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करधन से साड़ी तक… पंडवानी की अमर गाथा को सहेजेगा परिवार, तीजन बाई के गांव में बनेगा संग्रहालय

Teejan Bai Memorial: पंडवानी की अमर स्वर साधिका तीजन बाई भले ही अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी कला और विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक जीवित रखने की तैयारी शुरू हो गई है।
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रायपुर

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Khyati Parihar

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अश्वनी कुमार प्रभात

Jul 10, 2026

Teejan Bai Tambura

तीजन बाई (फोटो सोर्स- पत्रिका)

रायपुर@अश्वनी कुमार प्रभात। Teejan Bai: पंडवानी की अमर स्वर साधिका तीजन बाई अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज, उनकी शैली और उनकी पहचान आने वाली पीढ़ियों तक जीवित रहे, इसके लिए परिवार ने बड़ा फैसला लेने की तैयारी शुरू कर दी है। राज्य सरकार द्वारा उनके तंबूरे को संग्रहालय में सुरक्षित रखने की घोषणा के बाद अब परिवार चाहता है कि सिर्फ तंबूरा ही नहीं, बल्कि तीजन बाई की पूरी सांस्कृतिक विरासत को भी सहेजा जाए।

पंडवानी की अमर गाथा को सहेजेगा परिवार

परिवार के अनुसार, तीजन बाई मंच पर जिस पारंपरिक वेशभूषा में पंडवानी की प्रस्तुति देती थीं, वही उनकी वैश्विक पहचान बन चुकी थी। उनके करधन, साड़ी, अइठी, पहुची, सूता, आभूषण और मंच पर इस्तेमाल की जाने वाली अन्य सामग्री को भी सुरक्षित रखा जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां सिर्फ उनकी कला ही नहीं, बल्कि उनके जीवन और व्यक्तित्व को भी करीब से समझ सकें। तीजन बाई की सबसे करीबी और अंतिम समय तक उनकी साथ रहने वाली उनकी बहू गनियारी निवासी रेनू बाई ने बताया कि परिवार गांव में ही तीजन बाई की स्मृतियों को समर्पित एक संग्रहालय बनाने पर विचार कर रहा है।

यदि यह संभव नहीं हो पाया तो संस्कृति विभाग से भी आग्रह किया जाएगा कि उनकी सभी निशानियों को किसी सरकारी संग्रहालय में संरक्षित किया जाए। परिवार का मानना है कि यह सिर्फ एक कलाकार की यादों को सहेजने का प्रयास नहीं होगा, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति और पंडवानी की गौरवशाली परंपरा को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी भी होगी।

तीजन बाई इंडिया लिखना ही पर्याप्त था

तीजन बाई की पहचान ऐसी थी कि विदेशों से आने वाले पत्रों पर कई बार सिर्फ तीजन बाई इंडिया लिखना ही पर्याप्त था और वे उनके पास पहुंच जाता था। यह उनकी अंतरराष्ट्रीय पहचान और कला के प्रति दुनिया के सम्मान का सबसे बड़ा प्रमाण माना जाता है।

सांस्कृतिक आत्मा की आवाज

प्रदेशभर में उनके निधन के बाद शोक और श्रद्धांजलि का दौर जारी है। लोक कलाकारों, साहित्यकारों और संस्कृति प्रेमियों का मानना है कि तीजन बाई केवल एक कलाकार नहीं थीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक आत्मा की सबसे बुलंद आवाज थीं।

सरकार ने भी उठाया बड़ा कदम

राज्य सरकार ने हाल ही में तीजन बाई के सम्मान में राज्य अलंकरण शुरू करने और उनके प्रिय तंबूरे को संग्रहालय में सुरक्षित रखने का निर्णय लिया है। अब परिवार चाहता है कि इस पहल को आगे बढ़ाते हुए उनकी पारंपरिक वेशभूषा, आभूषण और मंचीय सामग्री को भी संरक्षित किया जाए, ताकि पंडवानी की इस महान परंपरा का पूरा इतिहास आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंच सके।