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‘माथे पर तिलक और मुख में राम नाम’, रायपुर में देवकीनंदन ठाकुर ने बताई सनातनी पहचान

Devkinandan Thakur Speech: कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि बच्चों को बचपन से सत्संग और श्रीमद्भागवत कथा से जोड़ना चाहिए, क्योंकि अच्छे संस्कार ही उन्हें अपराध और गलत रास्ते पर जाने से बचाते हैं।
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Devkinandan Thakur Katha

देवकीनंदन ठाकुर की कथा में संस्कारों पर जोर (photo source- Patrika)

Devkinandan Thakur Katha: शहर के इंडोर स्टेडियम में कथा सुना रहे देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि बच्चों को अच्छा संस्कार देकर ही अपराध और गलत मार्ग पर जाने से बचाया जा सकता है। ऐसा कोई माता-पिता नहीं, जो यह नहीं चाहते कि उनका बच्चा अच्छे मार्ग पर चले। इसलिए बच्चों को सबसे पहले सत्संग और कथा आयोजन से जरूर जोड़ें। कथा स्थल पर लोग दोपहर से ही पहुंचने लगे थे।

Sanatan Dharma: 14 जुलाई तक चलेगी कथा

जहां माथे पर टीका लगाकर नहीं आने वाले श्रद्धालुओं को टीका लगाकर अंदर जाने की अनुमति दी जा रही है। इस व्यवस्था से सभी श्रद्धालु तिलक धारण किए हुए नजर आए। कथा का आयोजन वैश्य फेडरेशन द्वारा किया जा रहा है। दूसरे दिन गुरुवार को तकनीकी शिक्षा मंत्री गुरु खुशवंत साहेब (Guru Khushwant Saheb) पहुंचे और व्यासपीठ का आशीर्वाद प्राप्त कर कथा श्रवण किया। कथा संयोजक योगेश अग्रवाल ने बताया कि कथा पंडाल एक दिव्य और सनातनी स्वरूप में परिवर्तित हो गया। 14 जुलाई तक कथा चलेगी। प्रतिदिन दोपहर 3:30 बजे से प्रारंभ होती है।

सवाल… छोटी-छोटी बातों पर हिंसक क्यों हो रहे

चिंता और सवालों के साथ कथाकार देवकी नंदन ठाकुर ने कहा कि आज के समय में बच्चे छोटी-छोटी बातों पर हिंसक क्यों हो रहे हैं, इस पर जरूर चिंतन करें। साथ ही यदि यह चाहते हैं कि आने वाली पीढ़ी को संस्कारवान, चरित्रवान और धर्मनिष्ठ बनाना चाहते हैं, तो उन्हें बचपन से ही सत्संग और श्रीमद्भागवत कथा (Identity of being Sanatani) से जोड़ना होगा। माता-पिता का यह दायित्व है। क्योंकि कथा के माध्यम से बच्चों को भगवान श्रीकृष्ण, भगवान श्रीराम और महान संतों के आदर्श जीवन से प्रेरणा मिलती है।

religious news: शिखा, ज्ञान, संयम और वैदिक परंपरा

कथा सुनने पहुंचे श्रद्धालुओं को सनातनी होने की पहचान भी बताया। (Bhagwat Katha News) महाराज ने कहा कि माथे पर तिलक, सिर पर शिखा, गले में तुलसी की माला और मुख में राम नाम होना चाहिए– ये केवल पहचान नहीं, बल्कि आत्मिक अनुशासन के प्रतीक हैं। शिखा ज्ञान, संयम और वैदिक परंपरा के प्रति श्रद्धा का प्रतीक है। तुलसी की माला भगवान के प्रति भक्ति, पवित्रता और सात्विक जीवन का संदेश देती है।

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