्म ऑनलाइन सट्टेबाजी की दुनिया में बड़ा नाम बन गया। जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह एप न सिर्फ खेलों बल्कि देश में होने वाले चुनावों तक पर दांव लगाने की सुविधा देता था, जिससे इसका नेटवर्क और भी व्यापक हो गया।